फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Heavy on heart patients 'Attack', DM B Chandrakala said- Will not tolerate arbitrary

दिल के मरीजों पर भारी ‘अटैक’, डीएम बी चंद्रकला ने कहा- बर्दास्त नहीं की जाएगी मनमानी

Sat, 25 Feb 2017 06:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Sat, 25 Feb 2017 06:52 PM IST
विज्ञापन
Heavy on heart patients 'Attack', DM B Chandrakala said- Will not tolerate arbitrary
इसलिए जरूरी होता है स्टेंट

निजी अस्पताल संचालक दिल के मरीजों को ‘अटैक’ दे रहे हैं। सरकार ने स्टेंट की कीमतों में भारी कटौती की है, लेकिन अस्पताल संचालक पहले जैसी वसूली कर रहे हैं। सरकार की सख्ती के बाद बिल में स्टेंट की कीमत तो सही दिखाई जा रही है, लेकिन अन्य मदों में फीस बढ़ा दी है। इससे मरीजों को कोई रियायत नहीं मिल रही है। यह गोरखधंधा शहर के एक नहीं, अधिकांश सभी अस्पतालों में चल रहा है।

विज्ञापन


केंद्र सरकार के निर्देश के तहत नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीपीए) ने दिल के मरीजों को स्टेंट डलवाने के लिए भारी छूट दी है। इस आदेश को आए मात्र एक सप्ताह ही हुआ है और अस्पताल संचालकों ने तोड़ निकाल लिया। उन्होंने स्टेंट की कीमतें जरूर घटा दी हैं, लेकिन मरीज को लगाने का खर्च बढ़ा दिया है। इस वजह से स्टेंट लगाने का खर्च आज भी लगभग पहले जैसा है। अस्पतालों ने प्रोसीजर शुल्क, चिकित्सक की फीस से लेकर ओटी तक का चार्ज बढ़ा दिया है। वहीं केंद्र सरकार के आदेश के बाद मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने बृहस्पतिवार को सख्त निर्देश दिये थे। उन्होंने कहा था कि कि अगर ज्यादा कीमतें वसूली जाती हैं तो चिकित्सक और अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी को निगरानी करने का आदेश दिया था। साथ ही खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग को चिकित्सकों व अस्पतालों की सूची मुहैया कराने के निर्देश भी दिए थे। 
विज्ञापन


इसलिए जरूरी होता है स्टेंट
हार्टअटैक के समय या शिकायत होने पर मरीज की प्राइमरी एंजियोप्लॉस्टी में स्टेंट का प्रयोग किया जाता है। दरअसल एंजियोग्राफी में देखा जाता है कि धमनी रुकावट कहां पर है, जहां पर रुकावट होती है वहां पर स्टेंट लगाया  जाता है। इसके लिए पहले धमनी के उस भाग तक कैथेटर से बैलून पहुंचाया जाता है, इसके बाद कैथेटर को निकाल लिया जाता है। उसके बाद फिर से कैथेटर के साथ स्टेंट बैलून तक पहुंचाते हैं। इससे बैलून अपने स्थान पर फूल जाता  है और धमनी के अंदर रुकावट दूर हो जाती है। बायोरेजॉर्बेबल स्टेंट आधुनिक स्टेंट माना गया है, जो करीब छह महीने में घुल भी जाता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे निकाला नियम का तोड़

पहले का स्टेंट पैकेज 1.50 लाख 
स्टेंट कीमत - `80 हजार से एक लाख 
डॉक्टर फीस              30 हजार 
ओटी व आईसीयू (तीन दिन) 
`20 हजार 

वर्तमान पैकेज 
1.50 लाख
स्टेंट की कीमत `29600 
चिकित्सक फीस           40 से 50 हजार 
ओटी चार्ज : 20 हजार 
आईसीयू (तीन दिन) `30 हजार (10 हजार प्रति दिन) 
दवाई - `10 से 20 हजार 

सरकार ने निर्धारित की कीमतें

Heavy on heart patients 'Attack', DM B Chandrakala said- Will not tolerate arbitrary
डीएम बी चंद्रकला

केस -1 
गढ़ रोड स्थित अस्पताल में वर्तमान में स्टेंट लगाने का खर्च 1.10 से 1.30 लाख है। यह खर्च कीमतें कम होने से पहले करीब 1.40 लाख रुपये था।  
केस -2
लालकुर्ती स्थित अस्पताल में बृहस्पतिवार को एक मरीज को डिस्चार्ज किया गया। बिल डेढ़ लाख का बनाया गया। छूट होने के बाद 1.35 लाख रुपये जमा कराए गए। 
केस -3 
साकेत में संचालित अस्पताल में स्टेंट का पैकेज डेढ़ लाख रुपये के आसपास ही है। अस्पताल की तरफ से किसी तरह की कीमतें कम नहीं की गई हैं।

सरकार ने निर्धारित की कीमतें
सामान्य तौर पर स्टेंट हार्ट ब्लॉकेज खोलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। केंद्र सरकार ने मेटल स्टेंट की कीमतें 7260 रुपये, बायोरेजॉर्बेबल स्टेंट और ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट की कीमत 29600 रुपये फिक्स की है। अभी तक ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट 24 हजार से 1.5 लाख और बायो स्टेंट 1.70 से 2.90 लाख रुपये के बीच बेचा जाता था। मेटल स्टेंट की कीमत 50 से 80 हजार रुपये थी। इन्हें डालने से अस्पतालों को खूब कमाई होती है।  

20 से 50 हजार में डाल जाएगा स्टेंट
अगर सरकारी आदेश के मुताबिक स्टेंट की कीमतें लागू हो जाएं तो मात्र 20 से 50 हजार में यह डल जाएगा। मेटल स्टेंट का खर्च मात्र 20 हजार होगा। 

अगर कीमतें नहीं घटाई हैं तो गंभीर मामला है। गरीबों के लिए सुविधा दी गई है। इसमें मनमानी बर्दास्त नहीं की जाएगी, चिकित्सक व अस्पतालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। - बी. चंद्रकला, डीएम

सरकार का उद्देश्य सस्ती दर पर हार्ट से जुड़ी बीमारी का इलाज उपलब्ध कराने का है। अगर जनता को सस्ता इलाज नहीं मिल रहा तो यह गलत है।  - डॉ. वीरोत्तम तोमर, अध्यक्ष आईएमए

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed