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गणेश महोत्सव : श्रद्धालुओं को बताई दूर्वा से लेकर मूषक वाहन तक की महिमा
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रामलीला मैदान में चल रहे गणेश चतुर्थी महोत्सव में शामिल श्रद्धालु स्रोत संवाद
सांस्कृतिक कार्यक्रम में भजनों पर झूमे श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। भारतीय पांडव सेना के तत्वावधान में कस्बे के रामलीला मैदान में चल रहे गणेश चतुर्थी महोत्सव में बृहस्पतिवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गणपति बप्पा की आरती से हुई। श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर धर्मलाभ अर्जित किया।
पंडित सतीश चंद्र मौर्य ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। भारतीय पांडव सेना के निदेशक रणधीर नाथ उपाध्याय ने भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गणेशजी की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व है। उन्होंने अगलासुर राक्षस की कथा सुनाते हुए बताया कि गणेशजी द्वारा उसका अंत करने के बाद उनके पेट की जलन शांत करने के लिए कश्यप ऋषि ने उन्हें दूर्वा अर्पित की थी। तभी से गणेश पूजा में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा मानी जाती है।
उन्होंने बताया कि गणेशजी का वाहन मूषक है। मान्यता के अनुसार एक राक्षस को गणेशजी ने मूषक का रूप दिया और बाद में उसे अपना वाहन बना लिया। उन्होंने गणेशजी को लाल और सिंदूरी रंग प्रिय बताते हुए पूजा में लाल फूल अर्पित करने का महत्व भी बताया। साथ ही कहा कि गृहस्थ जीवन को सुखमय बनाने के लिए गणेशजी की आराधना की जाती है।
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विभिन्न स्थानों से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। गणेशजी के भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे और नृत्य किया। कार्यक्रम में अध्यक्ष ओमबीर भड़ाना, अनीता उपाध्याय, शुभम, रोहिणी, नरेश बत्रा आदि का सहयोग रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। भारतीय पांडव सेना के तत्वावधान में कस्बे के रामलीला मैदान में चल रहे गणेश चतुर्थी महोत्सव में बृहस्पतिवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गणपति बप्पा की आरती से हुई। श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर धर्मलाभ अर्जित किया।
पंडित सतीश चंद्र मौर्य ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। भारतीय पांडव सेना के निदेशक रणधीर नाथ उपाध्याय ने भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गणेशजी की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व है। उन्होंने अगलासुर राक्षस की कथा सुनाते हुए बताया कि गणेशजी द्वारा उसका अंत करने के बाद उनके पेट की जलन शांत करने के लिए कश्यप ऋषि ने उन्हें दूर्वा अर्पित की थी। तभी से गणेश पूजा में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा मानी जाती है।
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उन्होंने बताया कि गणेशजी का वाहन मूषक है। मान्यता के अनुसार एक राक्षस को गणेशजी ने मूषक का रूप दिया और बाद में उसे अपना वाहन बना लिया। उन्होंने गणेशजी को लाल और सिंदूरी रंग प्रिय बताते हुए पूजा में लाल फूल अर्पित करने का महत्व भी बताया। साथ ही कहा कि गृहस्थ जीवन को सुखमय बनाने के लिए गणेशजी की आराधना की जाती है।
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विभिन्न स्थानों से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। गणेशजी के भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे और नृत्य किया। कार्यक्रम में अध्यक्ष ओमबीर भड़ाना, अनीता उपाध्याय, शुभम, रोहिणी, नरेश बत्रा आदि का सहयोग रहा।

रामलीला मैदान में चल रहे गणेश चतुर्थी महोत्सव में शामिल श्रद्धालु स्रोत संवाद