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गर्भवतियों को नहीं मिल रहा आयुष्मान का 'आशीर्वाद'
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मेरठ। आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है। पिछले 10 माह में महिला जिला अस्पताल में 3054 प्रसव हुए हैं, इनमें से सिर्फ 46 महिलाओं की ही आयुष्मान के तहत डिलीवरी हुई है। मैरिज सर्टिफिकेट न होना और जागरूकता का अभाव होने के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
गर्भवती महिलाओं के लिए शुरू हुई यह योजना नियमों के फेर में उलझी है। योजना में उन्हीं महिलाओं को शामिल गया है, जिनका नाम साल 2011 की आर्थिक जनगणना में शामिल था। 2011 के बाद जिन महिलाओं की शादी हुई है, उन्हें इसका लाभ नहीं मिला पा रहा है। डिलीवरी के समय उनका नाम आयुष्मान लाभार्थियों की सूची में मिलता ही नहीं है। वहीं दूसरी ओर जननी सुरक्षा योजना के तहत देहात से आई महिलाओं को डिलीवरी कराने पर 1400 रुपये और शहर की महिला को एक हजार रुपये मिलते हैं, जबकि आयुष्मान के तहत उन्हें यह लाभ मिलेगा या नहीं, इसे लेकर भ्रम की स्थिति है। ऐसे में कई महिलाएं आयुष्मान के तहत डिलीवरी कराने से मना कर देती हैं।
एसीएमओ डॉ. पूजा शर्मा ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत जिन महिलाओं का नाम नहीं हैं, उन्हें शामिल होने लिए मैरिज सर्टिफिकेट मांगा जाता है, लेकिन वह डिलीवरी के चलते इसे बनवा नहीं पाते हैं। ऐसे में योजना का लाभ लेने से महरूम रह जाते हैं। महिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. मनीषा अग्रवाल ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत भी अगर महिलाएं डिलीवरी कराती हैं तो भी उन्हें जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिलेगा। महिलाओं में पैसे नहीं मिलने के भ्रम को दूर किया जाएगा।
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मुख्य बिंदु
मेरठ में आयुष्मान योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी।
मेरठ जिले में दो लाख पांच हजार 70 परिवार चिह्नित किए गए हैं।
83 हजार 70 परिवार देहात और 1.22 लाख परिवार शहरी क्षेत्र के हैं।
2011 की आर्थिक गणना की सूची के आधार पर इसे तैयार किया है।
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गर्भवती महिलाओं के लिए शुरू हुई यह योजना नियमों के फेर में उलझी है। योजना में उन्हीं महिलाओं को शामिल गया है, जिनका नाम साल 2011 की आर्थिक जनगणना में शामिल था। 2011 के बाद जिन महिलाओं की शादी हुई है, उन्हें इसका लाभ नहीं मिला पा रहा है। डिलीवरी के समय उनका नाम आयुष्मान लाभार्थियों की सूची में मिलता ही नहीं है। वहीं दूसरी ओर जननी सुरक्षा योजना के तहत देहात से आई महिलाओं को डिलीवरी कराने पर 1400 रुपये और शहर की महिला को एक हजार रुपये मिलते हैं, जबकि आयुष्मान के तहत उन्हें यह लाभ मिलेगा या नहीं, इसे लेकर भ्रम की स्थिति है। ऐसे में कई महिलाएं आयुष्मान के तहत डिलीवरी कराने से मना कर देती हैं।
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एसीएमओ डॉ. पूजा शर्मा ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत जिन महिलाओं का नाम नहीं हैं, उन्हें शामिल होने लिए मैरिज सर्टिफिकेट मांगा जाता है, लेकिन वह डिलीवरी के चलते इसे बनवा नहीं पाते हैं। ऐसे में योजना का लाभ लेने से महरूम रह जाते हैं। महिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. मनीषा अग्रवाल ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत भी अगर महिलाएं डिलीवरी कराती हैं तो भी उन्हें जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिलेगा। महिलाओं में पैसे नहीं मिलने के भ्रम को दूर किया जाएगा।
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मेरठ में आयुष्मान योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी।
मेरठ जिले में दो लाख पांच हजार 70 परिवार चिह्नित किए गए हैं।
83 हजार 70 परिवार देहात और 1.22 लाख परिवार शहरी क्षेत्र के हैं।
2011 की आर्थिक गणना की सूची के आधार पर इसे तैयार किया है।