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ज्यादा देर तक बैठे रहते हैं तो हो जाए सावधान, छोटी उम्र में ही बढ़ रहा बैड कोलेस्ट्रॉल, सामने आया चौंकाने वाला सच

Sat, 13 Mar 2021 04:09 PM IST
Dimple Sirohi शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 13 Mar 2021 04:09 PM IST
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health news Meerut: be careful, bad cholesterol rising at a young age
प्रतीकात्मक तस्वीर

बच्चों की सेहत पर बैड कोलेस्ट्रॉल का खतरा मंडराने लगा है। शिक्षण संस्थाओं में कराए जा रहे बच्चों, किशोरों और युवाओं के रुटीन हेल्थ चेकअप में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की बात सामने आई है। इस वजह से ह्दय, मधुमेह और रक्तचाप की बीमारियां बढ़ने का खतरा भी है।

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लॉकडाउन के बाद स्कूलों में हो रहे रुटीन चेकअप में यह समस्या तेजी से सामने आ रही है। बच्चों ने  दस महीने तक घर में रहकर आराम किया। अधिकतर समय शारीरिक व्यायाम और खेलकूद बंद रहा। यही नहीं जंक फूड और तैलीय खानपान बहुत अधिक बढ़ गया। लगभग हर घर में लॉकडाउन के दौरान पकवान बनाए गए।
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सेहतमंद खाने के बजाय लोगों ने स्वादिष्ट और गरिष्ठ भोजन पर ध्यान दिया। इसके चलते बच्चों, युवाओं में बैड कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ा है। अब जब स्कूल खुले हैं और बच्चों को रुटीन चेकअप हो रहा है तो उसमें ये समस्याएं सामने आ रही हैं। बच्चों में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर 250 तक पहुंच रहा है। जो चिंता का विषय बन रहा है।

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वरिष्ठ हृदय रोग विशेेषज्ञ डॉ. संजीव सक्सेना के अनुसार बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का प्रमुख कारण आलस्य, शारीरिक गतिविधियां कम होना और गरिष्ठ भोजन है। वहीं आनुवांशिक रूप से भी यह बढ़ता है। लेकिन आनुवांशिक बीमारियों में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के मामले कम हैं। बच्चों में लॉकडाउन के बाद बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा है। चूंकि अब रुटीन चेकअप और जांच कराई जाती है, जिससे परेशानी जल्दी पकड़ में आ रही है।

जंकफूड के अलावा लगातार बैठे रहने से भी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। तीन घंटे बैठकर ऑनलाइन क्लास, मीटिंग या वर्क करना एक सिगरेट पीने जितना घातक है। जो इंसान धूम्रपान नहीं करता लेकिन तीन घंटे लगातार बैठकर काम करता है तो वो भी धूम्रपान जैसे ही नुकसान का शिकार हो सकता है।

फौजियों के बच्चों में मोटापा नहीं
सुभारती विवि में कम्युनिटी मेडिसन के हेड डॉ. राहुल बंसल बताते हैं सरकारी स्कूल और केंद्रीय   विद्यालयों में पढ़ने वाले फौजियों के बच्चों में मोटापा, हाई बीपी कम मिला है, लेकिन पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में यह समस्या अधिक मिलती है। संपन्न परिवारों के बच्चे शारीरिक गतिविधि में भाग नहीं लेते हैं, इसलिए मोटापा व इससे होने वाली तमाम बीमारियां उनमें अधिक हैं। जिसमें दिल के रोग भी शामिल हैं।

दो तरह के होते हैं कोलेस्ट्रॉल
शरीर में दो प्रकार के कोलेस्ट्रॉल पाए जाते हैं। एक एचडीएल (हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानि गुड कोलेस्ट्रॉल) दूसरा एलडीएल ( लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानि बैड कोलेस्ट्रॉल) होता है। बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण मोटापा, रक्तचाप और दिल की बीमारियां हो सकती हैं।

किसी भी स्वस्थ इंसान में एलडीएल की मात्रा 130 से ज्यादा नहीं होना चाहिए। चिकित्सकों के अनुसार किसी व्यक्ति के परिवार में दिल या मधुमेह के मरीज हैं तो उसका एलडीएल 70 से 80 के बीच होना चाहिए। जबकि अन्य सामान्य इंसान का एलडीएल 100 से 130 के बीच रहना चाहिए।

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