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हिंदी दिवस: हिंदी को बनाया अपना, सच हुआ सपना, देशभर में पढ़ी गई वर्दी वाले गुंडे की कहानी

Sat, 14 Sep 2019 02:53 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 14 Sep 2019 02:53 PM IST
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Hindi Diwas 2019: Many People Including Novelist Ved Prakash have made their career from Hindi
वेद प्रकाश शर्मा - फोटो : अमर उजाला

अंग्रेजी नहीं तो सफलता नहीं। हिंदी को सफलता में बाधक मानने वाली युवा पीढ़ी आज मातृभाषा पढ़ने से हिचकती है। पब्लिक स्कूलों में छात्र हिंदी पढ़ना पसंद नहीं करते। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विद्यालयों में अंग्रेजी के साथ वैकल्पिक भाषा के रूप में युवा पीढ़ी को फ्रैंच, रशियन और जर्मन विदेशी भाषा सिखाई जाती है, लेकिन छात्र अपनी ही भाषा हिंदी को पढ़ने से कोसों दूर भागने लगे हैं।

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प्रतियोगिता की दौड़ में युवाओं ने हिंदी से जो दूरी बना ली है वो हिंदी आज भी रोजगार का अच्छा माध्यम है। हिंदी पढ़कर भी एक बेहतरीन कॅरियर बनाया जा सकता है। शहर में कई ऐसी प्रतिभाएं हैं जिन्होनें हिंदी से प्रेम किया और हिंदी पढ़कर आगे बढ़े। लेखक, कवि, रचनाकार के साथ ही हिंदी शोधार्थी के रूप में इन लोगों ने हिंदी को गले लगाया। सफलता से इन लोगों ने साबित कर दिया कि हिंदी पढ़ने, लिखने वाले भी मशहूर हो सकते हैं। 
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देशभर में पढ़ी गई वर्दी वाले गुंडे की कहानी
 

रहस्य और रोमांच से भरी जासूसी कहानियों से पाठकों के दिल पर राज करने वाले उपन्यासकार स्वर्गीय वेदप्रकाश शर्मा हिंदी लेखन में अविस्मरणीय नाम हैं। मेरठ की माटी में पुष्पित-पल्लवित होकर वेदप्रकाश शर्मा ने हिंदी का परचम देशभर में फहराया। मजबूत भाषाई पकड़ और शब्दों की कारीगरी में माहिर उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा ने सबसे बड़ा खिलाड़ी, इंटरनेशनल खिलाड़ी और अनाम जैसी फिल्मों को अपनी कहानियां दी।
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उनके द्वारा लिखा जासूसी उपन्यास वर्दी वाला गुंडा देशभर में पाठकों ने बहुत चाव से पढ़ा और सराहा। 176 से अधिक उपन्यास प्रकाशित हुए जिन्होंने मेरठ के माथे पर लेखन में सफलता का हीरा सजाया। कुबड़ा, राखी और सिंदूर, सफेद चूहा, सबसे बड़ा जासूस, चीते का दुश्मन, कोबरे का दुश्मन वेद प्रकाश शर्मा के प्रमुख उपन्यास रहे। 

दुनिया को सुनाई राम की जलसमाधि

लेखक और वक्ताओं के साथ क्रांतिधरा के आंचल में मुक्तक, छंदों के नए रंग भी खूब गहरे हुए है। गीत कवि स्वर्गीय भारत भूषण ने अपने गीतों व कविताओं के माध्यम से काव्य जगत में श्रेष्ठ स्थान लिया। 1946 से मंचों पर अपने कवियों से संगीत की रसधार से अमृत वर्षा करने वाले भारतभूषण का गीत राम की जलसमाधि काफी प्रसिद्ध रचना है।

उन्होंने तीन काव्य संग्रह लिखे जो काफी पसंद किए गए। उनका पहला गीत सागर के सीप 1958 में प्रकाशित हुआ। इसके बाद 1993 में उनका दूसरा संग्रह आया। गीतों में मुख्य रूप से शृंगार रस का भाव मिलता है। महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर जैसे कवियों के साथ भी इन्होंने मंच साझा किए।

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बॉलीवुड में गूंज रहे बंटी के संवाद

कंकरखेड़ा निवासी बंटी राठौर की हिंदी बॉलीवुड में मेरठ की गूंज बन चुकी है। अक्षय कुमार की खिलाड़ी सीरीज से लेकर धमाल, टोटल धमाल, डबल धमाल, एक पहेली लीला, पोस्टर ब्वॉय जैसी फिल्मों के संवाद मेरठ के बंटी राठौर ने ही लिखे हैं।

एसएसडी ब्वॉयज इंटर कॉलेज से पढ़ाई करने वाले बंटी कहते हैं गंगा यमुना के दोआबा की तहज़ीब वाले मेरठ शहर में लोगों की हिंदी कुछ अलग सी है। जिसमें प्यार है तो गन्ने जैसी अक्खड़ता भी है। यही वजह है कि अब बॉलीवुड मेरठ वाली हिंदी को बहुत पसंद कर रहा है। बंटी कहते हैं जमाना समझता है कि अंग्रेजी से ही कॅरियर है, लेकिन मेरा कॅरियर तो मेरी हिंदी ने बनाया है, अंग्रेजी में फिल्मों के संवाद कहां से लिखता। 

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हिंदी पढ़कर मिली यूपीएससी में सफलता

यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में कोई व्यक्ति हिंदी माध्यम से सफलता हासिल कर सकता है लोग इसे मजाक समझते हैं, लेकिन मेरठ के बेटे निशांत जैन ने हिंदी माध्यम से पढ़कर सिविल सर्विसेज में सफलता हासिल की और रैंक भी ली। निशांत जैन ने यूपीएससी की पूरी तैयारी हिंदी माध्यम से की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली।

सिविल सर्विसेज की परीक्षा में निशांत जैन ने ऑल इंडिया में 13वां स्थान और हिंदी माध्यम से सफलता हासिल करने वालों में पहला स्थान लिया। वर्तमान में निशांत राजस्थान में पदस्थ हैं। यूपीएससी में सफल होने के बाद निशांत ने युवाओं को प्रेरणा देने के लिए किताबें भी हिंदी में लिखीं।

निशांत कहते हैं अमूमन हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों को बहुत पिछड़ा हुआ माना जाता है, उनकी सोच हमेशा निमभन समझी जाती है, लेकिन हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले भी कमाल कर सकते हैं बस स्वयं पर भरोसा होना चाहिए।

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