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हिजाब विवाद : कोई फैसले से सहमत, किसी को एतराज, देवबंदी उलमा बोले-पर्दा इस्लाम में जरूरी

Wed, 16 Mar 2022 11:16 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 16 Mar 2022 11:16 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सहारनपुर निवासी फरहा फैज ने हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए अपना फैसला दिया है।

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Hijab controversy: Some agree with the decision, some have objection, Deobandi Ulama said – Curtain is necessary in Islam
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देवबंद दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी का कहना है कि पर्दा इस्लाम में फर्ज (जरूरी) है, इसलिए हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला कबूल करने का लायक नहीं है। कोर्ट को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। 
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मौलाना नोमानी ने देश की सभी सेक्युलर जमातों से मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का आह्वान किया। वहीं जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष व पूर्व सांसद मौलाना महमूद मदनी ने भी कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को देश और मुसलमानों के लिए नुकसानदायक करार दिया है। कहा कि इस फैसले के कई नकारात्मक प्रभाव होंगे। 
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हाईकोर्ट का फैसला स्वागत योग्य : फरहा फैज 
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सहारनपुर निवासी फरहा फैज ने फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए अपना फैसला दिया है। स्कूलों को अपने यहां यूनिफॉर्म तय करने का, अपने कोड ऑफ कंडक्ट को बनाने का पूरा अधिकार है। अगर हिजाब इस्लाम का मूलभूत हिस्सा होता तो यह यह आर्टिकल 25 में उसी तरह संरक्षित होता। 
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हिजाब इस्लाम का हिस्सा, कुरान में भी जिक्र
न्यायालय के आदेश पर किसी तरह की टिप्पणी ठीक नहीं है, लेकिन हमारे देश का संविधान सभी धर्मों के लोगों को जीने और अपने धर्म का पालन की इजाजत देता है। ऐसे में किसी धर्म की मान्यताओं को लेकर कोई आदेश देना या टिप्पणी करना ये संविधान के खिलाफ है। कुरान के सूरे मोमिनीन में मुस्लिम ख्वातीन (महिलाओं) के हिजाब का जिक्र है। मुस्लिम छात्राएं ड्रेस कोड के साथ हिजाब पहनकर स्कूल जाएं और स्कूल में जाकर हिजाब उतार दें, इसमें परेशानी नहीं होनी चाहिए। - प्रोफेसर जैनुस साजिद्दीन, शहरकाजी 

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हिजाब दखल ठीक नहीं
हिजाब इस्लाम धर्म का हिस्सा है और इसमें किसी को दखल देना ठीक नहीं है। मुस्लिम छात्राएं स्कूल ड्रेस के ऊपर हिजाब पहनें और स्कूल जाकर हिजाब उतार दें। - इमरान सिद्दीकी, सामाजिक कार्यकर्ता 

जाएंगे सुप्रीम कोर्ट 
 हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला चौंकाने वाला है। इस्लाम में हिजाब फर्ज है, जिसमें किसी मुस्लिम फिरके को कोई इख्तिलाफ नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। - कारी शफीकुर्रहमान कासमी, खतीब शाही ईदगाह 

हिजाब संस्कृति से जुड़ा है
हिजाब मुद्दा धर्म से जुड़ा नहीं, बल्कि संस्कृति से जुड़ा हुआ है। स्कूल में ड्रेस पहनकर हिजाब पहनें और स्कूल जाकर उतार दें, ये सही है। - दुर्दाना अख्तर, अध्यक्ष मुस्लिम महिला संगठन बज्म ए ख्वातीन 

स्कूल-कॉलेज में हिजाब उचित नहीं
छात्राओं को स्कूल के हिसाब से ही ड्रेस पहननी चाहिए। किसी भी शिक्षण संस्थान में वहां के माहौल के हिसाब से ही रहना चाहिए।  - फरजाना मकसूद, एडीजीसी क्राइम

कैंपस के बाहर निकलने के बाद हिजाब पहन लें 
हिजाब हमारी कल्चर में है लेकिन ये अनिवार्य नहीं है। स्कूल-कॉलेजों में ड्रेस कोड तो सबके लिए एक जैसा होता है। हाईकोर्ट का फैसला सही है। -फैजी तरन्नुम, एडवोकेट

यूनिफॉर्म का करें पालन 
मैं कान्वेंट स्कूल में पढ़ी हूं, बहुत सी लड़कियां घर से हिजाब पहनकर आती थीं, लेकिन स्कूल गेट के भीतर वह यूनिफॉर्म में ही जाती थीं। इसमें क्या दिक्कत है। - आयशा, छात्रा, एमजेएमसी

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