{"_id":"6aae950aadbdbbae2a04f665","slug":"ganesha-won-the-divine-modak-by-circumambulating-his-parents-meerut-news-c-228-1-mwn1001-105496-2026-09-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: माता-पिता की परिक्रमा कर गणेश ने जीता दिव्य मोदक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: माता-पिता की परिक्रमा कर गणेश ने जीता दिव्य मोदक
विज्ञापन
- रामलीला मैदान में कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। रामलीला मैदान में भारतीय पांडव सेना के तत्वावधान में चल रहे गणेश चतुर्थी महोत्सव में शनिवार को विघ्नहर्ता गणपति की महिमा का वर्णन किया गया। कथा पंडाल में धार्मिक कथा के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।
भारतीय पांडव सेना के निदेशक रणधीर नाथ उपाध्याय ने बताया कि गणपति बप्पा की अनवरत पूजा से भक्तों के जीवन में आने वाले संकट और बाधाएं दूर होती हैं। भगवान गणेश भक्तों को ज्ञान, बुद्धि और सिद्धि प्रदान करते हैं तथा जीवन के प्रत्येक मोड़ पर सही निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने भगवान गणेश और कार्तिकेय से जुड़ी मोदक की कथा सुनाते हुए बताया कि एक बार माता पार्वती को देवताओं ने अमृत से तैयार दिव्य मोदक दिया। मोदक देखकर गणेश और कार्तिकेय उसे पाने के लिए उत्सुक हो गए। माता ने कहा कि जो धर्माचरण के साथ सबसे पहले सभी तीर्थों का भ्रमण कर लौटेगा, मोदक उसे दिया जाएगा।
विज्ञापन
कार्तिकेय मयूर पर सवार होकर तीर्थ भ्रमण के लिए निकल गए। वहीं गणेशजी ने अपने वाहन मूषक की गति को देखते हुए माता-पिता की श्रद्धापूर्वक परिक्रमा की और उनके सामने खड़े हो गए। माता पार्वती ने गणेश की भक्ति को श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि माता-पिता की पूजा और परिक्रमा का महत्व सभी तीर्थों, यज्ञ, व्रत और साधनाओं से बढ़कर है। उन्होंने दिव्य मोदक गणेशजी को प्रदान किया और उन्हें प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष ओमवीर भड़ाना, उपाध्यक्ष अनीता उपाध्याय, शुभम, रोहिणी और नरेश बत्रा आदि का सहयोग रहा।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। रामलीला मैदान में भारतीय पांडव सेना के तत्वावधान में चल रहे गणेश चतुर्थी महोत्सव में शनिवार को विघ्नहर्ता गणपति की महिमा का वर्णन किया गया। कथा पंडाल में धार्मिक कथा के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।
भारतीय पांडव सेना के निदेशक रणधीर नाथ उपाध्याय ने बताया कि गणपति बप्पा की अनवरत पूजा से भक्तों के जीवन में आने वाले संकट और बाधाएं दूर होती हैं। भगवान गणेश भक्तों को ज्ञान, बुद्धि और सिद्धि प्रदान करते हैं तथा जीवन के प्रत्येक मोड़ पर सही निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने भगवान गणेश और कार्तिकेय से जुड़ी मोदक की कथा सुनाते हुए बताया कि एक बार माता पार्वती को देवताओं ने अमृत से तैयार दिव्य मोदक दिया। मोदक देखकर गणेश और कार्तिकेय उसे पाने के लिए उत्सुक हो गए। माता ने कहा कि जो धर्माचरण के साथ सबसे पहले सभी तीर्थों का भ्रमण कर लौटेगा, मोदक उसे दिया जाएगा।
विज्ञापन
कार्तिकेय मयूर पर सवार होकर तीर्थ भ्रमण के लिए निकल गए। वहीं गणेशजी ने अपने वाहन मूषक की गति को देखते हुए माता-पिता की श्रद्धापूर्वक परिक्रमा की और उनके सामने खड़े हो गए। माता पार्वती ने गणेश की भक्ति को श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि माता-पिता की पूजा और परिक्रमा का महत्व सभी तीर्थों, यज्ञ, व्रत और साधनाओं से बढ़कर है। उन्होंने दिव्य मोदक गणेशजी को प्रदान किया और उन्हें प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष ओमवीर भड़ाना, उपाध्यक्ष अनीता उपाध्याय, शुभम, रोहिणी और नरेश बत्रा आदि का सहयोग रहा।