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हस्तिनापुर सेंक्चुरी में दहाड़ रहे सात तेंदुए
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sat, 27 Aug 2016 01:46 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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वाइल्ड लाइफ और वन विभाग के लिए अच्छी खबर है कि तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है। जंगल में आसानी से मिल रहे तेंदुओं के फुट प्रिंट बता रहे हैं कि शर्मीले स्वभाव का यह जानवर अपनी संख्या में बढ़ोतरी कर रहा है। घनघोर जंगल से लेकर आबादी के आसपास दहाड़ रहा है। दिक्कत तब होती है जब शिकार की तलाश या भटकाव में यह शहर में दाखिल हो जाता है। करीब तीन महीने पहले शहर में आए तेंदुए से जो दहशत फैली, उसे लेकर वन विभाग होमवर्क कर रहा है।
हाल में वन विभाग ने सेंक्चुरी के हस्तिनापुर क्षेत्र में तेंदुओं की गिनती कराई। वन विभाग की टीम ने सात तरह के अलग-अलग फुट प्रिंट कलेक्ट किए। यह गिनती सीमित क्षेत्र में थी। इसलिए संख्या इससे अधिक होने का अनुमान है। फुट प्रिंट के साइज से तेंदुओं के बारे में पता चल रहा है। कुछ बड़े हैं तो कुछ छोटे भी हैं। इनमें नर और मादा दोनों हैं। लिहाजा ब्रीडिंग भी हो रही है।
वन संरक्षक मेरठ मंडल सुशील अवस्थी का कहना है कि हस्तिनापुर के जंगल में सात तेंदुए होने की पुष्टि हुई है। तेंदुआ खुद के बचाव में ही हमलावर होता है। यही वजह है कि वह आमतौर पर खतरनाक जानवर नहीं है। रात में अपना शिकार करता है और ओझल हो जाता है। वेस्ट यूपी में तेंदुआ घने जंगल में ही नहीं, बल्कि खेतों में भी पाया जाता है। उसकी मौजूदगी बताती है कि आबादी के आसपास के माहौल को तेंदुए ने एडोप्ट कर लिया है। पिछले दो साल में शहर में तेंदुआ आने के कई केस सामने आए हैं। लोगों का डर दूर करने के लिए वन विभाग जागरूकता अभियान चलाएगा।
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पकड़ा तो बन गया सम्राट
करीब तीन महीने पहले आर्मी हास्पिटल में तेंदुए घुस गया था। उसे पकड़ने में दो दिन लगे। कई लोगों को तेंदुए ने घायल कर दिया था। तेंदुए को पकड़कर कानपुर चिड़ियाघर भेज दिया। उसका पंजा घायल था। अब वह पूरी तरह ठीक हो चुका है। इंसानों के संपर्क में आने की वजह से उसे हमेशा चिड़ियाघर में रखने का फैसला किया गया है। उसका नाम सम्राट रखा गया।
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हाल में वन विभाग ने सेंक्चुरी के हस्तिनापुर क्षेत्र में तेंदुओं की गिनती कराई। वन विभाग की टीम ने सात तरह के अलग-अलग फुट प्रिंट कलेक्ट किए। यह गिनती सीमित क्षेत्र में थी। इसलिए संख्या इससे अधिक होने का अनुमान है। फुट प्रिंट के साइज से तेंदुओं के बारे में पता चल रहा है। कुछ बड़े हैं तो कुछ छोटे भी हैं। इनमें नर और मादा दोनों हैं। लिहाजा ब्रीडिंग भी हो रही है।
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वन संरक्षक मेरठ मंडल सुशील अवस्थी का कहना है कि हस्तिनापुर के जंगल में सात तेंदुए होने की पुष्टि हुई है। तेंदुआ खुद के बचाव में ही हमलावर होता है। यही वजह है कि वह आमतौर पर खतरनाक जानवर नहीं है। रात में अपना शिकार करता है और ओझल हो जाता है। वेस्ट यूपी में तेंदुआ घने जंगल में ही नहीं, बल्कि खेतों में भी पाया जाता है। उसकी मौजूदगी बताती है कि आबादी के आसपास के माहौल को तेंदुए ने एडोप्ट कर लिया है। पिछले दो साल में शहर में तेंदुआ आने के कई केस सामने आए हैं। लोगों का डर दूर करने के लिए वन विभाग जागरूकता अभियान चलाएगा।
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पकड़ा तो बन गया सम्राट
करीब तीन महीने पहले आर्मी हास्पिटल में तेंदुए घुस गया था। उसे पकड़ने में दो दिन लगे। कई लोगों को तेंदुए ने घायल कर दिया था। तेंदुए को पकड़कर कानपुर चिड़ियाघर भेज दिया। उसका पंजा घायल था। अब वह पूरी तरह ठीक हो चुका है। इंसानों के संपर्क में आने की वजह से उसे हमेशा चिड़ियाघर में रखने का फैसला किया गया है। उसका नाम सम्राट रखा गया।