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मेरठ : कागजों में रिपेयर हो गए हैंडपंप, कर दिया लाखों का भुगतान
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मेरठ। नगर निगम जलकल विभाग में हैंडपंप रिपेयर करने में खेल किया जा रहा है। अधिकारियों ने हैंडपंप रिपेयर के स्थान की रिपोर्ट के बिना ही लाखों रुपये का भुगतान कर दिया।
यह फर्जीवाड़ा मुख्य नगर लेखा परीक्षक के कार्यालय में फाइलें पहुंचने पर पकड़ में आया।
हैंडपंपों पर डाले गए थे नंबर
महानगर में दस हजार से भी अधिक हैंडपंप हैं। 2017-18 में सभी हैंडपंपों पर नंबरिंग की गई थी। ताकि फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाया जा सके। इसकी पूरी फाइल भी तैयार की गई थी। छह माह तक यह व्यवस्था लागू रही। इसके बाद विभाग के अधिकारियों ने व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया। पुरानी व्यवस्था पर यानी मनमर्जी से फाइल तैयार कर हैंडपंपों की रिपेयर और रिबोर कराए जा रहे हैं।
दो बार फोटोग्राफी का नियम भी ताक पर
हैंडपंप और सबमर्सिबल रिपेयर में गोलमाल की शिकायत पर तत्कालीन नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने निर्धारित किया था कि खराब हैंडपंप और सबमर्सिबल की पहले फोटो कराई जाएगी। साथ ही जिस हैंडपंप को ठीक किया जाएगा उसका नंबर और पड़ोसी भवन स्वामी का नाम भी पत्रावली में अंकित होगा, लेकिन नगरायुक्त द्वारा बनाए गए नियमों को जलकल अधिकारी नहीं मान रहे हैं।
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फर्जी फाइलें बनाकर लाखों का भुगतान
जलकल विभाग के अधिकारियों ने हैंडपंप और सबमर्सिबल रिपेयर पर लाखों रुपये का खर्च दर्शाया है। बताया जा रहा है कि दीपावली से पहले बगैर किसी रिकार्ड के हैंडपंप और सबमर्सिबल रिबोर की फर्जी फाइलें तैयार कर लाखों का भुगतान किया गया। मुख्य नगर लेखा परीक्षक केवी श्रीवास्तव की रिपोर्ट में साफ है कि पत्रावली में यह रिकार्ड शामिल नहीं है कि हैंडपंप किस स्थान पर खराब था। इसका रिबोर किया गया। पत्रावली में केवल हैंडपंप रिबोर की संख्या अंकित है। इससे साफ हो रहा है कि फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट सहायक नगरायुक्त और नगरायुक्त को भेज दी गई है।
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कार्रवाई की जाएगी
शुरू में हमारे पास जो फाइलें आई थीं, उनको हमने आगे बढ़ाया था। उनका भुगतान हुआ या नहीं यह जानकारी नहीं है। अब हमने जलकल के सहायक अवर अभियंता और जेई को निर्देश दिए हैं कि वह खराब हैंडपंप, टूटी पाइप लाइन के फोटो जरूर कराएं। यदि कहीं फर्जीवाड़ा पकड़ा जाता है तो कार्रवाई की जाएगी। -ब्रजपाल सिंह, सहायक नगरायुक्त
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यह फर्जीवाड़ा मुख्य नगर लेखा परीक्षक के कार्यालय में फाइलें पहुंचने पर पकड़ में आया।
हैंडपंपों पर डाले गए थे नंबर
महानगर में दस हजार से भी अधिक हैंडपंप हैं। 2017-18 में सभी हैंडपंपों पर नंबरिंग की गई थी। ताकि फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाया जा सके। इसकी पूरी फाइल भी तैयार की गई थी। छह माह तक यह व्यवस्था लागू रही। इसके बाद विभाग के अधिकारियों ने व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया। पुरानी व्यवस्था पर यानी मनमर्जी से फाइल तैयार कर हैंडपंपों की रिपेयर और रिबोर कराए जा रहे हैं।
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दो बार फोटोग्राफी का नियम भी ताक पर
हैंडपंप और सबमर्सिबल रिपेयर में गोलमाल की शिकायत पर तत्कालीन नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने निर्धारित किया था कि खराब हैंडपंप और सबमर्सिबल की पहले फोटो कराई जाएगी। साथ ही जिस हैंडपंप को ठीक किया जाएगा उसका नंबर और पड़ोसी भवन स्वामी का नाम भी पत्रावली में अंकित होगा, लेकिन नगरायुक्त द्वारा बनाए गए नियमों को जलकल अधिकारी नहीं मान रहे हैं।
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फर्जी फाइलें बनाकर लाखों का भुगतान
जलकल विभाग के अधिकारियों ने हैंडपंप और सबमर्सिबल रिपेयर पर लाखों रुपये का खर्च दर्शाया है। बताया जा रहा है कि दीपावली से पहले बगैर किसी रिकार्ड के हैंडपंप और सबमर्सिबल रिबोर की फर्जी फाइलें तैयार कर लाखों का भुगतान किया गया। मुख्य नगर लेखा परीक्षक केवी श्रीवास्तव की रिपोर्ट में साफ है कि पत्रावली में यह रिकार्ड शामिल नहीं है कि हैंडपंप किस स्थान पर खराब था। इसका रिबोर किया गया। पत्रावली में केवल हैंडपंप रिबोर की संख्या अंकित है। इससे साफ हो रहा है कि फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट सहायक नगरायुक्त और नगरायुक्त को भेज दी गई है।
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कार्रवाई की जाएगी
शुरू में हमारे पास जो फाइलें आई थीं, उनको हमने आगे बढ़ाया था। उनका भुगतान हुआ या नहीं यह जानकारी नहीं है। अब हमने जलकल के सहायक अवर अभियंता और जेई को निर्देश दिए हैं कि वह खराब हैंडपंप, टूटी पाइप लाइन के फोटो जरूर कराएं। यदि कहीं फर्जीवाड़ा पकड़ा जाता है तो कार्रवाई की जाएगी। -ब्रजपाल सिंह, सहायक नगरायुक्त