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लॉकडाउन में फसलों को बरबाद कर रहे आवारा गोवंश, किसान परेशान

Tue, 02 Jun 2020 01:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2020 01:15 AM IST
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gowansh destroy the crops in the field in the seasion of lockdown, farmers warred
मेरठ-गढ़ मार्ग पर घूमते आवारा गोवंश। - फोटो : KITHOR
माछरा/ मुंडाली(मेरठ)। क्षेत्र के किसानों की लगातार घटती जोत से जीविका बचाने की जद्दोजहद मे किसान जुटा है लेकिन आवारा पशुओं ने किसानों को परेशान कर दिया है। क्षेत्र मे धान, ज्वार, गन्ना, मक्का आदि फसलों को आवारा पशुओं ने तबाह कर दिया है। किसान रात-दिन फसल बचाने को खेतों में पहरा दे रहे हैं।
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प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि आवारा, बेसहारा, पशुओं को स्थाई या अस्थाई गोशाला या गोआश्रय में रखा जाए। कुछ पशुओं को गोशाला में रखा गया परंतु मार्च माह में कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन लगने के कारण अधिकारियों ने भी इन आवारा, बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशाला आदि में भेजना बंद कर दिया है। किसान लोकेश तोमर, दीपक तोमर, ठेकेदार सतीश तोमर, नरेश चेयरमैन ने बताया कि जब से लॉकडाउन लगा है कार्यालय बंद होने के कारण अधिकारी भी नहीं मिले। जबकि जो पशुपालक गोवंश को छोडे़ उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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खेत की तारबंदी से बचा रहे हैं फसल
किसान खेत पर लकड़ी लगाकर तार खींच रहे हैं या फिर पुतले भी लगाए जा रहे हैं जिससे आवारा पशु फसलों को नुकसान न पहुंचा सके।
दुधारू पशुओं में बढ़ता बांझपन
दुधारू पशुओं में बांझपन भी बढ़ता जा रहा है। पशुपालक प्रशांत तोमर, अजय कुमार आदि का कहना है कि बांझपन के चलते गाय व भैंस अनुपयोगी हो जाते हैं। आम किसान के लिए बांझ गाय व भैंस को रख पाना मुमकिन नहीं। बदले हालात में बांझ भैंस तो बिक जाती है परंतु गाय का कोई खरीददार नहीं। गोशालाएं भी बांझ गायों को लेने से कतराती है मजबूरन ऐसे गायों को खुले में छोड़ दिया जाता है।
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आबादी वाले इलाकों में उत्पात
बेसहारा, आवारा, पशु किसानों के खेतों में ही नहीं बल्कि आबादी वाले इलाकों में भी आतंक का पर्याय बन रहे हैं। पिछले वर्षों में क्षेत्र के भगवानपुर चट्टावन एवं हसनपुर कलां में दो लोगों की मौत भी टक्कर मारकर कर दी थी। ये छुट्टा जानवर खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और बस्ती में भी हमले जानलेवा हो रहे हैं।
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