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Children's Day 2017 : काश! इनके भी कोई चाचा नेहरू होते, दर्द भरी दास्तां

Tue, 14 Nov 2017 12:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Tue, 14 Nov 2017 12:54 PM IST
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Happy Children's Day : hopefully! None of his uncle was Nehru
इनको क्या मालूम क्या होता है बाल दिवस। बस इंतजार है तो एक ग्राहक का - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

मेरठ। 14 नवंबर की तारीख आती है तो याद आ जाता है बाल दिवस। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिवस को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री बच्चों से बहुत प्यार करते थे, लेकिन आज देहात की गलियां हों या फिर शहर की सड़कें। बच्चे मजदूरी करते हुए जरूर मिलेंगे। इन बच्चों को देखकर यही याद आता है कि काश इनके भी कोई चाचा नेहरू होते।

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शारदा रोड पर एक बच्चा मूंगफली बेच रहा था। यह बच्चा इसी इंतजार में है कि कोई उससे मूंगफली खरीद ले तो शाम को कुछ पैसे लेकर वह घर पहुंच जाएगा। जो भी आता उसे देखकर वह यही सोचता कि उसकी मूंगफली कितनी बिकेंगी। करीब 13 साल का ऐसा ही अन्य बच्चा ठेले पर सब्जी बेच रहा था। उसने बताया कि वह गरीब है। मम्मी पापा मेहनत करने भेज देते हैं। बागपत अड्डे के पास एक बच्चा बाइक पर मैकेनिक का काम सीख रहा है। कभी बाइक पर कपड़ा मारता तो कभी बाइक रिपेयगिं के लिए मदद करता। दिल्ली रोड पर भी कई जगह ऐसे ही बच्चे मजदूरी करते हुए दिखाई दिए।
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पढ़ें : बाल दिवस पर बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी को लिखी चिट्ठी

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बाल सदन में कुछ अलग है इनकी जिंदगी

Happy Children's Day : hopefully! None of his uncle was Nehru
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू

राजकीय बाल गृह सूरजकुंड में 15 बच्चे हैं। यह बच्चे अनाथ हैं जिनका कोई भी नहीं है। जिला प्रशासन की देखरेख में इन बच्चों के रहने, खाने के अलावा पढ़ाई की सुविधा रहती है। इनमें कई बच्चे निजी स्कूल में भी पढ़ाई कर रहे हैं। भले ही इन्हें प्रशासनिक सुविधा मिल रही हो, अपनों की याद में इन मासूमों की जिंदगी कुछ अलग है। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडे का कहना है इन बच्चों की 24 घंटे पूरी देखभाल की जाती है।

ये काट रहे सजा
जिला जेल से सटे राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह में 98 किशोर निरूद्घ हैं। जिन पर अलग-अलग अपराध का आरोप है। इन बच्चों की समय से काउंसिलिंग भी होती है। डीपीओ के पत्र लिखने के बाद भी शिक्षा विभाग से इन किशोरों के लिए पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं हुई। 

नहीं की कोई कार्रवाई
एंटी हृयूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का थाना है, लेकिन यहां तैनात पुलिसकर्मी सिर्फ अपनी आधी अधूरी ड्यूटी निभाते हैं। एक माह में बाल मजदूरी को लेकर एएचटीयू की टीम ने कोई कार्रवाई नहीं की। एएचटीयू की प्रभारी रश्मि चौधरी का कहना है कि 14 साल तक के बच्चे द्वारा काम कराना अपराध है। अभी उनकी तैनाती हुई है आगे इसको लेकर अभियान चलाया जाएगा।

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