फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Heartfelt poetry adds romanticism to the cold air

Meerut News: दिलकश शायरी ने सर्द हवा में घोली रूमानियत

Thu, 21 Nov 2024 03:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 21 Nov 2024 03:09 AM IST
विज्ञापन
Heartfelt poetry adds romanticism to the cold air
- बुधवार शाम को आईएमए हॉल में हुआ मुशायरा व कवि सम्मलेन का आयोजन
विज्ञापन

फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ।
है साक्षी काशी का हर एक घाट अभी तक,
होता था भजन आपका शहनाई हमारी।
आज दुनियाभर में धर्म और भाषा के नाम पर तमाम बहस सुनने को मिल जाती हैं। इस माहौल में मेरठ की धरती से एक मुस्लिम शायर अजहर इकबाल जब इस तरह की शायरी पढ़ता है तो यकीन होता है कि देश में गंगा-जमुनी तहजीब की बखूबी नुमाइंदगी हो रही है। दरअसल, बुधवार को तीन भाषाओं हिंदी, उर्दू और पंजाबी की जुगलबंदी से शहर की शाम गुल ओ गुलजार हो गई। हर्फकार फाउंडेशन और पंजाबी अकादमी उत्तर प्रदेश की जानिब से सजाई गई इस नायाब महफिल में देश के नामचीन कवियों और शायरों ने काव्य के नवरस की बौछार कर श्रोताओं को सराबोर कर दिया।
आइएमए हॉल में आयोजित कविसम्मेलन और मुशायरे का संयोजन अजहर इकबाल ने किया। अजहर इकबार साहित्य के संसार में अपनी विशिष्ठ शैली और काव्यशिल्प के लिए जाने जाते हैं। बुधवार को भी उनकी शायरी से रसिक श्रोताओं के दिलों पर नशा सा तारी हो गया। शायरी से इतर अपने संबोधन में अजहर इकबाल ने कहा कि भाषाएं एक दूसरे को करीब लाने का काम करती हैं। एक दूसरे की सभ्यताओं तहजीब को जानने का मौका देती हैं। इस प्रकार के आयोजनों से पंजाबी, उर्दू, हिंदी के शायर एक मंच से मुल्क के मुख्तलिफ रंगों की खुशबू का अहसास कराते हैं।
विज्ञापन

महफिल परवान चढ़ी तो हिमांशी बाबरा ने पढ़ा कि नहीं मेरी वापसी का कोई ऐतबार कहना, वो करे न जिंदगी भर मेरा इंतजार कहना।
इल्मा हाशमी ने अपने जज्बात का इजहार कुछ यूं किया कि खुशी थी के उसका प्यार मिला, और ये गम के एक बार मिला, उसके आने का रास्ता देखा। मेरी आंखों को इंतजार मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

नंदकिशोर आनंद ने कहा कि चल अपनी बे-वफाई को तू मान तो गया, सर से तेरी वफाओं का एहसान तो गया।
अंजलि बांग्ला ने पढ़ा कि होंगी अगर जंजीरें तो हम भागना चाहें शायद, फिर ये बंधन ढूंढा उसने पायल लाकर दी है।
अजम शाकरी ने कहा कि सुबह तक दर्द की शाख पर एक दिया झिलमिलाता रहा, आंख मंज़र बताती रही और दिल मुस्कुराता रहा।
इसके बाद मुकेश आलम ने अपनी रचना सुनाई। कार्यक्रम में अकादमी के निदेशक राजबहादुर ने कहा कि साहित्य दिलों को जोड़ता है। पीआरओ अरविंद नारायण मिश्र ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी का धन्यवाद किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नबील अनवर व विशिष्ट अतिथि डॉक्टर यूनुस अहमद रहे। यहां कोऑर्डिनेटर डॉ. ताबिश फरीद , सरदार सरबजीत सिंह कपूर आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed