{"_id":"635a3aadeeba9c220938d351","slug":"ganga-snaan-2022-this-time-the-devotees-will-not-be-able-to-go-with-buffalo-buggy-in-ganga-fair-due-to-lumpy","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ganga Snan 2022: इस बार गंगा मेले में भैंसा बुग्गी से नहीं जा पाएंगे श्रद्धालु, इस कारण लिया गया निर्णय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ganga Snan 2022: इस बार गंगा मेले में भैंसा बुग्गी से नहीं जा पाएंगे श्रद्धालु, इस कारण लिया गया निर्णय
Thu, 27 Oct 2022 01:40 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Thu, 27 Oct 2022 01:40 PM IST
सार
गंगा मेले में इस बार श्रद्धालु भैंसा बुग्गी से नहीं जा पाएंगे। पशुओं में लंपी बीमारी के कारण यह निर्णय लिया गया है।
विज्ञापन
गंगा में स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु- file photo
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गंगा मेले में इस बार श्रद्धालु भैंसा बुग्गी से नहीं जा पाएंगे। पशुओं में लंपी बीमारी के कारण यह निर्णय लिया गया है। मेरठ के गढमुक्तेश्वर में कार्तिक पूर्णिमा मेले मे जिलाधिकारी हापुड़ द्वारा भेजे गए पत्र के संबंध में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि हापुड़ सहित अन्य सभी जनपदो में गौवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं में घातक वायरल बीमारी लम्पी स्किन डिजीज का प्रकोप फैला हुआ है।
विज्ञापन
इस बीमारी में पशुओं की त्वचा पर गांठनुमा फफोले व घांव हो जाते हैं। पशु को तेज बुखार बना रहता है एवं पशु चारा खाना बंद कर देता है। गामिन पशुओं में गर्भपात हो जाता है तथा पशु बांझपन के शिकार हो जाते हैं। बीमारी 3 से 6 सप्ताह तक बनी रहती है तथा ईलाज के बाद पूर्ण स्वस्थ होने में 3 से 4 माह का समय लगता है।
विज्ञापन
यह बीमारी गाय-भैंसो के साथ-साथ घोडे, गधे, खच्चर, ऊंट एवं हिरन प्रजाति के पशुओं को सर्वाधिक प्रभावित करती है। मेले प्रदर्शनी में पशुओं के एक स्थान पर एकत्र होने से लक्षणविहीन किन्तु रोग के वाहक पशुओं के द्वारा यह बीमारी अन्य सभी संपर्क में आने वाले पशुओं में घातक रूप से प्रबल संभावना है।
विज्ञापन
29 अक्तूबर से मेले का आयोजन
29 अक्तूबर से गढमुक्तेश्वर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा के किनारे राजकीय स्नान मेले का आयोजन किया जाना है। पर्व में उक्त गंगा स्नान मेले के साथ-साथ मेले में अश्व प्रदर्शनी-अश्व विपणन का कार्य भी होता रहा है।
ऐसे में मेले में अश्व प्रदर्शनी-विपणन मेले के आयोजन पर रोक लगायी गई है। ऐसे में श्रद्धालुओं से अपील कि है कि वे गंगा स्नान मेले में किसी भी घोड़े, गधे, खच्चर, गाय, बैल व भैंस को न ले जाएं एवं किसी भी प्रकार की पशु प्रदर्शनी का आयोजन न कराएं।