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गोलमाल: सड़कों पर नहीं, फाइलों में ही पुराने हो रहे रोडवेज बसों के टायर, विभाग को लगाई लाखों रुपये की चपत

Sat, 08 Apr 2023 11:18 AM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, अमर उजाला, मेरठ/बड़ौत
मुकेश पंवार, अमर उजाला, मेरठ/बड़ौत Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 08 Apr 2023 11:18 AM IST
सार

मेरठ परिक्षेत्र के तीन डिपो में टायरों की कमी के कारण 50 बसें खड़ीं हुई हैं। बड़ौत डिपो में नए टायर भी बदल दिए गए। टायरों के चलने की गारंटी एक लाख किलोमीटर की थी, लेकिन 15 हजार किमी पर ही टायर बदल दिए गए। हर माह डिपो में  20 से अधिक रोडवेज  बसों के टायर बदले जा रहे हैं। मामला खुला तो जांच शुरू की गई।
 

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Golmaal: Tires of roadways buses getting old in the files, not on the roads
रोडवेज बस अड्डे पर खड़ीं बसें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के बड़ौत में सड़कों पर चलकर नहीं, बल्कि फाइलों में बसों के टायर घिस रहे हैं। बड़ौत डिपो में हर महीने 20 से अधिक बसों में नए टायर बदलकर विभाग को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। फाइलों में चल रहा यह खेल खुला तो विभागीय अफसर जांच कर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। 
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यह हाल तब है जबकि मेरठ परिक्षेत्र में आने वाले पांच डिपो में से तीन डिपो में इस समय टायरों की कमी है और लगभग 50 बसें टायर घिस जाने के कारण कार्यशालाओं में खड़ी हैं। 
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कंपनी नए टायर पर एक लाख किलोमीटर की दूरी तय करने की गारंटी दे रही है, लेकिन यह गारंटी मात्र 15 हजार किमी पर आकर खत्म हो रही है। यानी विभाग को नुकसान पहुंचाने के लिए फाइलों में ही नए टायर पुराने हो रहे हैं। 
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मेरठ क्षेत्र में बड़ौत डिपो, गढमुक्तेश्वर डिपो, सोहराबगेट डिपो, मेरठ डिपो व भैंसाली डिपो आता है। मेरठ डिपो में 125 बसें चलती हैं। इनमें बड़ौत डिपो में 62, गढमुक्तेश्वर डिपो में 85, सोहराबगेट डिपो में लगभग 130 बसें रोडवेज की चलती हैं। यानी लगभग 402 बसें संचालित है।  

भैंसाली डिपो में अनुबंधित बसें संचालित हैं। अब यदि क्षेत्रीय कार्यशाला की बात करें तो करीब 50 बसें टायरों की कमी से खड़ी हैं। बड़ौत डिपो में टायरों की कोई कमी नहीं है। यहां लगभग 20 बसों में हर महीने नए टायर बदले जा रहे हैं। अब मामला उजागर हुआ तो विभागीय अफसरों में हड़कंप मच गया। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है।

एक माह में 20 बसों के बदले गए 160 टायर
बड़ौत डिपो में संचालित बस नंबर यूपी 15बीटी 2980 में आठ टायर, यूपी 81बीटी 6560 में आठ टायर, यूपी 30एटी 2605 में आठ टायर, यूपी 30 एटी 2588 में सात टायर, यूपी 81बीटी 7091 में सात टायर, यूपी 21बीएन 3604 में नौ टायर, यूपी 38एफटी 8702 में आठ टायरों सहित अन्य बसों में मात्र 15 हजार किलोमीटर दूरी तय करने पर टायर बदले गए हैं।

यानी इन 20 बसों में 11 माह के अंदर लगभग 160 टायर बदले गए हैं। कुल 1.60 करोड़ किलोमीटर दूरी तय करते, लेकिन इन टायरों को मात्र 24 लाख किलोमीटर दूरी तय करने पर ही बदल दिया गया। रोडवेज बस के एक टायर की कीमत की बात करें तो लगभग 18 हजार रुपये में एक टायर आता है। ऐसे में 20 बसों में 11 माह के अंदर लगभग 29 लाख रुपये के टायर बदल दिए गए। 

ये बोले एआरएम
मामला गंभीर है, हाल ही में पकड़ में आया है, जिसकी गहनता से जांच कराई जा रही है। कुछ बसों में तय दूरी से पहले ही टायर बदलना पाया गया है। जांच पूरी होने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी -रामदास, एआरएम बड़ौत।

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