अलविदा 2020: परिवहन के लिए अच्छा रहा साल, मेरठ को मिली हाईवे की सौगात, जिंदगी भरने लगी रफ्तार
परिवहन के लिहाज से यह साल मेरठ के लिए अच्छा रहा है। शहरवासियों को मेरठ-बुलंदशहर हाईवे, मेरठ-टपरी रेल मार्ग के दोहरीकरण की सौगात मिली। आठ माह से बंद संगम और नौचंदी का फिर से संचालन शुरू हो गया। इसके साथ ही महानगर बस सेवा के लिए लोहियानगर में बस अड्डे का निर्माण भी शुरू हो गया है...
वर्ष-2020 खत्म होते-होते केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मेरठ-बुलंदशहर हाईवे का लोकार्पण किया। मात्र 40 मिनट में मेरठ से बुलंदशहर का सफर पूरा किया जा रहा है। सिटी स्टेेशन पर कोच डिस्पले सिस्टम सहित मेरठ से टपरी दोहरीकरण के अंतिम चरण देवबंद-टपरी को कमिश्नर रेलवे सेफ्टी ने हरी झंडी दिखाई।
उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष कुमार जब मेरठ दौरे पर आए थे, तब अमर उजाला ने उनसे संगम और नौचंदी के न चलाने का कारण पूछा था। उन्होंने ट्रेन चलाने का आश्वासन दिया था। चार दिन बाद ही संगम एक्सप्रेस को चलाने की घोषणा भी कर दी थी।
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पिछले कई वर्षों से अधर में लटके कांवड़ गंगनहर दायीं पटरी के प्रोजेक्ट को कैबिनेट में मंजूरी मिली। निर्माण कार्य के लिए 100 करोड़ की पहली किश्त भी जारी कर दी गई है। अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सबसे अधिक फायदा लाखों शिवभक्तों को होने जा रहा है। कांवड़ मेले के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश का परिवहन एक सप्ताह तक थम जाता था। इस दायीं पटरी के बन जाने के बाद राहत मिलेगी।
एक नजर में
मेरठ-बुलंदशहर हाईवे
कुल किलोमीटर: 61.19 किमी
कुल लेन: चार लेन
कुल लागत: 2407.91 करोड़
कांवड़ गंगनहर दायीं पटरी
कुल किलोमीटर: 111.40 किमी
कुल लागत: 628.74 करोड़
कुल भूमि अधिग्रहण: 1.74 हेक्टेयर
बस अड्डे का निर्माण शुरू
महानगर बस सेवा के लिए भले ही नई बसों की व्यवस्था न हो सकी हो, लेकिन लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ा बस अड्डे का निर्माण शुरू हो गया है। लोहियानगर में पांच एकड़ जमीन में बनने वाले इस अड्डे का निर्माण कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन कार्यदायी संस्था द्वारा करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से किया जाना है। बस अड्डे पर इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन भी बनाया जाना है।
यहां मिली निराशा
महानगर बस सेवा के लिए पूरे साल रहा इंतजार
शहरवासियों को बेहतर यातायात सुविधा देने के लिए शुरू की गई महानगर बस सेवा को पिछले एक साल से प्रस्तावित 130 बसें नहीं मिली। वर्ष 2009-10 में महानगर बस सेवा के लिए जेएनएनयूआरएम योजना के अंतर्गत शहर को 120 बसें दी गई थी।
नगर विकास विभाग द्वारा संचालन से हाथ खड़े करने के बाद से रोडवेज द्वारा बसों का संचालन सोहराबगेट अड्डे से किया जा रहा था, लेकिन एनजीटी के दस साल पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध के आदेश पर इन सभी बसों के पहिये पांच महीने पहले थम गए हैं।
नगर विकास विभाग ने पहले से ही तैयारी करते हुए शहर के लिए 130 बसों की स्वीकृति दे दी थी। इसमें 80 सीएनजी और 50 इलेक्ट्रिक बसें शामिल है। लेकिन पूरा साल बीतने के बाद भी अब तक एक भी बस नहीं मिल सकी है।
बस विहीन ग्रामीण रूटों पर बसें नहीं हुईं शुरू योगी सरकार ने आते ही बस विहीन ग्रामीण रूटों पर बस चालू करके उन्हें शहर से सीधे जोड़ने का एलान किया था। इसके लिए रोडवेज ने जिले के करीब दो दर्जन रूट चिह्नित कर इनकी सूची मुख्यालय भिजवाई थी, लेकिन इन रूटों के लिए बसें नहीं मिलने से ये आज भी बसों की बांट जोह रहे हैं।