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हाशिमपुरा कांड में सरकारों की उदासीनता से नहीं मिला न्याय

Mon, 23 May 2016 02:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Mon, 23 May 2016 02:49 AM IST
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हाशिमपुर में आयोजित सभा में विचार रखते वक्ता। - फोटो : अमर उजाला
हाशिमपुरा इंसाफ कमेटी एवं क्षेत्रवासियों की ओर से हापुड़ रोड पर जलसा हुआ। इसमें 22 मई 1987 को हाशिमपुरा कांड में मारे गए 42 लोगों को खिराजे अकीदत पेश की गई। वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इस कांड के पीड़ितों को अभी तक इंसाफ नहीं मिला है।
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इससे मुस्लिम समुदाय में रोष है। जलसे से पहले कुरानख्वानी की गई। आगाज कुरान की तिलावत से किया गया। शहर काजी जैनुस साजिद्दीन की अध्यक्षता में जलसा हुआ। क्षेत्र के पूर्व पार्षद हाजी मो. इकबाल अंसारी ने कहा कि इस कांड के बाद से अभी तक आई सरकारों ने पीड़ितों को न्याय दिलाने के प्रति उदासीन रवैया अपनाया है।
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उन्होंने कहा कि जब तक मुसलमान शिक्षित नहीं होगा तब तक उसे उसका हक नहीं मिलेगा। शिक्षा से ही हर समस्या का समाधान संभव है। शहरकाजी ने भी कहा कि खुशहाल और तरक्की के लिए शिक्षा जरूरी है। जलसे में हाशिमपुरा कांड में मारे गए लोगों को खिराजे अकीदत पेश की गई। वक्ताओं ने कहा कि पीड़ितों को एक दिन इंसाफ जरूर मिलेगा। सपा नेता हाजी रफीक अंसारी ने कहा कि सपा हमेशा मुसलमानों के हकों के लिए गंभीर रही है।
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संचालन करते हुए मौलाना मकबूल ने बताया कि इस मामले की अगली तारीख दिल्ली हाईकोर्ट में 4 अगस्त को है। उन्होंने सरकार से ज्ञान प्रकाश की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और इस मुकदमे के संबंध में हाईकोर्ट में फाइल करने की मांग की। 

स्थानीय निवासी जुल्फिकार नासिर ने लोगाें से अपील की कि वह पीड़ितों को न्याय दिलाने में साथ दें। इसके अलावा लोगों से शब-ए-बरआत के मौके पर आतिशबाजी और स्टंटबाजी रोकने की भी मांग की। इस दौरान सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी, ताजउद्दीन, अशरफ, मुफ्ती मो. तसव्वुर, आसिफ, जमील अहमद, मौ. आरिफ आदि मौजूद रहे।

न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई: जुल्फिकार   
हाशिमपुरा कांड को 29 साल हो चुके हैं। लेकिन इसके जख्म आज भी पीड़ितों के जहन में ताजा हैं। इस कांड के चश्मदीद रहे जुल्फिकार का कहना है कि उनकी न्याय पाने की लड़ाई जारी है, लेकिन सरकार आरोपियों को बचाना चाहती है। चश्मदीद जुल्फिकार को हाशिमपुरा कांड में गोली लगी थी, लेकिन वह बच गए थे।

यह बात अलग है कि लंबी अदालती कार्यवाही के बाद गत वर्ष आए निर्णय में सभी आरोपियों को निर्दोष करार देकर बरी कर दिया गया था। लेकिन मुस्लिम समाज में इस फैसले के विरोध में नजर आये रोष के बाद प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की है। 


जुल्फिकार ने बताया कि सरकार ने भले ही रिट दायर करा दी हो, लेकिन मंशा अभी भी आरोपियों को बचाने की है। क्योंकि सरकार का कहना है कि इस कांड से संबंधित सभी दस्तावेज खत्म हो गए हैं। जबकि यह नियम है कि कोई भी वाद जब तक चलता है, उसके कागजात संभालकर रखे जाते हैं। जुल्फिकार ने कहा कि हमारे साथ न्याय नहीं हुआ है। आज भी इस कांड के पीड़ित अपनों की याद में आंसू बहाते हैं। इसलिए जब तक न्याय नहीं मिलेगा, मैँ शांत नहीं बैठूंगा। 
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