Triple Murder: तिहरे हत्याकांड से बदनाम है मेरठ का गुदड़ी बाजार, नाम के पीछे जुड़ी हैं भी हैं कहानियां
मेरठ में तिहरे हत्याकांड में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद गुदड़ी बाजार फिर सुर्खियों में है।
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मेरठ में तिहरे हत्याकांड के आखिरी दोषी को भी आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद गुदड़ी बाजार फिर सुर्खियों में है। कम ही लोग जानते हैं कि गुदड़ी बाजार का नाम गुदड़ी बाजार क्यों पड़ा। इसके पीछे भी दो कहानियां हैं।
गुदड़ी बाजार के रहने वाले 75 साल के मुंशी इस्लामुद्दीन गाजी बताते हैं कि यहां बड़े-बड़े चबूतरे थे। शहर का यहां मुख्य बाजार था। घंटाघर इसके बाद बना। यहां किला था और किले के नीचे बाजार लगता था।
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पहली कहानी यह है कि इसको लोग गुजरी बाजार कहते थे। दरअसल, यहां नालों पर बने चबूतरों पर गुर्जर समुदाय की महिलाएं देसी घी बेचने के लिए मटके लाती थीं। इसलिए लोग आम बोलचाल में इसे गुजरी बाजार कहते थे।
उन्होंने बताया कि दूसरी कहानी यह है कि यहां रजाइयों में भरी जाने वाली रूई की गुदड़ी का काम होता था। गुदड़ी बिकती थी। इस वजह से कुछ लोग इसे गुदड़ी बाजार कहते थे। दोनों नाम मिलते-जुलते थे, लिहाजा बाद में गुदड़ी प्रचलन में ज्यादा रहा। हालांकि अब तिहरे हत्याकांड की वजह से इसे ज्यादा जोड़कर देखा जाता है।