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महान कवि हरिवंशराय बच्चन के काव्य संग्रहों के चित्र बनाने वाले हरिपाल त्यागी चिरनिद्रा में हुए लीन
Thu, 02 May 2019 11:35 AM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,
Published by: Dimple Sirohi
Updated Thu, 02 May 2019 11:35 AM IST
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स्वर्गीय हरिपाल त्यागी साहित्यकार द्वारा बनाए गए चित्र
- फोटो : फाइल
महान कवि स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन के काव्य संग्रहों के चित्र बनाने वाले देश के प्रसिद्ध साहित्यकार चित्रकार व कार्टूनिस्ट जिले के रहने वाले हरिपाल त्यागी का 85 साल की आयु में सादतपुर दिल्ली में निधन हो गया। वह काफी समय से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे। हरिपाल त्यागी अपनी चित्रकला से सभी को अपने से जोड़ते थे। वह कहते थे कि शायद उन्होंने पहली बार अपनी मां के गर्भ में उंगलियों से चित्रकारी की होगी। उनके निधन पर जिले के चित्रकारों व साहित्यकारों ने शोक जताया है।
स्वर्गीय हरिपाल त्यागी साहित्यकार द्वारा बनाए गए चित्र
- फोटो : फाइल
उनके बनाए चित्र व कविताएं अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते थे। उन्होंने देश के अनेक नगरों, महानगरों में अपनी चित्रकला प्रदर्शनी लगाई। सुजन सखा हरिपाल, आधारशिला त्रैमासिक पत्रिकाद्ध का विशेषांक प्रकाशित किया।
उनकी प्रकाशित पुस्तकें आदमी से आदमी तक, शब्दचित्र एवं रेखाचित्र काफी प्रसिद्ध हुए। 'ननकू का पाजामा' लघु उपन्यास काफी प्रसिद्ध हुआ। साहित्य एवं कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए हरिपाल त्यागी को कई बार पुरस्कृत किया गया। प्रसिद्ध कवि स्व.हरिवंशराय बच्चन की पुस्तकों के चित्र भी हरिपाल त्यागी बनाते थे।
उनकी प्रकाशित पुस्तकें आदमी से आदमी तक, शब्दचित्र एवं रेखाचित्र काफी प्रसिद्ध हुए। 'ननकू का पाजामा' लघु उपन्यास काफी प्रसिद्ध हुआ। साहित्य एवं कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए हरिपाल त्यागी को कई बार पुरस्कृत किया गया। प्रसिद्ध कवि स्व.हरिवंशराय बच्चन की पुस्तकों के चित्र भी हरिपाल त्यागी बनाते थे।
पूर्व में प्रकाशित हरिपाल त्यागी का साक्षत्कार
- फोटो : फाइल
एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा था कि प्रसिद्ध कवि हरिवंशराय बच्चन की पुस्तकों के कवर और अधिकांश स्केच उन्होंने ही बनाए। वह बच्चन से पहली मुलाकात के बारे में बतातें है कि राज कमल प्रकाशन से उनकी पुस्तक छपनी थी। पुस्तक के कवर के कई चित्र वह निरस्त कर चुके थे। उनसे चित्र लेकर बच्चन जी से मिलने को कहा गया।
बच्चन जी से मैं उनके दिल्ली स्थित निवास पर जाकर मिला। उन्होंने मुझ से चित्र लेकर बिना देखे उलटाकर रख दिया। कहा कि जिसने मेरी किताब नहीं पढ़ी ,वह उसका कवर कैसे बना सकता है। मैने उनसे कहा कि ये आपने कैसे कह दिया? फिर मैने छपने वाली ही नहीं उनकी पुरानी किताब कविताओं पर बेबाक टिप्पणी की। मुझ से प्रभावित होकर उन्होंने राजकमल प्रकाशन को कहा कि आज से उनकी सारी किताबों के कवर और स्केच त्यागी ही करेंगे।
बच्चन जी से मैं उनके दिल्ली स्थित निवास पर जाकर मिला। उन्होंने मुझ से चित्र लेकर बिना देखे उलटाकर रख दिया। कहा कि जिसने मेरी किताब नहीं पढ़ी ,वह उसका कवर कैसे बना सकता है। मैने उनसे कहा कि ये आपने कैसे कह दिया? फिर मैने छपने वाली ही नहीं उनकी पुरानी किताब कविताओं पर बेबाक टिप्पणी की। मुझ से प्रभावित होकर उन्होंने राजकमल प्रकाशन को कहा कि आज से उनकी सारी किताबों के कवर और स्केच त्यागी ही करेंगे।
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स्वर्गीय हरिपाल त्यागी साहित्यकार द्वारा बनाया गया हरिवंश राय बच्चन का चित्र
- फोटो : फाइल
बस यादें बाकी....
बिजनौर जिले के गांव महुआ में पैदा हुए मशहूर चित्रकार और कवि हरिपाल त्यागी ने 11 जून 2018 को अमर उजाला के साथ बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि शायद मैंने पहला चित्र मां के गर्भ की भित्ती पर उंगलियों से खींचा होगा। उनकी मां ने गर्भ की भित्ती पर कंपन महसूस कर उन्हें आशीर्वाद दिया होगा, तभी वह बचपन से आज तक अपने कार्य में व्यस्त रहे।
उन्होंने कहा था कि जीवन में पैसा खूब आया। किसी से मांगने की जरूरत नहीं पड़ी। लुटाया खूब। वे साधारण आदमी की तरह जीते हैं। बड़े आदमी की तरह चिंतन करते हैं। साधारण आदमी की तरह रहते है।
बिजनौर जिले के गांव महुआ में पैदा हुए मशहूर चित्रकार और कवि हरिपाल त्यागी ने 11 जून 2018 को अमर उजाला के साथ बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि शायद मैंने पहला चित्र मां के गर्भ की भित्ती पर उंगलियों से खींचा होगा। उनकी मां ने गर्भ की भित्ती पर कंपन महसूस कर उन्हें आशीर्वाद दिया होगा, तभी वह बचपन से आज तक अपने कार्य में व्यस्त रहे।
उन्होंने कहा था कि जीवन में पैसा खूब आया। किसी से मांगने की जरूरत नहीं पड़ी। लुटाया खूब। वे साधारण आदमी की तरह जीते हैं। बड़े आदमी की तरह चिंतन करते हैं। साधारण आदमी की तरह रहते है।
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स्वर्गीय हरिपाल त्यागी साहित्यकार द्वारा बनाए गए चित्र
- फोटो : फाइल
उन्हें बेइमान किंतु पारदर्शी आदमी पंसद हैं। ईमानदार आदमी बनता हैं और बनने वाले उन्हें पसद नहीं। युवा चित्रकारों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा था कि किताबी ज्ञान से कुछ होने वाला नहीं हैं। वे अपना दृष्टिकोण पहचानें। चित्र में क्या कहना चाहतें हैं, यह निश्चय कर काम करें। तजुर्बे और सवेंदनशीलता से अनुभव आएंगे।