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वेंटिलेटर पर हैल्थ सिस्टम: आईसीयू में लगते हैं टीके, एमआरआई मशीन नहीं...बना रहे ट्रॉमा सेंटर

Mon, 05 Sep 2022 11:11 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 05 Sep 2022 11:11 AM IST
सार

सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से मेरठ बेहद संवदेनशनील है। आए दिन एनएच-58, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और शहर के अन्य हिस्सों में हादसे होते हैं। बेहतर इलाज के लिए प्रतीक्षित जिला चिकित्सालय में 3 साल में भी नहीं आई 7 करोड़ की एमआरआई मशीन। 2001 में पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय में ट्रॉमा सेंटर  मंजूर हुआ था।

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Health system on ventilator: Vaccination in ICU, MRI machines are not... making trauma centers
मेरठ में जिला अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दावे भले ही जो हों पर मेरठ जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं वेंटिलेटर पर हैं। पीएल शर्मा जिला अस्पताल में अलग बिल्डिंग बनने के तीन साल बाद भी सात करोड़ रुपये की एमआरआई मशीन नहीं आ पाई है। यहां बनी 12 बेड की इंटेसिव केयर यूनिट में भी मरीजों को भर्ती करने की  जगह टीके लगाए जा रहे हैं। सुविधा नहीं है। पहले से मौजूद सुविधाओं का मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा। अब सवाल खड़े होने लगे हैं कि करीब सवा करोड़ रुपये की लागत से बन रहे ट्रॉमा सेंटर का भी हश्र ऐसा ही न हो जाए।
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सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से मेरठ बेहद संवदेनशनील है। आए दिन एनएच-58, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और शहर के अन्य हिस्सों में हादसे होते हैं। इसी को देखते हुए 2021 में पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय में ट्रॉमा सेंटर मंजूर हुआ। जनवरी 2022 से इसका कार्य भी चल रहा है। दावा है कि यहां वेंटिलेटर, ऑक्सीजन, बाईपेप समेत अन्य आधुनिक मशीन और मॉड्यूलर ओटी आदि इलाज व ऑपरेशन की सुविधाएं होंगी।
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वहीं जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट चालू न हो पाने की वजह  से मरीजों को मेगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के लिए या तो मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है या फिर निजी लैब में महंगी जांच करानी पड़ती है। इस यूनिट में न स्टाफ है और न ही मशीन। गंभीर मरीजों के लिए पांच वर्ष पूर्व बनी 12 बेड की इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में टीकाकरण हो रहा है।
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ओपीडी में आते हैं 5 लाख मरीज, डॉक्टरों के 25 पद खाली
जिला अस्पताल में हर साल ओपीडी में करीब 5 लाख मरीज आते हैं। यहां पहले से ही चिकित्सकों के 25 खाली पड़े हैं। आईसीयू और एमआरआई यूनिट में अलग से चिकित्सकों समेत 15 लोगों के स्टाफ की तैनाती होनी चाहिए। ऐसे में मरीजों को यहां पूरा इलाज नहीं मिल पाता।

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70 बेड बढ़ाने की तैयारी
जिला अस्पताल के सभी 250 बेड फुल चल रहे हैं। ऐसे में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके नंदा ने 70 बेड और बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। बेड बढ़ाने की तैयारी चल रही है। हालांकि स्टाफ की कमी यहां भी आड़े आएगी।

दावा : दिसंबर तक चालू होगा  
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के भवन निर्माण के लिए लगभग सवा करोड़ की राशि जिला अस्पताल को मिल गई है। दिसंबर तक कार्य पूरा हो जाएगा। इसके लिए डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ  भी अलग से आएगा।

चल रहा है पत्राचार
कोशिश की जा रही है कि आईसीयू और एमआरआई यूनिट चालू करा दी जाए। इसके लिए शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। स्टाफ  और मशीन मिलने पर ही इसे शुरू किया जा सकेगा। ट्रॉमा सेंटर अभी बन रहा है, इसके लिए भी अलग से स्टाफ आना है। - डॉ. कौशलेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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