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रवि को दांवपेंच सिखाकर पूरा किया ओलंपिक पदक का सपना
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कोच जगमेंद्र (बाएं) और राजीव तोमर (दाए) के साथ भारतीय पहलवान रवि दहिया।
- फोटो : amar ujala
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रवि को दांवपेंच सिखाकर पूरा किया ओलंपिक पदक का सपना
टोक्यो ओलंपिक में पहलवानों को चीफ कोच जगमेंद्र सिंह और राजीव के अनुभवों का मिल रहा फायदा
कुश्ती में फाइनल में पहुंचे और स्वर्ण पदक पर नजरें गढ़ाए पहलवान रवि दहिया ने कोच जगमेंद्र व राजीव की खूब की तारीफ
मुजफ्फरनगर के रहने वाले है कोच जगमेंद्र तो बागपत के राजीव तोमर, पहलवानों को रूस में सिखाए दांवपेंच से पदक तक पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती के फाइनल में पहुंचकर देश के लिए सवर्ण या रजत, शीर्ष दो पदकों में से एक पक्का करने वाले रवि दहिया की इस जीत में मुजफ्फरनगर के रहने वाले चीफ कोच जगमेंद्र सिंह व बागपत के रहने वाले कोच राजीव तोमर का योगदान भी कम नहीं है। पहलवानों के साथ गए ओलंपिक में दोनों कोच खुद भी ओलंपियन रह चुके हैं, अपने अनुभवों के साथ ही पहलवानों को पदक जीतने के लिए हर बेहतर दांवपेंच सिखाया है, ओलंपिक पदक जीतने का उनका जो सपना अधूरा रह गया था, वह पूरा हो सके। पहलवान रवि दहिया खुद भी मानते है कि ओलंपिक से ठीक पहले कोच ने जहां उसको दांवपेंच सिखाए है, वहीं उनको मानसिक रूप से मजबूत भी किया है, जो उनके फाइनल तक पहुंचने के सफल में मददगार रहे।
मुजफ्फरनगर के रहने वाले जगमेंद्र सिंह ने वर्ष 1984 के ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था तो बागपत के मलकपुर गांव के रहने वाले राजीव तोमर वर्ष 2008 में बीजिंग ओलंपिक में देश के लिए खेलने उतरे थे। यह दोनों ही देश के लिए मेडल जीतने का सपना लेकर खेलने गए थे, लेकिन उनका वह सपना अधूरा रह गया था। जिसके बाद दोनों ने देश को ओलंपिक में मेडल दिलाने का सपना पूरा करने के लिए कोच बनकर पहलवानों को दांवपेंच सिखाने शुरू किए। जगमेंद्र सिंह वर्ष 2004 से नेशनल कोच है तो राजीव तोमर भी करीब छह साल से नेशनल कोच है और यह दोनों देश के लिए मेडल जीतने को पहलवानों को दांवपेंच सिखा रहे है। इनका अधूरा सपना अब लंबे समय बाद पहलवान रवि दहिया ने 57 किलो के फाइनल में जगह बनाकर देश के लिए मेडल पक्का करके पूरा किया है। (संवाद)
कोच ने प्रैक्टिस कराई तो मानसिक रूप से मजबूत बनाया, देश के लिए जीतना है सोना: रवि दहिया
कुश्ती के फाइनल में पहुंचकर पहलवान रवि दहिया ने देश के लिए रजत पदक तो पक्का कर लिया है, लेकिन उनकी प्राथमिकता और तैयारी सवर्ण पदक है। रवि दहिया ने फोन पर हुई बातचीत में कहा कि उनकी इस जीत में कोच का उतना ही सहयोग है, जितना उसके परिवार व अखाड़े के कोच का सहयोग है। रवि के अनुसार ओलंपिक से पहले रशिया में लगे कैंप में कोच जगमेंद्र व राजीव तोमर ने उसकी सभी कमजोरियों को दूर कराया तो उसे मानसिक रूप से मजबूत भी बनाया। उसे समझाया गया कि जिन देशों के पहलवानों से उसे लड़ना है, उन देशों के पहलवानों को वह पहले हरा चुका है। इसलिए उसकी जगह विपक्षी पहलवानों पर मानसिक रूप से दबाव रहेगा और वह खुलकर अपना खेल खेले। रवि का कहना है कि वह देश के लिए सोना जरूर जीतेगा।
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देश को मेडल दिलवाने का सपना लेकर आए थे टोक्यो: राजीव तोमर
भारतीय कुश्ती टीम के ओलंपिक में कोच राजीव तोमर ने कहा कि वह खुद भी ओलंपिक खेल चुके हैं, लेकिन देश को मेडल दिलाने का सपना पूरा नहीं हो सका था। वह सपना अब पहलवान रवि दहिया के सहारे पूरा हो रहा है। हमें उम्मीद थी कि हमारी ट्रेनिंग खराब नहीं जाएगी और पहलवान देश के लिए मेडल जीतेंगे। अभी केवल रवि का पदक पक्का हुआ है और बजरंग पूनिया भी पदक के बड़े दावेदार है। वह भी देश के लिए मेडल जीतेगा।
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टोक्यो ओलंपिक में पहलवानों को चीफ कोच जगमेंद्र सिंह और राजीव के अनुभवों का मिल रहा फायदा
कुश्ती में फाइनल में पहुंचे और स्वर्ण पदक पर नजरें गढ़ाए पहलवान रवि दहिया ने कोच जगमेंद्र व राजीव की खूब की तारीफ
मुजफ्फरनगर के रहने वाले है कोच जगमेंद्र तो बागपत के राजीव तोमर, पहलवानों को रूस में सिखाए दांवपेंच से पदक तक पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती के फाइनल में पहुंचकर देश के लिए सवर्ण या रजत, शीर्ष दो पदकों में से एक पक्का करने वाले रवि दहिया की इस जीत में मुजफ्फरनगर के रहने वाले चीफ कोच जगमेंद्र सिंह व बागपत के रहने वाले कोच राजीव तोमर का योगदान भी कम नहीं है। पहलवानों के साथ गए ओलंपिक में दोनों कोच खुद भी ओलंपियन रह चुके हैं, अपने अनुभवों के साथ ही पहलवानों को पदक जीतने के लिए हर बेहतर दांवपेंच सिखाया है, ओलंपिक पदक जीतने का उनका जो सपना अधूरा रह गया था, वह पूरा हो सके। पहलवान रवि दहिया खुद भी मानते है कि ओलंपिक से ठीक पहले कोच ने जहां उसको दांवपेंच सिखाए है, वहीं उनको मानसिक रूप से मजबूत भी किया है, जो उनके फाइनल तक पहुंचने के सफल में मददगार रहे।
मुजफ्फरनगर के रहने वाले जगमेंद्र सिंह ने वर्ष 1984 के ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था तो बागपत के मलकपुर गांव के रहने वाले राजीव तोमर वर्ष 2008 में बीजिंग ओलंपिक में देश के लिए खेलने उतरे थे। यह दोनों ही देश के लिए मेडल जीतने का सपना लेकर खेलने गए थे, लेकिन उनका वह सपना अधूरा रह गया था। जिसके बाद दोनों ने देश को ओलंपिक में मेडल दिलाने का सपना पूरा करने के लिए कोच बनकर पहलवानों को दांवपेंच सिखाने शुरू किए। जगमेंद्र सिंह वर्ष 2004 से नेशनल कोच है तो राजीव तोमर भी करीब छह साल से नेशनल कोच है और यह दोनों देश के लिए मेडल जीतने को पहलवानों को दांवपेंच सिखा रहे है। इनका अधूरा सपना अब लंबे समय बाद पहलवान रवि दहिया ने 57 किलो के फाइनल में जगह बनाकर देश के लिए मेडल पक्का करके पूरा किया है। (संवाद)
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कोच ने प्रैक्टिस कराई तो मानसिक रूप से मजबूत बनाया, देश के लिए जीतना है सोना: रवि दहिया
कुश्ती के फाइनल में पहुंचकर पहलवान रवि दहिया ने देश के लिए रजत पदक तो पक्का कर लिया है, लेकिन उनकी प्राथमिकता और तैयारी सवर्ण पदक है। रवि दहिया ने फोन पर हुई बातचीत में कहा कि उनकी इस जीत में कोच का उतना ही सहयोग है, जितना उसके परिवार व अखाड़े के कोच का सहयोग है। रवि के अनुसार ओलंपिक से पहले रशिया में लगे कैंप में कोच जगमेंद्र व राजीव तोमर ने उसकी सभी कमजोरियों को दूर कराया तो उसे मानसिक रूप से मजबूत भी बनाया। उसे समझाया गया कि जिन देशों के पहलवानों से उसे लड़ना है, उन देशों के पहलवानों को वह पहले हरा चुका है। इसलिए उसकी जगह विपक्षी पहलवानों पर मानसिक रूप से दबाव रहेगा और वह खुलकर अपना खेल खेले। रवि का कहना है कि वह देश के लिए सोना जरूर जीतेगा।
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देश को मेडल दिलवाने का सपना लेकर आए थे टोक्यो: राजीव तोमर
भारतीय कुश्ती टीम के ओलंपिक में कोच राजीव तोमर ने कहा कि वह खुद भी ओलंपिक खेल चुके हैं, लेकिन देश को मेडल दिलाने का सपना पूरा नहीं हो सका था। वह सपना अब पहलवान रवि दहिया के सहारे पूरा हो रहा है। हमें उम्मीद थी कि हमारी ट्रेनिंग खराब नहीं जाएगी और पहलवान देश के लिए मेडल जीतेंगे। अभी केवल रवि का पदक पक्का हुआ है और बजरंग पूनिया भी पदक के बड़े दावेदार है। वह भी देश के लिए मेडल जीतेगा।