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हाशिमपुरा कांड: मुआवजे की मांग तेज, अब सुप्रीम कोर्ट में आखिरी सांस तक लड़ने का दावा

Fri, 02 Nov 2018 11:25 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 02 Nov 2018 11:25 AM IST
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Hashimpura massacre Victims family will face cases for compensation in Supreme Court
हाशिमपुरा कांड - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में हाशिमपुरा कांड के पीड़ित अब मुआवजे के लिए लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने अपने अधिवक्ताओं से बातचीत की है। साथ ही इस बारे में भी वार्ता की है कि अगर आरोपी पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाता है तो वहां वह किस तरह से पैरवी करेंगे। इस बाबत आगे की तैयारियों के मद्देनजर इस केस से जुड़े अधिवक्ता शुक्रवार या शनिवार को मेरठ आ सकते हैं।

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हाशिमपुरा कांड में मारे गए कमरुद्दीन के छोटे भाई रियाजुद्दीन ने बताया कि इस केस में विरेंदा ग्रोवर, रिबेका जोन और हर्ष वोहरा उनके केस की पैरवी कर रहे हैं। इन अधिवक्ताओं ने इस केस का कोई भी चार्ज उनसे नहीं लिया है। गवाही के लिए जाने में उनका खर्चा होता है। केस की कोई फीस नहीं है। उन्होंने बताया कि उनकी मुख्य अधिवक्ता विरेंदा ग्रोवर से फोन पर बात हुई है, वह एक-दो दिन में मेरठ आ सकती हैं। उनसे कोर्ट की टिप्पणी के बाद आगे मुआवजे के संबंध में और अगर दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाता है तो वह किस तरह पैरवी करेंगे, इस संबंध में बातचीत कर निर्णय लिया जाएगा। वहीं, इस्लामुद्दीन का कहना है कि वह आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ेंगे। उनके भाई की हत्या हुई थी। कुसूरवार पीएसी वालों को सजा दिलाकर रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लडे़ंगे।
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जिनके इशारे पर हुई हत्या, उन्हें भी हो सजा 
हाशिमपुरा कांड में दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आने के दूसरे दिन भी हाशिमपुरा में जगह-जगह नुक्कड़ पर या घरों में यही चर्चा होती रही। वहां के लोग इसे बारे में बात करते नजर आए। उनका कहना था कि जिन्हें कोर्ट ने सजा दी है, ये तो वह लोग हैं जिन्होंने गोलियां मारी थीं। लेकिन इस बर्बरता पूर्वक घटना के पीछे किसका हाथ था, उन लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, उनका भी पता लगाया जाना चाहिए। वह क्यों बच गए हैं। हालांकि बाकी सामान्य दिन की तरह ही वहां के लोगों का दिन गुजरा।
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नहीं आया कोई बड़ा नेता
हाशिमपुरा के लोगों को मलाल है कि फैसला आने के बाद भी बयानों में उनका दम भरने वाले राजनीतिक पार्टी के लोग हाशिमपुरा नहीं आए, जबकि उन्हें उम्मीद थी कि बहुत लोग आएंगे। सिर्फ शहर विधायक रफीक अंसारी और इक्का-दुक्का सपा नेता ही बुधवार को आए थे।

हाशिमपुरा के पीड़ित परिवार का कहना है कि वह आरोपियों को जेल जाते हुए देखना चाहते थे, मगर वह उन्हें जेल जाते नहीं देख सके। पीड़ित लोग रोजमर्रा की तरह अपने अपने कार्य किए। घरों में महिलाएं जरूरत फोटो देखकर गमजदा होती रहीं।

लगा रखा है शादी वाला फोटो
कमरुद्दीन के परिजनों ने उनका वह फोटो बड़ा कराकर बरामदे में अभी भी लगाया हुआ है, जिसमें वह दूल्हा बने थे। दरअसल, शादी के कुछ महीने बाद ही उनकी मौत हो गई थी। उनकी पत्नी भी मायके चली गई थी।

बच्चों को भी पता है हाशिमपुरा कांड
हाशिमपुरा के बच्चे हों या किशोर, जो उस वक्त नहीं थे, वह भी इस घटना के बारे में पूरी जानकारी रखते हैं। उन्हें पता है कि उनके परिजनों के साथ किस तरह का वाकया पेश आया था। मरने वाले कौन थे और किस तरह घटना हुई थी। उन्हें उनके परिजनों से यह बातें पता चली हैं।

हथियारों के नाम पर मिली थी आरी
हाशिमपुरा के लोग बताते हैं कि जब पुलिस और पीएसीवाले यहां सर्च करने आए थे तो उन्होंने कहा था कि यहां असलहे हैं, लेकिन उन्हें यहां से सिर्फ लकड़ी काटने वाली आरी, कुल्हाड़ी और घरों में सामान्य तौर पर रखे जाने वाली छुरियां ही मिली थीं।

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