{"_id":"697e7207cc4f9c1faf01c630","slug":"he-had-to-leave-his-studies-due-to-poverty-now-his-family-is-crying-for-justice-meerut-news-c-73-1-mtd1001-106195-2026-02-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: गरीबी के कारण छूटी थी पढ़ाई, अब न्याय के लिए बिलख रहा परिवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: गरीबी के कारण छूटी थी पढ़ाई, अब न्याय के लिए बिलख रहा परिवार
विज्ञापन
बहसूमा। हंगामा करने वाले परिजन को पुलिस समझाते हुए
दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद जहां एक ओर गांव में तनाव का माहौल है वहीं दूसरी ओर एक गरीब परिवार के सपनों के टूटने की दर्दनाक कहानी भी सामने आई है। छह भाई-बहनों में तीसरे नंबर की यह किशोरी पढ़-लिखकर घर का सहारा बनना चाहती थी लेकिन इस घटना ने उसकी जिंदगी ही छीन ली। अब किशोरी का परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।
मृतक किशोरी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण केवल कक्षा 7 तक ही पढ़ सकी थी। पिछले वर्ष उसने आठवीं में प्रवेश तो लिया था लेकिन घर के हालात ऐसे नहीं थे कि स्कूल की फीस भरी जा सके। ऐसे में परिजनों ने उसकी पढ़ाई छुड़वा दी और वह घर के कामकाज में हाथ बंटाने लगी। बेटी को याद कर उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बस एक ही मांग कर रही हैं कि मेरी बेटी के हत्यारों को फांसी की सजा मिले।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल: एक युवक का काम नहीं
पीड़ित परिवार और रिश्तेदारों के बीच पुलिस की जांच को लेकर भारी आक्रोश देखा गया। परिजनों का सीधा आरोप है कि इतनी जघन्य वारदात को कोई एक व्यक्ति अंजाम नहीं दे सकता। उनका कहना है कि पुलिस अन्य आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। मृतका के भाई ने भावुक होते हुए बताया कि शुक्रवार रात से ही पुलिस उन पर शव का अंतिम संस्कार करने के लिए लगातार दबाव बना रही थी, जिससे वे मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे।
विज्ञापन
40 मिनट तक चली नोकझोंक
शनिवार को जब गांव की गलियों में पुलिस के कड़े पहरे के बीच अर्थी निकली, तो माहौल गमगीन हो गया। लेकिन गांव की सीमा से निकलते ही जंगल के रास्तों से पहुंचे रिश्तेदारों ने अर्थी को नीचे रख दिया और हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारी लगातार लोगों को समझाने की कोशिश करते रहे लेकिन भीड़ मामले में सामूहिक दुष्कर्म की धाराएं जोड़ने, गांव से बाहर रोके गए समाज के लोगों और रिश्तेदारों को आने देने और पीड़ित परिवार को उचित न्याय और सुरक्षा देने की मांग पर अड़े रहे।
आश्वासन पर माने परिजन
करीब 40 मिनट तक चली खींचतान और पुलिस के साथ हुई नोकझोंक के बाद एसडीएम संतोष कुमार ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने परिजनों को महारानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने और मुख्य आरोपी अनुज सैनी को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने का ठोस आश्वासन दिया। इस भरोसे के बाद पुलिस पीड़िता के भाई को अंतिम संस्कार के लिए सहमत करने में सफल रही। हालांकि जब शव का दाह संस्कार हो रहा था तब भी कुछ दूरी पर ग्रामीण और रिश्तेदार अपना विरोध दर्ज कराते नजर आए।
अभी भी छावनी बना है गांव
अंतिम संस्कार संपन्न होने के बावजूद एहतियात के तौर पर गांव में भारी पुलिस बल तैनात है। हालांकि अब लोगों का आवागमन धीरे-धीरे शुरू कर दिया गया है लेकिन पुलिस हर आने-जाने वाले से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि शांति व्यवस्था भंग न हो सके।
विज्ञापन
मृतक किशोरी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण केवल कक्षा 7 तक ही पढ़ सकी थी। पिछले वर्ष उसने आठवीं में प्रवेश तो लिया था लेकिन घर के हालात ऐसे नहीं थे कि स्कूल की फीस भरी जा सके। ऐसे में परिजनों ने उसकी पढ़ाई छुड़वा दी और वह घर के कामकाज में हाथ बंटाने लगी। बेटी को याद कर उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बस एक ही मांग कर रही हैं कि मेरी बेटी के हत्यारों को फांसी की सजा मिले।
विज्ञापन
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल: एक युवक का काम नहीं
पीड़ित परिवार और रिश्तेदारों के बीच पुलिस की जांच को लेकर भारी आक्रोश देखा गया। परिजनों का सीधा आरोप है कि इतनी जघन्य वारदात को कोई एक व्यक्ति अंजाम नहीं दे सकता। उनका कहना है कि पुलिस अन्य आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। मृतका के भाई ने भावुक होते हुए बताया कि शुक्रवार रात से ही पुलिस उन पर शव का अंतिम संस्कार करने के लिए लगातार दबाव बना रही थी, जिससे वे मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे।
विज्ञापन
40 मिनट तक चली नोकझोंक
शनिवार को जब गांव की गलियों में पुलिस के कड़े पहरे के बीच अर्थी निकली, तो माहौल गमगीन हो गया। लेकिन गांव की सीमा से निकलते ही जंगल के रास्तों से पहुंचे रिश्तेदारों ने अर्थी को नीचे रख दिया और हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारी लगातार लोगों को समझाने की कोशिश करते रहे लेकिन भीड़ मामले में सामूहिक दुष्कर्म की धाराएं जोड़ने, गांव से बाहर रोके गए समाज के लोगों और रिश्तेदारों को आने देने और पीड़ित परिवार को उचित न्याय और सुरक्षा देने की मांग पर अड़े रहे।
आश्वासन पर माने परिजन
करीब 40 मिनट तक चली खींचतान और पुलिस के साथ हुई नोकझोंक के बाद एसडीएम संतोष कुमार ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने परिजनों को महारानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने और मुख्य आरोपी अनुज सैनी को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने का ठोस आश्वासन दिया। इस भरोसे के बाद पुलिस पीड़िता के भाई को अंतिम संस्कार के लिए सहमत करने में सफल रही। हालांकि जब शव का दाह संस्कार हो रहा था तब भी कुछ दूरी पर ग्रामीण और रिश्तेदार अपना विरोध दर्ज कराते नजर आए।
अभी भी छावनी बना है गांव
अंतिम संस्कार संपन्न होने के बावजूद एहतियात के तौर पर गांव में भारी पुलिस बल तैनात है। हालांकि अब लोगों का आवागमन धीरे-धीरे शुरू कर दिया गया है लेकिन पुलिस हर आने-जाने वाले से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि शांति व्यवस्था भंग न हो सके।