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आजादी के आंदोलन का गवाह बना था एतिहासिक सीकरी खुर्द
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आजादी के आंदोलन और आस्था का केंद्र है सीकरी खुर्द
मोदीनगर। ऐतिहासिक और पौराणिक सीकरी खुर्द गांव आजादी के आंदोलन का गवाह रहा है। अंग्रेजी हुकूमत से ग्रामीणों ने लोहा लिया था। 1857 की क्रांति में अंग्रेजों ने 131 लोगों को गांव में फांसी दी थी। उसके बाद क्रांति की ज्वाला धधक पड़ी। क्रांति के अलावा सीकरी खुर्द आस्था का भी बड़ा केंद्र है। देश-विदेश से लोग यहां हर साल लगने वाले मेले को देखने आते हैं। 75 साल बाद गांव में काफी कुछ बदला है। गांव से पुलिस और सेना में अधिकारी से लेकर डॉक्टर व नेता तक बने हैं।
दस हजार की आबादी वाले इस गांव में दो प्राथमिक विद्यालय तथा एक जूनियर हाईस्कूल है। सड़के पक्की हैं और पथ प्रकाश व्यवस्था अच्छी है। गांव से कई संपर्क मार्ग निकलते हैं, जो हापुड़ और पिलखुवा तक जाते हैं। गांव के लिए शिक्षित हैं। यहां से एक आईपीएस के अलावा छह एमबीबीएस डॉक्टर बने हैं। सेना, पुलिस और राजनीति में गांव से लोग पहुंचे हैं। प्रत्येक चैत्र नवरात्रि में ऐतिहासिक मेला लगता है, जो सप्ताहभर चलता है। देेश-विदेश से लोग मेले में पहुंचते है।
पौराणिक है महामाया मंदिर
सीकरी खुर्द पौराणिक महामाया मंदिर है। मंदिर का इतिहास करीब साढ़े तीन सौ साल पुराना है। यह पश्चिम उत्तर प्रदेश में आस्था का बड़ा केन्द्र है। यहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है। हर रविवार को श्रद्धालुओं को तांता लगता है। ग्रामीण हरवीर सिंह का कहना है मंदिर परिसर में वट का विशालकाय वृक्ष स्वतंत्रता आंदोलन का गवाह है। यहां 1857 की क्रांति के दौरान 131 लोगों को फांसी दी गई थी। महामाया मंदिर प्रांगण में बना तहखाना क्रांतिकारियों की शरणास्थली था। गद्दारों ने इसकी मुखबिरी अंग्रेजी हुकूमत से कर दी थी। जिसके बाद तत्कालीन अंग्रेजी अफसर ने हजारों सैनिकों की फौज और कई तोपों के साथ यहां हमला किया था। इसके बाद क्षेत्र में आक्रोश की ज्वाला फूट पड़ी थी और अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
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समय के साथ गांव में बदलाव हुआ है। पहले अधिकांश कच्चे घर थे। रोजगार के भी अधिक साधन नहीं थे। आज गांव में पक्के घर हैं और युवाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में नाम किया है। महेंद्र सिंह, ग्रामीण
गांव में दो प्राथमिक विद्यालय और एक जूनियर हाईस्कूल है। इसके अलावा कई पब्लिक स्कूल भी खुल गए हैं। जिससे गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है। हरवीर सिंह, ग्रामीण
पहले सड़क नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब गांव के गली मोहल्ले पक्के बन गए हैं। मुख्य मार्ग तक आने-जाने के लिए साधन उपलब्ध हैं। कई क्षेत्रों में ग्रामीणों ने पहचान बनाई है। दीपक शर्मा, ग्रामीण
शुरू में बिजली की समस्या रही। छात्रों को पढ़ाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब गांव में 24 घंटे बिजली आती है। साथ ही पानी की भी अच्छी व्यवस्था है। युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल रहें है। धारा सिंह, पूर्व प्रधान
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मोदीनगर। ऐतिहासिक और पौराणिक सीकरी खुर्द गांव आजादी के आंदोलन का गवाह रहा है। अंग्रेजी हुकूमत से ग्रामीणों ने लोहा लिया था। 1857 की क्रांति में अंग्रेजों ने 131 लोगों को गांव में फांसी दी थी। उसके बाद क्रांति की ज्वाला धधक पड़ी। क्रांति के अलावा सीकरी खुर्द आस्था का भी बड़ा केंद्र है। देश-विदेश से लोग यहां हर साल लगने वाले मेले को देखने आते हैं। 75 साल बाद गांव में काफी कुछ बदला है। गांव से पुलिस और सेना में अधिकारी से लेकर डॉक्टर व नेता तक बने हैं।
दस हजार की आबादी वाले इस गांव में दो प्राथमिक विद्यालय तथा एक जूनियर हाईस्कूल है। सड़के पक्की हैं और पथ प्रकाश व्यवस्था अच्छी है। गांव से कई संपर्क मार्ग निकलते हैं, जो हापुड़ और पिलखुवा तक जाते हैं। गांव के लिए शिक्षित हैं। यहां से एक आईपीएस के अलावा छह एमबीबीएस डॉक्टर बने हैं। सेना, पुलिस और राजनीति में गांव से लोग पहुंचे हैं। प्रत्येक चैत्र नवरात्रि में ऐतिहासिक मेला लगता है, जो सप्ताहभर चलता है। देेश-विदेश से लोग मेले में पहुंचते है।
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पौराणिक है महामाया मंदिर
सीकरी खुर्द पौराणिक महामाया मंदिर है। मंदिर का इतिहास करीब साढ़े तीन सौ साल पुराना है। यह पश्चिम उत्तर प्रदेश में आस्था का बड़ा केन्द्र है। यहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है। हर रविवार को श्रद्धालुओं को तांता लगता है। ग्रामीण हरवीर सिंह का कहना है मंदिर परिसर में वट का विशालकाय वृक्ष स्वतंत्रता आंदोलन का गवाह है। यहां 1857 की क्रांति के दौरान 131 लोगों को फांसी दी गई थी। महामाया मंदिर प्रांगण में बना तहखाना क्रांतिकारियों की शरणास्थली था। गद्दारों ने इसकी मुखबिरी अंग्रेजी हुकूमत से कर दी थी। जिसके बाद तत्कालीन अंग्रेजी अफसर ने हजारों सैनिकों की फौज और कई तोपों के साथ यहां हमला किया था। इसके बाद क्षेत्र में आक्रोश की ज्वाला फूट पड़ी थी और अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
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समय के साथ गांव में बदलाव हुआ है। पहले अधिकांश कच्चे घर थे। रोजगार के भी अधिक साधन नहीं थे। आज गांव में पक्के घर हैं और युवाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में नाम किया है। महेंद्र सिंह, ग्रामीण
गांव में दो प्राथमिक विद्यालय और एक जूनियर हाईस्कूल है। इसके अलावा कई पब्लिक स्कूल भी खुल गए हैं। जिससे गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है। हरवीर सिंह, ग्रामीण
पहले सड़क नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब गांव के गली मोहल्ले पक्के बन गए हैं। मुख्य मार्ग तक आने-जाने के लिए साधन उपलब्ध हैं। कई क्षेत्रों में ग्रामीणों ने पहचान बनाई है। दीपक शर्मा, ग्रामीण
शुरू में बिजली की समस्या रही। छात्रों को पढ़ाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब गांव में 24 घंटे बिजली आती है। साथ ही पानी की भी अच्छी व्यवस्था है। युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल रहें है। धारा सिंह, पूर्व प्रधान