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सरकारी विभागों की मिलीभगत से खेला मोबाइल कंपनी ने खेल
Wed, 17 Apr 2019 03:06 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Wed, 17 Apr 2019 03:06 AM IST
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सरकारी विभागों के साथ मिलकर एक मोबाइल कंपनी ने जिले में जमकर खेल खेला। केवल 220 किमी लंबाई में ही अंडरग्राउंड ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने की मंजूरी ली गई। लेकिन इसी आड़ में 730 किमी लंबी लाइन डाल दी गई है। शिकायत पर आयुक्त अनीता सी. मेश्राम ने जांच शुरू करा दी है। जांच अधिकारी अपर आयुक्त ने नगर आयुक्त, पीडब्लूडी तथा कंपनी अधिकारियों को तलब किया है।
गोविंदपुरी निवासी जावेद ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत की थी। बताया गया कि मेरठ में एक मोबाइल कंपनी ने अपनी लाइनें डालने के लिए काम शुरू किया था। ऑप्टिकल फाइबल केबिल बिछाने के लिए नगर निगम, लोक निर्माण विभाग तथा मेरठ विकास प्राधिकरण से अनुमति मांगी गई थी। नगर निगम में अलग-अलग हिस्सों में इसके लिए अनुमति प्रदान की। 125.55 किमी तथा 40.30 किमी दो अलग-अलग हिस्सों में यह केबल डालने की अनुमति दे दी गई। वर्ष 2013 में ये अनुमति दी गई। दूसरी तरफ पीडब्लूडी ने सात जून 2015 को 55 किमी लंबाई में केबल डालने की अनुमति दी।
इस तरह कर दिया खेल
आरोप है कि अनुमति कम की मिली। लेकिन काम कई गुना ज्यादा किया गया। जैसे नगर निगम की दी गई अनुमति 165.85 किमी के सापेक्ष 550 किमी लंबा केबल वायर डाल दिया गया। यानी 384 किमी ज्यादा काम कर डाला गया। इसी तरह से पीडब्लूडी द्वारा दी गई अनुमति 55 किमी की थी। लेकिन 180 किमी लंबाई में काम किया गया। यहां भी अनुमति से 125 किमी काम ज्यादा किया। कुल 509 किमी ज्यादा काम किया गया। आरोप है कि यह सारा काम इन विभागों के अधिकारियों की सेटिंग से हुआ।
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न गड्ढे भरे, न की मरम्मत
अनुमति से ज्यादा काम तो किया ही गया बल्कि जो गड्ढे खोदे गए थे, न तो वह ठीक से भरे और न ही इन्हें ढंकने के बाद इन पर न सही तरीके से मरम्मत की गई। इससे सबसे इस कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और सरकारी खजाने को चपत लगी। साथ ही आधुनिक तकनीक से खुदाई न कराकर खुली खुदाई कराई गई तो शर्तों के विपरीत थी।
पांच करोड़ का तो सीधा फटका
आरोप है कि इन सभी पर लगने वाले शुल्क का पांच करोड़ रुपया बचाया गया है। विभागों की मेहरबानी इतनी रही कि इस काम पर लगने वाले डिजिटल जनरेटर का लगभग पचास लाख रुपये किराया सात साल से वसूला ही नहीं गया। इतना ही नहीं, कंपनी को काम के लिए जगह दी गई जिसका किराया भी नहीं वसूला।
सभी को नोटिस जारी
आयुक्त अनीता सी. मेश्राम ने पूरे प्रकरण की जांच अपर आयुक्त उदयीराम को सौंप दी है। अपर आयुक्त ने नगरायुक्त, मुख्य अभियंता पीडब्लूडी तथा कंपनी के पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है। कहा है कि तीन दिन में अपना जवाब पेश करें।
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गोविंदपुरी निवासी जावेद ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत की थी। बताया गया कि मेरठ में एक मोबाइल कंपनी ने अपनी लाइनें डालने के लिए काम शुरू किया था। ऑप्टिकल फाइबल केबिल बिछाने के लिए नगर निगम, लोक निर्माण विभाग तथा मेरठ विकास प्राधिकरण से अनुमति मांगी गई थी। नगर निगम में अलग-अलग हिस्सों में इसके लिए अनुमति प्रदान की। 125.55 किमी तथा 40.30 किमी दो अलग-अलग हिस्सों में यह केबल डालने की अनुमति दे दी गई। वर्ष 2013 में ये अनुमति दी गई। दूसरी तरफ पीडब्लूडी ने सात जून 2015 को 55 किमी लंबाई में केबल डालने की अनुमति दी।
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इस तरह कर दिया खेल
आरोप है कि अनुमति कम की मिली। लेकिन काम कई गुना ज्यादा किया गया। जैसे नगर निगम की दी गई अनुमति 165.85 किमी के सापेक्ष 550 किमी लंबा केबल वायर डाल दिया गया। यानी 384 किमी ज्यादा काम कर डाला गया। इसी तरह से पीडब्लूडी द्वारा दी गई अनुमति 55 किमी की थी। लेकिन 180 किमी लंबाई में काम किया गया। यहां भी अनुमति से 125 किमी काम ज्यादा किया। कुल 509 किमी ज्यादा काम किया गया। आरोप है कि यह सारा काम इन विभागों के अधिकारियों की सेटिंग से हुआ।
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न गड्ढे भरे, न की मरम्मत
अनुमति से ज्यादा काम तो किया ही गया बल्कि जो गड्ढे खोदे गए थे, न तो वह ठीक से भरे और न ही इन्हें ढंकने के बाद इन पर न सही तरीके से मरम्मत की गई। इससे सबसे इस कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और सरकारी खजाने को चपत लगी। साथ ही आधुनिक तकनीक से खुदाई न कराकर खुली खुदाई कराई गई तो शर्तों के विपरीत थी।
पांच करोड़ का तो सीधा फटका
आरोप है कि इन सभी पर लगने वाले शुल्क का पांच करोड़ रुपया बचाया गया है। विभागों की मेहरबानी इतनी रही कि इस काम पर लगने वाले डिजिटल जनरेटर का लगभग पचास लाख रुपये किराया सात साल से वसूला ही नहीं गया। इतना ही नहीं, कंपनी को काम के लिए जगह दी गई जिसका किराया भी नहीं वसूला।
सभी को नोटिस जारी
आयुक्त अनीता सी. मेश्राम ने पूरे प्रकरण की जांच अपर आयुक्त उदयीराम को सौंप दी है। अपर आयुक्त ने नगरायुक्त, मुख्य अभियंता पीडब्लूडी तथा कंपनी के पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है। कहा है कि तीन दिन में अपना जवाब पेश करें।