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फर्श से अर्श पर पहुंची मेरठ की स्वास्थ्य सेवाएं: हर बीमारी के इलाज के लिए लगानी पड़ती थी दिल्ली की दौड़, विदेशों तक मची है चिकित्सकों की धूम 

Sun, 24 Apr 2022 01:02 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 24 Apr 2022 01:02 PM IST
सार

क्रांति धरा में 2022 तक आते आते बहुत कुछ बदला है। मेरठ अब मेडिकल हब बन गया है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल हैं। एक से बढ़कर एक चिकित्सक हैं।

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विस्तार

मेरठ जिले की स्वास्थ्य सेवाएं फर्श से अर्श पर पहुंच गईं हैं। पहले हर बड़ी बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती थी, मगर अब ऐसा नहीं है। इतना ही नहीं, मेरठ के चिकित्सकों की धूम विदेशों तक मची है। 

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क्रांति धरा में 2022 तक आते आते बहुत कुछ बदला है। मेरठ अब मेडिकल हब बन गया है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल हैं। एक से बढ़कर एक चिकित्सक हैं।  ई-हॉस्पिटल से सरकारी अस्पतालों में भी घर बैठे अपॉइंटमेंट ले सकते हैं। घर से फोन कर एंबुलेंस बुला सकते हैं। देशभर से मरीज यहां इलाज कराने आते हैं। दिल्ली तो दिल्ली, चिकित्सकों और चिकित्सालयों में ऐसी तकनीकें हैं जो विश्वस्तर पर कदमताल मिला रही हैं। 
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एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले चिकित्सक विदेशों में भी सफल प्रैक्टिस कर रहे हैं, ऐसे चिकित्सकों की संख्या काफी है। डॉ. रिम्मी 1988 बैच की हैं। लंदन में प्रैक्टिस करती हैं। लंदन में ही 1988 बैच के डॉ. मनोज श्रीवास्तव चिकित्सा करते हैं। 1989 बैच के चिकित्सक डॉ. मोहित सिंह नेगी अमेरिका में चिकित्सा करते हैं। 
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1990 बैच की चिकित्सक डॉ. दीप्ति मलिक अमेरिका के टाउन पेंसिल्वेनिया में हैं। वह इंफेक्शन डिसीज एक्सपर्ट हैं। इसी बैच की दुबई में गायनी की चिकित्सक हैं डॉ. अंशु जैन। 1991 बैच की डॉ. नीतू मोहन अमेरिका में मेडिसिन इंफार्मेटिक हैं। इनका काम मरीज और बीमारी से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर लाना है। वह टेली मेडिसिन को बढ़ावा दे रही हैं।

1990 बैच के ही डॉ. वी विवेक अमेरिका में प्राइमरी केयर चिकित्सक हैं। 1992 बैच के सिंगापुर में डॉ. राशि अग्रवाल हैं। कोलंबिया में डॉ. मेधा गर्ग रेडियोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। यूएसए में डॉ. रुचि श्रेष्ठा यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट पीटर्स बर्ग में रेडियोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। डॉ. रेसु बिक्रम इसी यूनिवर्सिटी में चीफ इनोवेशन ऑफिसर हैं। इनके अलावा अमेरिका में डॉ. शक्ति श्रीवास्तव, डॉ. सोनिया और डॉ. श्वेता आदि हैं। 

- 1200 से ज्यादा चिकित्सक आईएमए में पंजीकृत हैं।
- पंजीकृत अस्पताल-नर्सिंग होम की संख्या 243 है।  
- 12 सीएचसी, 31 पीएचसी और 26 अर्बन हेल्थ सेंटर हैं। 


टॉर्च की रोशनी में करने पड़ते थे ऑपरेशन 
1978 से आईएमए का सदस्य हूं। इंग्लैंड से मेरठ आया था। 34 साल पहले संसाधन बेहद कम थे। कई बार लाइट जाने पर टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन करने पड़ते थे। गंभीर मरीज को देखने घर पर जाया करते थे। अब चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम कायम हो रहे हैं। - वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. बीपी सिंघल

एलएलआरएम से 1977 में एमबीबीएस की थी। 1984 से आईएमए का सदस्य हूं। तब और अब में काफी फर्क आ गया है। तब न तो शुगर और हार्ट की इस तरह की इफेक्टिव दवाइयां थीं और न ही ऐसी तकनीकें और मशीनें। डायलिसिस भी मरीज की घर पर ही होती थी।  - डॉ एमके बंसल, वरिष्ठ फिजिशियन

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