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रोडवेज चालकों के हवाले हुई सरकारी एंबुलेंस
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रोडवेज चालकों के हवाले हुई सरकारी एंबुलेंस
मेरठ। सरकारी एंबुलेंस सेवा के चालकों के आंदोलन से ठप पड़ी सेवा को रोडवेज चालकों के हवाले कर दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर आरएम रोडवेज ने 21 चालकों को भेज दिया है। 11 चालक सोहराबगेट डिपो से और 10 चालक मेरठ डिपो से भेजे गए हैं। जब तक अन्य कोई व्यवस्था या एंबुलेंस चालकों का आंदोलन खत्म नहीं हो जाता, तब तक रोडवेज चालक एंबुलेंस पर कार्यरत रहेंगे।
पिछले कई दिन से सरकारी एंबुलेंस सेवा के चालकों का आंदोलन चल रहा है। इसके चलते एंबुलेंस सेवा बाधित चल रही है। चालकों ने आपातकालीन सेवा को भी ठप कर दिया है। मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में आ रही दिक्कत को देखते हुए शुक्रवार को जिलाधिकारी के. बालाजी ने रोडवेज आरएम केके शर्मा को फोन करके 40 रोडवेज चालक उपलब्ध कराने को कहा। शाम तक दोनों डिपो से 21 नियमित चालक सीएमओ आफिस को उपलब्ध करा दिए गए। एंबुलेंस पर संविदा चालकों की बजाय नियमित चालक भेजे गए हैं। आरएम केके शर्मा का कहना है कि एंबुलेंस पर ड्यूटी करने पर संविदा चालकों को भुगतान करने में दिक्कत आएगी। इसके चलते नियमित चालकों को भेजा गया है।
लखनऊ पहुंचे एंबुलेंसकर्मी
एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) के कर्मचारियों को नई कंपनी द्वारा हटाने के फैसले के विरोध में करीब 140 एंबुलेंस कर्मचारी धरने प्रदर्शन के लिए लखनऊ रवाना हो गए। पुलिस ने बृहस्पतिवार को दो एंबुलेंसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद एंबुलेंसकर्मी यहां से धरना खत्म कर, लखनऊ के लिए रवाना हो गए थे। जिलाध्यक्ष का कहना है कि लखनऊ पहुंच गए हैं। अब यहीं विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विवाद में प्रदेशभर के एंबुलेंस चालक व कर्मचारी लामबंद हैं।
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मरीज हुए परेशान, निजी वाहन से आए अस्पताल
शुक्रवार को भी एंबुलेंस कर्मियों के चक्का जाम से मरीजों को परेशानी रही। बिना एंबुलेंस के अपने वाहनों या निजी वाहनों से मरीज अस्पताल में पहुंचते नजर आए। सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन का कहना है कि 49 एंबुलेंस संचालित है। किसी मरीज को परेशानी नहीं होने दी जा रही। अभी तक अधिकारी एंबुलेंसकर्मियों को काम पर बुलाने की कोशिश में जुटे थे, लेकिन वह नहीं माने।
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मेरठ। सरकारी एंबुलेंस सेवा के चालकों के आंदोलन से ठप पड़ी सेवा को रोडवेज चालकों के हवाले कर दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर आरएम रोडवेज ने 21 चालकों को भेज दिया है। 11 चालक सोहराबगेट डिपो से और 10 चालक मेरठ डिपो से भेजे गए हैं। जब तक अन्य कोई व्यवस्था या एंबुलेंस चालकों का आंदोलन खत्म नहीं हो जाता, तब तक रोडवेज चालक एंबुलेंस पर कार्यरत रहेंगे।
पिछले कई दिन से सरकारी एंबुलेंस सेवा के चालकों का आंदोलन चल रहा है। इसके चलते एंबुलेंस सेवा बाधित चल रही है। चालकों ने आपातकालीन सेवा को भी ठप कर दिया है। मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में आ रही दिक्कत को देखते हुए शुक्रवार को जिलाधिकारी के. बालाजी ने रोडवेज आरएम केके शर्मा को फोन करके 40 रोडवेज चालक उपलब्ध कराने को कहा। शाम तक दोनों डिपो से 21 नियमित चालक सीएमओ आफिस को उपलब्ध करा दिए गए। एंबुलेंस पर संविदा चालकों की बजाय नियमित चालक भेजे गए हैं। आरएम केके शर्मा का कहना है कि एंबुलेंस पर ड्यूटी करने पर संविदा चालकों को भुगतान करने में दिक्कत आएगी। इसके चलते नियमित चालकों को भेजा गया है।
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लखनऊ पहुंचे एंबुलेंसकर्मी
एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) के कर्मचारियों को नई कंपनी द्वारा हटाने के फैसले के विरोध में करीब 140 एंबुलेंस कर्मचारी धरने प्रदर्शन के लिए लखनऊ रवाना हो गए। पुलिस ने बृहस्पतिवार को दो एंबुलेंसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद एंबुलेंसकर्मी यहां से धरना खत्म कर, लखनऊ के लिए रवाना हो गए थे। जिलाध्यक्ष का कहना है कि लखनऊ पहुंच गए हैं। अब यहीं विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विवाद में प्रदेशभर के एंबुलेंस चालक व कर्मचारी लामबंद हैं।
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मरीज हुए परेशान, निजी वाहन से आए अस्पताल
शुक्रवार को भी एंबुलेंस कर्मियों के चक्का जाम से मरीजों को परेशानी रही। बिना एंबुलेंस के अपने वाहनों या निजी वाहनों से मरीज अस्पताल में पहुंचते नजर आए। सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन का कहना है कि 49 एंबुलेंस संचालित है। किसी मरीज को परेशानी नहीं होने दी जा रही। अभी तक अधिकारी एंबुलेंसकर्मियों को काम पर बुलाने की कोशिश में जुटे थे, लेकिन वह नहीं माने।