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रेलवे प्रशासन ने तीन मकानों के छज्जे तोड़े, हंगामा
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रेलवे प्रशासन ने तीन मकानों के छज्जे तोड़े, हंगामा
मुरादनगर। रेलवे प्रशासन ने शनिवार को राधेश्याम विहार फेस-5 में आरपीएफ और स्थानीय पुलिस की मदद से तीन मकानों के छज्जे जेसीबी से तोड़ दिए। इनमें एक मकान सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता का भी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण कर रखा था। कार्रवाई के दौरान लोगों ने जमकर हंगामा भी किया।
रेलवे प्रशासन से जेई, मोदीनगर आरपीएफ रेलवे स्टेशन चौकी प्रभारी नेपाल सिंह शनिवार को स्थानीय पुलिस फोर्स के साथ हिसाली में बने रेलवे यार्ड के पास पहुंचे। चौकी प्रभारी नेपाल सिंह ने बताया कि रेलवे विभाग के जेई आए और राधेश्याम विहार कॉलोनी फेस पंाच में रहने वाले तीन मकानों के छज्जे तोड़ने को कहा। रेलवे के जई ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता नीलम ओझा, राजेंद्र व अजय के मकान के छज्जे रेलवे की जमीन के ऊपर बने थे, जिन्हें तोड़ दिया गया। बार-बार नोटिस देने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता नीलम ओझा का कहना है कि हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया, बिना नोटिस के हमारे घरों के छज्जे तोड़ दिए गए।
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मुरादनगर। रेलवे प्रशासन ने शनिवार को राधेश्याम विहार फेस-5 में आरपीएफ और स्थानीय पुलिस की मदद से तीन मकानों के छज्जे जेसीबी से तोड़ दिए। इनमें एक मकान सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता का भी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण कर रखा था। कार्रवाई के दौरान लोगों ने जमकर हंगामा भी किया।
रेलवे प्रशासन से जेई, मोदीनगर आरपीएफ रेलवे स्टेशन चौकी प्रभारी नेपाल सिंह शनिवार को स्थानीय पुलिस फोर्स के साथ हिसाली में बने रेलवे यार्ड के पास पहुंचे। चौकी प्रभारी नेपाल सिंह ने बताया कि रेलवे विभाग के जेई आए और राधेश्याम विहार कॉलोनी फेस पंाच में रहने वाले तीन मकानों के छज्जे तोड़ने को कहा। रेलवे के जई ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता नीलम ओझा, राजेंद्र व अजय के मकान के छज्जे रेलवे की जमीन के ऊपर बने थे, जिन्हें तोड़ दिया गया। बार-बार नोटिस देने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता नीलम ओझा का कहना है कि हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया, बिना नोटिस के हमारे घरों के छज्जे तोड़ दिए गए।
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