हत्यारों के न हाथ कांपे न कलेजा, झूठी शान पर कुर्बान हुईं बेटियां, ये था उनका गुनाह
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
बड़ी बेजा थीं वे। इतनी कि उनके अपने तक उन्हें बर्दाश्त नहीं कर सके। दुनिया तो क्या करती। उनका कुसूर भी बहुत बड़ा था। जैसा कि लोग कहते हैं, उनके चरित्र खराब थे। लड़की होकर मर्यादा भूल गईं। जिसके बोझ तले उनका सारा वजूद दबा है, उस मर्यादा को भूलना गुनाह है। उसके बिना आसमीन और सोनम कोई मायने नहीं रखती। इसलिए झूठी आन की खातिर अपनों ने ही दोनों की बलि चढ़ा दी...
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
बड़ी बेजा थीं वे। इतनी कि उनके अपने तक उन्हें बर्दाश्त नहीं कर सके। दुनिया तो क्या करती। उनका कुसूर भी बहुत बड़ा था। जैसा कि लोग कहते हैं, उनके चरित्र खराब थे। लड़की होकर मर्यादा भूल गईं। जिसके बोझ तले उनका सारा वजूद दबा है, उस मर्यादा को भूलना गुनाह है। उसके बिना आसमीन और सोनम कोई मायने नहीं रखती। इसलिए झूठी आन की खातिर अपनों ने ही दोनों की बलि चढ़ा दी...
बागपत जनपद की दिव्यांग आसमीन और 17 साल की सोनम को मारने वालों का न कलेजा कांपा और न हाथ। सोनम को मारकर उसकी लाश जला दी गई। अवशेषों से उसकी पहचान हुई। घरवालों ने आसमीन की लाश तक को नहीं अपनाया। रिश्तेदारों ने उसे कफन नसीब कराया।
उसकी याद में मातम करने वाला कोई नहीं। उसके मरने से किसी को फर्क नहीं पड़ता। आसमीन की अम्मी भी दुनिया सी सख्त नजर आती हैं। उनकी आंखों में बेटी के नाम के दो आंसूं तक नहीं हैं। वहीं सोनम की अम्मी उसकी तस्वीर देखकर अपनी ममता नहीं रोक पातीं। अफसोस! कि यह ममता उनकी फूल सी बच्ची को बचा नहीं सकी।
सीना ताने लोग कहते हैं, गलत थी इसलिए मार दिया। गलत और सही के पैमाने पर हमेशा बेटियां ही तौली जाती रहीं हैं। आसमीन और सोनम, ये दो नाम बागपत के हैं लेकिन मेरठ मंडल में इनके जैसी अनगिन लड़कियां हैं। कुछ की चीखें सुनाई दे जाती हैं तो कुछ खामोशी से दफन कर दी जाती हैं।
घटना की प्रत्यक्षदर्शी बसकरी के मकान में आसमीन रहती थी। उन्होंने भी उसे गफ्फार के साथ नहीं देखा जिसके साथ चचेरे भाई को उसके प्रेम संबंध का शक था। उसने पहले गफ्फार को गोली मारी और फिर आसमीन को। गफ्फार भी शादीशुदा था। उसके घरवाले आसमीन के किरदार पर ही उंगलियां उठाते हैं। औरत जो थी।
बड़ौत की नई बस्ती में 24 जुलाई 2019 को आसमीन के चचेरे भाई आबिद ने प्रेम संबंध के शक में पहले गफ्फार को गोली मारी। उसके बाद बहन के घर में घुसकर उसे मार डाला। आरोपी जेल में है।
सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र के महेशपुर चौपड़ा गांव के जंगल में युवती की हत्या कर शव को जला दिया गया। 18 जुलाई 2019 को रजबहे की पटरी अधजली लाश मिली। 29 जुलाई को मामले का खुलासा हुआ। यह लाश सोनम की थी। पिता और दो भाइयों ने प्रेम प्रसंग में सोनम की गला घोंटकर हत्या कर दी। आरोपी पिता जेल में है।
बहुत समझाई पर नहीं मानी
दोझा गांव की 17 वर्षीय सोनम रूप-रंग में सोहणी थी। हंसमुख स्वभाव की थी। उसकी बातें करते हुए मां अख्तरी भावुक हो जाती हैं। सोनम दूसरे के खेत में मजदूरी करने जाती थी। उसी व्यक्ति के साथ उसके प्रेम संबंध थे। अख्तरी कहती हैं, हमने उसे बहुत समझाया पर मानी नहीं। घटना के बारे में मुझे कुछ नहीं पता। मैं बीमार थी। जो हुआ, गलत तो था।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/