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Meerut News: फिर उफनाई गंगा, ग्रामीण चिंतित
Wed, 26 Jul 2023 02:00 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 26 Jul 2023 02:00 AM IST
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हस्तिनापुर। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से गंगा के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है। जिससे खादर क्षेत्र के लोगों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। अभी भी कई गांव के संपर्क मार्ग पर बाढ़ का पानी भरा होने से आवागमन सुचारू नहीं हुआ है। कई गांव के चारों ओर पानी भरा हुआ है जिससे ग्रामीणों को बाढ़ का खतरा सता रहा है।
बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार के अनुसार सोमवार की शाम को गंगा का जलस्तर 2 लाख क्यूसेक के ऊपर पहुंच गया। जिससे खादर क्षेत्र के लोगों की चिंताएं बढ़ गई। उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम चार बजे तक गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई जो 1 लाख 38 हजार क्यूसेक पर चल रहा है। एक बार फिर जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की चिंताए बढ़ गई है। फसलें जलमग्न होकर नष्ट हो चुकी है। टूटे तटबंध से निकल रहा पानी लगातार खादर क्षेत्र की फसलों को नष्ट कर रहा है क्योंकि जंगलों में गंगा का पानी कम होता दिखाई नहीं दे रहा है।
बाढ़ ने किसानों को किया प्रभावित
बाढ़ ने खादर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को ऐसे जख्म दिए हैं जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल सकते। किसान अमरीश कुमार ने बताया कि फतेहपुर प्रेम के जंगल में 5 एकड़ भूमि दो लाख रुपये के ठेके पर ली थी। पहले गेहूं की फसल बोई जो बे मौसम बरसात के कारण नष्ट हो गई जिस का एक रुपया भी मुआवजा अभी तक नहीं मिला। उसके बाद मक्का की फसल बोई खेत में बंपर फसल खड़ी थी उम्मीद थी कि महंगे दामों पर बिक रहा चारे को बेचकर कुछ घाटे को पूरा किया जाएगा। परंतु जब फसल काटने का समय आया तो बाढ़ आ गई और पूरी फसल बर्बाद हो गई।
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चारे के अभाव में पशु बेचने लगे किसान
खादर क्षेत्र में आई बाढ़ ने किसानों को कई वर्ष पीछे हटा दिया है। खादर क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस बाढ़ ने उनके खेतों में खड़ी चारे की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। चारे का कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है जिस कारण उन्होंने पशुओं को बेचना शुरू कर दिया है।
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बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार के अनुसार सोमवार की शाम को गंगा का जलस्तर 2 लाख क्यूसेक के ऊपर पहुंच गया। जिससे खादर क्षेत्र के लोगों की चिंताएं बढ़ गई। उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम चार बजे तक गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई जो 1 लाख 38 हजार क्यूसेक पर चल रहा है। एक बार फिर जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की चिंताए बढ़ गई है। फसलें जलमग्न होकर नष्ट हो चुकी है। टूटे तटबंध से निकल रहा पानी लगातार खादर क्षेत्र की फसलों को नष्ट कर रहा है क्योंकि जंगलों में गंगा का पानी कम होता दिखाई नहीं दे रहा है।
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बाढ़ ने किसानों को किया प्रभावित
बाढ़ ने खादर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को ऐसे जख्म दिए हैं जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल सकते। किसान अमरीश कुमार ने बताया कि फतेहपुर प्रेम के जंगल में 5 एकड़ भूमि दो लाख रुपये के ठेके पर ली थी। पहले गेहूं की फसल बोई जो बे मौसम बरसात के कारण नष्ट हो गई जिस का एक रुपया भी मुआवजा अभी तक नहीं मिला। उसके बाद मक्का की फसल बोई खेत में बंपर फसल खड़ी थी उम्मीद थी कि महंगे दामों पर बिक रहा चारे को बेचकर कुछ घाटे को पूरा किया जाएगा। परंतु जब फसल काटने का समय आया तो बाढ़ आ गई और पूरी फसल बर्बाद हो गई।
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चारे के अभाव में पशु बेचने लगे किसान
खादर क्षेत्र में आई बाढ़ ने किसानों को कई वर्ष पीछे हटा दिया है। खादर क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस बाढ़ ने उनके खेतों में खड़ी चारे की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। चारे का कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है जिस कारण उन्होंने पशुओं को बेचना शुरू कर दिया है।