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Meerut News: मवाना में गणेश पूजन और रिबन काटकर श्री रामलीला का भव्य शुभारंभ
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संवाद न्यूज एजेंसी
मवाना। भगवान श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित प्रभु श्रीराम की लीला के मंचन का सोमवार शाम विधि विधान के साथ हुआ।
सोमवार को कार्यक्रम का उद्घाटन उप जिलाधिकारी संतोष सिंह, क्षेत्राधिकारी पुलिस पंकज लवानिया और नगर पालिका अध्यक्ष अखिल कुमार कौशिक ने संयुक्त रूप से गणेश पूजन कर किया। लीला की शुरुआत नारद की कठोर तपस्या और उनके अहंकार के प्रसंग से हुई। जब कामदेव भी नारद की तपस्या भंग करने में असफल रहे तो नारद को यह अहंकार हो गया कि उन्होंने कामदेव पर विजय प्राप्त कर ली है। जब वह इस बात को लेकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे तो भगवान विष्णु ने उनका अहंकार समाप्त करने के लिए एक मायावी नगर और अति सुंदर राजकुमारी की रचना की।
राजकुमारी के स्वयंवर में जाने के लिए नारद ने भगवान विष्णु से उनका सुंदर रूप मांगा, लेकिन भगवान ने उन्हें हरी (वानर) का रूप दे दिया। स्वयंवर में उपहास उड़ने पर जब नारद ने दर्पण में अपना मुख देखा तो वे क्रोधित हो उठे। क्रोधवश नारद ने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि जिस प्रकार आपने मुझे स्त्री के वियोग में तड़पाया है, उसी प्रकार आपको भी मनुष्य रूप में जन्म लेकर स्त्री वियोग सहना होगा और जिन वानरों के कारण मेरा उपहास हुआ है, वही वानर आपकी सहायता करेंगे।
इसके पश्चात लीला में राजा मनु और रानी शतरूपा की कठिन तपस्या का दृश्य प्रस्तुत किया गया। हजारों वर्षों की निस्वार्थ तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान नारायण ने उन्हें दर्शन दिए तो मनु-शतरूपा ने भगवान से उनके जैसा ही पुत्र पाने का वरदान मांगा। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि त्रेतायुग में वह स्वयं राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर श्री राम के रूप में अवतार लेंगे।
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लीला के दूसरे दिन कलाकारों द्वारा पृथ्वी की पुकार और रावण-कुंभकर्ण के जन्म की लीला का सुंदर व भावपूर्ण मंचन किया गया, जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस अवसर पर रामलीला समिति के मुख्य सचिव सुभाष चंद्र दीक्षित, प्रबंधक राजेंद्र चौहान, उपाध्यक्ष संजय शर्मा, रविकांत कंसल, चंद्रशेखर आजाद, संजय रस्तोगी, अशोक चौहान, शिवनारायण पटवारी, प्रज्ज्वल चौहान, नवनीत चौहान, सिद्धम जैन, गोपाल चौहान और अजीत शर्मा सहित समिति के अनेक पदाधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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मवाना। भगवान श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित प्रभु श्रीराम की लीला के मंचन का सोमवार शाम विधि विधान के साथ हुआ।
सोमवार को कार्यक्रम का उद्घाटन उप जिलाधिकारी संतोष सिंह, क्षेत्राधिकारी पुलिस पंकज लवानिया और नगर पालिका अध्यक्ष अखिल कुमार कौशिक ने संयुक्त रूप से गणेश पूजन कर किया। लीला की शुरुआत नारद की कठोर तपस्या और उनके अहंकार के प्रसंग से हुई। जब कामदेव भी नारद की तपस्या भंग करने में असफल रहे तो नारद को यह अहंकार हो गया कि उन्होंने कामदेव पर विजय प्राप्त कर ली है। जब वह इस बात को लेकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे तो भगवान विष्णु ने उनका अहंकार समाप्त करने के लिए एक मायावी नगर और अति सुंदर राजकुमारी की रचना की।
राजकुमारी के स्वयंवर में जाने के लिए नारद ने भगवान विष्णु से उनका सुंदर रूप मांगा, लेकिन भगवान ने उन्हें हरी (वानर) का रूप दे दिया। स्वयंवर में उपहास उड़ने पर जब नारद ने दर्पण में अपना मुख देखा तो वे क्रोधित हो उठे। क्रोधवश नारद ने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि जिस प्रकार आपने मुझे स्त्री के वियोग में तड़पाया है, उसी प्रकार आपको भी मनुष्य रूप में जन्म लेकर स्त्री वियोग सहना होगा और जिन वानरों के कारण मेरा उपहास हुआ है, वही वानर आपकी सहायता करेंगे।
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इसके पश्चात लीला में राजा मनु और रानी शतरूपा की कठिन तपस्या का दृश्य प्रस्तुत किया गया। हजारों वर्षों की निस्वार्थ तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान नारायण ने उन्हें दर्शन दिए तो मनु-शतरूपा ने भगवान से उनके जैसा ही पुत्र पाने का वरदान मांगा। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि त्रेतायुग में वह स्वयं राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर श्री राम के रूप में अवतार लेंगे।
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लीला के दूसरे दिन कलाकारों द्वारा पृथ्वी की पुकार और रावण-कुंभकर्ण के जन्म की लीला का सुंदर व भावपूर्ण मंचन किया गया, जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस अवसर पर रामलीला समिति के मुख्य सचिव सुभाष चंद्र दीक्षित, प्रबंधक राजेंद्र चौहान, उपाध्यक्ष संजय शर्मा, रविकांत कंसल, चंद्रशेखर आजाद, संजय रस्तोगी, अशोक चौहान, शिवनारायण पटवारी, प्रज्ज्वल चौहान, नवनीत चौहान, सिद्धम जैन, गोपाल चौहान और अजीत शर्मा सहित समिति के अनेक पदाधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहे।