यूपी: कबाड़ी बाजार मामले में लगी तारीख, आगामी तीन मई को होगी हाईकोर्ट में सुनवाई
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मेरठ के कबाड़ी बाजार स्थित रेड लाइट एरिया के मामले में सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने आगामी तीन मई की तारीख नियत की है। यह जानकारी हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने देते हुए बताया कि झूठा हलफनामा पेश करने के आरोपियों पर कार्रवाई करने और रेड लाइट एरिया बंद कराने की बाबत उनकी तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
इस मामले में पूर्व में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अलग-अलग हलफनामा पेश किया गया था, जिसमें जहां स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दाखिल जवाब में जहां देह व्यापार चलने की पुष्टि हो रही थी तो पुलिस की तरफ से देह व्यापार बंद होने की बात कही गई थी। अधिवक्ता सुनील चौधरी के अनुसार हाईकोर्ट ने इस संबंध में तीन मई को सभी बिंदुओं पर जवाब मांगा है।
सीओ के निलंबन की चर्चा
कबाड़ी बाजार प्रकरण में हाईकोर्ट ने जहां झूठा हलफनामा लगाने वाले दो अधिकारियों के निलंबन के आदेश दिए हैं। वहीं मंगलवार रात सोशल मीडिया पर मेसेज वायरल होते रहे कि शासन ने एक सीओ को निलंबित कर दिया है। इस मामले में पुुलिस के अधिकारी कुछ भी बोलने से इंकार करते रहे।
मेरठ में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के सीओ संजीव देशवाल और जिला उद्धार अधिकारी ने झूठे शपथ पत्र दाखिल किए थे। कबाड़ी बाजार इलाके में 52 भवनों में करीब 75 से ज्यादा कोठे संचालित किए जा रहे हैं। इन कोठों पर देह व्यापार होने की बात कहते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की हुई थी।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दाखिल हलफनामे पर 30 अप्रैल को रिपोर्ट दाखिल करने के साथ ही शासन को दोषी अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया है।
अधिकारियों की ओर से कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया गया था कि रेड लाइट एरिया बंद कराया गया और अब देह व्यापार नहीं चल रहा है। जिस पर हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने रिपोर्ट झूठी बता दी।अधिवक्ता सुनील चौधरी की याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई कर रही है।
सुनील चौधरी ने अधिकारियों के बयान का विरोध करते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्ट है कि रेड लाइट एरिया में बाहर से दरवाजों पर ताला लगा दिया गया है। लेकिन भीतर लड़कियां मौजूद हैं और कोठे बाकायदा संचालित किए जा रहे हैं।
हलफनामा में इसका जिक्र नहीं
अधिवक्ता सुनील चौधरी ने बताया कि आरटीआई और आईजीआरएस के तहत बताया गया कि मेरठ सीएमओ कार्यालय से रेडलाइट एरिया में 20 हजार कंडोम वितरित किए हैं। छह देह व्यापार में लिप्त महिलाओं को एचआईवी पॉजीटिव और सात की मौत होना बताया।
इन सभी को पुलिस, प्रशासन व सीएमओ के हलफनामे में इसका जिक्र तक नहीं किया। अधिकारियों के हलफनामे में अधिवक्ता ने कई सवाल किए, उसका जवाब अधिकारी नहीं दे पाए। जिसके बाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि उनके हलफनामे से असंतुष्ट हैं।
दिल्ली से लाकर बेचा जाता है
एएचटीयू के इंस्पेक्टर बृजेश कुमार कुमार का कहना है कि पुलिस पूर्व में लगातार कार्रवाई करती रही है। जांच पड़ताल में यही सामने आता था कि लड़कियों को अपहरण कर पहले दिल्ली में कोठों पर बेचा जाता है उसके बाद अलग अलग स्थानों पर भेजा जाता है। वहीं कोर्ट के सख्त रवैये के बाद मेरठ के कबाड़ी बाजार मामले में विभागों का आपसी समन्वय न होने और झूठे शपथ पत्रों के कारण पुलिस-प्रशासन की हाईकोर्ट में खासी किरकिरी हुई है।
कबाड़ी बाजार व्यापारिक इलाका है। यहां मिश्रित आबादी है। शपथ पत्र में साल 2009 से मेरठ में रेड लाइट एरिया चलाना बताया गया है। तब से यहां से कई संभ्रात परिवार पलायन करके जा चुके हैं। यहां पर लोगों को इसका दंश झेलना पड़ता है। कई व्यापारियों के कारोबार पर भी फर्क पड़ा है।
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