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बदमाशों के एमपी में सरेंडर करने का इतिहास पुराना
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बदमाशों के एमपी में सरेंडर करने का इतिहास पुराना
बिजनौर। पांच लाख के इनामी विकास दुबे की मध्यप्रदेश में गिरफ्तारी के बाद साफ हो गया कि एक दरोगा के बिजनौर में उसे देखे जाने का दावा झूठा था। रिटायर सीओ एमपी सिंह का कहना है कि यूपी के बदमाशों के मध्य प्रदेश सरेंडर करने का इतिहास पुराना है।
विकास दुबे के उज्जैन में पकड़े जाने को पुलिस के रिटायर अफसर पुलिस की नाकामी बता रहे हैं। रिटायर सीओ एमपी सिंह का कहना है कि विकास दुबे उज्जैन में पकड़ा नहीं गया बल्कि उसने वहां पुलिस की सेटिंग से सरेंडर किया है। पुराना इतिहास रहा है कि दुर्दात अपराधी मध्य प्रदेश में सरेंडर करते आए हैं। ऐसा ही विकास दुबे ने भी किया है। एमपी सिंह के मुताबिक यूपी के दुर्दात अपराधी मलखान सिंह, माधो सिंह, मोहर सिंह, पंडित विद्यासागर, ऊष्मा ठाकुर, फूलन देवी ने भी मध्य प्रदेश में ही सरेंडर किया था। उन्होंने कहा कि विकास दुबे को दबोचने वाली पुलिस टीम को उन्होंने अपनी ओर से 21 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। विकास दुबे के मध्य प्रदेश में सेटिंग से सरेंडर करने पर उनके इनाम देने की घोषणा भी खत्म हो गई है क्योंकि पुलिस ने उसे नहीं पकड़ा है। इसलिए किसी को इनाम देने का सवाल ही नहीं उठता है।
तीन दिन तक विकास की तलाश करती रही बिजनौर पुलिस
आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने के बाद पूरे सूबे की पुलिस पांच लाख के इनामी बदमाश विकास दुबे की तलाश में थी। सोमवार को एक दरोगा ने हल्दौर थाना क्षेत्र के अम्हेड़ा में विकास दुबे के अपने छह साथियों के साथ दो स्कार्पियो कार में सवार होने की सूचना पर जिले भर की पुलिस ने विकास दुबे को जिले में खंगालना शुरू कर दिया था। पूरे जिले में तीन दिन तक चेकिंग अभियान चला। पर नतीजा कुछ नहीं निकला। दोनों स्कार्पियो गाड़ी भी नहीं मिली। बाद में पुलिस अफसर कहते रहे कि दरोगा ने विकास दुबे को देखे जाने की फर्जी सूचना दी थी। पुलिस का चेकिंग अभियान ऐहितयातन चलता रहा।
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बिजनौर। पांच लाख के इनामी विकास दुबे की मध्यप्रदेश में गिरफ्तारी के बाद साफ हो गया कि एक दरोगा के बिजनौर में उसे देखे जाने का दावा झूठा था। रिटायर सीओ एमपी सिंह का कहना है कि यूपी के बदमाशों के मध्य प्रदेश सरेंडर करने का इतिहास पुराना है।
विकास दुबे के उज्जैन में पकड़े जाने को पुलिस के रिटायर अफसर पुलिस की नाकामी बता रहे हैं। रिटायर सीओ एमपी सिंह का कहना है कि विकास दुबे उज्जैन में पकड़ा नहीं गया बल्कि उसने वहां पुलिस की सेटिंग से सरेंडर किया है। पुराना इतिहास रहा है कि दुर्दात अपराधी मध्य प्रदेश में सरेंडर करते आए हैं। ऐसा ही विकास दुबे ने भी किया है। एमपी सिंह के मुताबिक यूपी के दुर्दात अपराधी मलखान सिंह, माधो सिंह, मोहर सिंह, पंडित विद्यासागर, ऊष्मा ठाकुर, फूलन देवी ने भी मध्य प्रदेश में ही सरेंडर किया था। उन्होंने कहा कि विकास दुबे को दबोचने वाली पुलिस टीम को उन्होंने अपनी ओर से 21 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। विकास दुबे के मध्य प्रदेश में सेटिंग से सरेंडर करने पर उनके इनाम देने की घोषणा भी खत्म हो गई है क्योंकि पुलिस ने उसे नहीं पकड़ा है। इसलिए किसी को इनाम देने का सवाल ही नहीं उठता है।
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तीन दिन तक विकास की तलाश करती रही बिजनौर पुलिस
आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने के बाद पूरे सूबे की पुलिस पांच लाख के इनामी बदमाश विकास दुबे की तलाश में थी। सोमवार को एक दरोगा ने हल्दौर थाना क्षेत्र के अम्हेड़ा में विकास दुबे के अपने छह साथियों के साथ दो स्कार्पियो कार में सवार होने की सूचना पर जिले भर की पुलिस ने विकास दुबे को जिले में खंगालना शुरू कर दिया था। पूरे जिले में तीन दिन तक चेकिंग अभियान चला। पर नतीजा कुछ नहीं निकला। दोनों स्कार्पियो गाड़ी भी नहीं मिली। बाद में पुलिस अफसर कहते रहे कि दरोगा ने विकास दुबे को देखे जाने की फर्जी सूचना दी थी। पुलिस का चेकिंग अभियान ऐहितयातन चलता रहा।
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