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एमबीबीएस में दाखिले दिलाने के नाम पर 28 लाख रुपये ठगे
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एमबीबीएस में दाखिले दिलाने के नाम पर 28 लाख रुपये ठगे
मोदीनगर। रिटायर्ड बीएसएफ कर्मी से उसकी बेटी का एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने के नाम पर 28.02 लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया है। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने धोखाधड़ी की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
नगर के सौंदा रोड स्थित एक कॉलोनी निवासी सुभाष तेवतिया बीएसएफ से रिटायर्ड है। उन्होंने बताया पुत्री अंशु राजस्थान के कोटा स्थित कोचिंग सेंटर से नीट की तैयारी कर रही थी। वहां एक साइबर कैफे संचालक प्रवेश से अंशु की जान पहचान हो गई। प्रवेश ने अंशु को झांसा दिया कि वह सरकारी कॉलेज में एडमिशन कराता है। अंशु उसकी की बातों में आ गई। अंशु ने अपने पिता सुभाष तेवतिया को इसके बारे में बताया। अंशु के कोटा से लौटने के बाद प्रवेश अंशु और सुभाष तेवतिया के संपर्क में बना रहा। इसी बीच अंशु का बीडीएस के लिए चयन हो गया। जानकारी लगने पर प्रवेश ने अंशु को बीडीएस में एडमिशन लेने से मना करते हुए दावा किया कि वह उसका एडमिशन कोलकाता के सरकारी कॉलेज में एमबीबीएस में कराएगा। प्रवेश ने पिता-पुत्री को एडमिशन के लिए 32 लाख रूपये की व्यवस्था करने के लिए कहा। दोनों को विश्वास दिलाने के लिए प्रवेश ने अपने एक साथी उदय मिश्रा को एक बच्चे का कथित अभिभावक बनाकर सुभाष तेवतिया से मुलाकात करा दी। उदय मिश्रा से मुलाकात के बाद सुभाष को उन पर भरोसा हो गया। इसके बाद सुभाष ने कुल 28.2 लाख रुपये उन्हें दे दिए। आरोपियों ने मार्च में दोनों को कोलकाता बुलाकर अंशु का नाम वहां के सरकारी कॉलेज की लिस्ट में दिखा दिया। मगर अंशु का एमबीबीएस में एडमिशन नहीं हुआ। इसके बाद सुभाष को ठगी का एहसास हो गया। थाना प्रभारी निरीक्षक अनीता चौहान के कहना है कि तहरीर के आधार प्रवेश, बोरामासी चटर्जी तथा उदय मिश्रा के खिलाफ धोखाधड़ी आदि की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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मोदीनगर। रिटायर्ड बीएसएफ कर्मी से उसकी बेटी का एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने के नाम पर 28.02 लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया है। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने धोखाधड़ी की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
नगर के सौंदा रोड स्थित एक कॉलोनी निवासी सुभाष तेवतिया बीएसएफ से रिटायर्ड है। उन्होंने बताया पुत्री अंशु राजस्थान के कोटा स्थित कोचिंग सेंटर से नीट की तैयारी कर रही थी। वहां एक साइबर कैफे संचालक प्रवेश से अंशु की जान पहचान हो गई। प्रवेश ने अंशु को झांसा दिया कि वह सरकारी कॉलेज में एडमिशन कराता है। अंशु उसकी की बातों में आ गई। अंशु ने अपने पिता सुभाष तेवतिया को इसके बारे में बताया। अंशु के कोटा से लौटने के बाद प्रवेश अंशु और सुभाष तेवतिया के संपर्क में बना रहा। इसी बीच अंशु का बीडीएस के लिए चयन हो गया। जानकारी लगने पर प्रवेश ने अंशु को बीडीएस में एडमिशन लेने से मना करते हुए दावा किया कि वह उसका एडमिशन कोलकाता के सरकारी कॉलेज में एमबीबीएस में कराएगा। प्रवेश ने पिता-पुत्री को एडमिशन के लिए 32 लाख रूपये की व्यवस्था करने के लिए कहा। दोनों को विश्वास दिलाने के लिए प्रवेश ने अपने एक साथी उदय मिश्रा को एक बच्चे का कथित अभिभावक बनाकर सुभाष तेवतिया से मुलाकात करा दी। उदय मिश्रा से मुलाकात के बाद सुभाष को उन पर भरोसा हो गया। इसके बाद सुभाष ने कुल 28.2 लाख रुपये उन्हें दे दिए। आरोपियों ने मार्च में दोनों को कोलकाता बुलाकर अंशु का नाम वहां के सरकारी कॉलेज की लिस्ट में दिखा दिया। मगर अंशु का एमबीबीएस में एडमिशन नहीं हुआ। इसके बाद सुभाष को ठगी का एहसास हो गया। थाना प्रभारी निरीक्षक अनीता चौहान के कहना है कि तहरीर के आधार प्रवेश, बोरामासी चटर्जी तथा उदय मिश्रा के खिलाफ धोखाधड़ी आदि की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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