फर्जी बीमा पॉलिसी कर कंपनी को लगाया करोड़ों का चूना, लिपिक गिरफ्तार, प्रबंधक फरार
शहर कोतवाली पुलिस ने मरणासन्न और बीमार व्यक्तियों के परिजनों को लालच देकर फर्जी तरीके से बीमा पॉलिसी कराकर धन उगाने वाले एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के लिपिक को दबोचा है।
पुलिस को इस मामले में शामिल कंपनी के प्रबंधक की तलाश है। दोनों के खिलाफ फर्जी तरीके से 32 पॉलिसी के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि ऐसी 83 पॉलिसी कराकर करीब चार से पांच करोड़ रुपये हड़पा गया है।
एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी बिजनौर के मैनेजर नईमशाह खान ने गत 30 अप्रैल को शहर कोतवाली में शाखा के पूर्व मैनेजर संचित अग्रवाल व एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट में 32 पॉलिसी फर्जी बताई गई थीं। एसपी सिटी लक्ष्मीनिवास मिश्र ने बताया कि मामले की गहराई से विवेचना की गई तो पाया गया कि जिन 32 मरणासन्न व्यक्तियों की पॉलिसी की गई हैं उनमें सात व्यक्ति जीवित हैं।
सात लोगों का जांच के उपरांत पुलिस ने पैसा रुकवा दिया। 18 लोगों का पॉलिसी के नाम पर पैसा ले लिया गया। पुलिस ने रोडवेज बस स्टैंड के पास से एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के लिपिक गांव जैतरा निवासी तनुज भारती को दबोच लिया।
तनुज ने पुलिस को बताया कि बिजनौर में स्थित एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में लिपिक पद पर तैनाती के दौरान तत्कालीन प्रबंधक भंवर सिंह चौहान के साथ मिलकर यह फ्राड किया था।
कमीशन की रकम ने खोला सारा राज
एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को चूना लगाने वाले लिपिक तनुज भारती के बैंक खाते ने सारा राज खोल दिया। फर्जी बीमा पालिसी और कमीशन की रकम सीधे तनुज भारती के खाते में आती थी। इस रकम की वजह से ही मामला सामने आया।
एसपी सिटी लक्ष्मीनिवास मिश्र ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना शहर कोतवाली के एसएसआई नरेंद्र गौड़ को इसकी विवेचना सौंपी गई। विवेचना के दौरान सामने आया कि तनुज भारती बीमार व्यक्ति के परिजनों से तय कर लेता था कि उन्हें बीमे की आधी या उससे कम रकम चाहिए।
जहां पर सौदा तय होता था बीमार के मरने के बाद उतनी रकम ये ले लेता था। मृतक के परिजनों से ली गई रकम का किसी को पता नहीं चलता था। कमीशन की रकम का लालच उसे ले डूबा। इस रकम की वजह से वह पुलिस के जाल में फंस गया। पूरे मामले की परत खुलती गई। इस खेल में मृतक के परिजनों को भी शामिल किया जाता था। उन्हें भी रकम मिलती थी।
इस मामले में कंपनी के अल्पकाल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले देवेश को एजेंट दिखाकर उसके नाम से कोड जनरेट कर देवेश के कोड के साथ तनुज भारती अपना खाता अटैच कर 83 पॉलिसी का उनका कमीशन पांच लाख 32 हजार 362 रुपया प्राप्त किया। जिन व्यक्तियों के बीमे किए गए थे वे नॉमिनी से भी अनुचित लाभ लिया।
इस मामले में प्रमोद कुमार कांबोज का 25 लाख रुपये का बीमा किया गया। कुछ दिनों बाद ही उसकी मौत हो गई। अधिकतर पॉलिसी में भुगतान किया जा चुका है। तनुज भारती ने भंवर सिंह के साथ मिलकर जाली दस्तावेज तैयार करके फर्जी बीमे कर अनुचित लाभ लेना स्वीकार किया है। भंवर सिंह वर्तमान में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस बस्ती के प्रबंधक हैं।
32 के नहीं 83 लोगों की फर्जी तरीके से पॉलिसी
शहर कोतवाल रमेशचंद्र शर्मा ने बताया कि पुलिस की जांच में पाया गया कि तनुज भारती व भंवर सिंह चौहान ने 32 लोगों की फर्जी तरीके की फर्जी तरीके से पॉलिसी नहीं की बल्कि 83 लोगों की पॉलिसी की हैं। 83 पॉलिसी में करीब चार से पांच करोड़ रुपया हड़पा जा चुका है। पुलिस इस पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी है। 83 मामले जांच के दौरान प्रकाश में आ गए हैं। इनके तमाम सबूत भी मिल गए हैं।
पहली किस्त जमा करने के बाद हुई मौत
एसपी सिटी के मुताबिक अधिकांश पॉलिसी धारकों की मृत्यु पहली किस्त जमा करने के बाद ही हो गई। ये लोग ऐसे लोगों को तलाशते थे जो मरणासन्न स्थिति में हों, जिन्हें कैंसर व अन्य गंभीर बीमारी हों। इन लोगों की पॉलिसी की जाती थी। पॉलिसी करके ये मोटा धन उगा रहे थे।
2015 से बना रहे थे फर्जी पॉलिसी
पुलिस के मुताबिक 2015 से फर्जी पॉलिसी का यह खेल शुरू हुआ। तब से यह खेल चलता रहा। तनुज भारती व भंवर सिंह चौहान गुपचुप तरीके से इस खेल को खेल रहे थे। किसी को इसकी भनक तक नहीं थी।
देवेश के नाम पर चलता रहा सारा खेल
पुलिस ने बताया कि 2015 में देवेश नाम का एक व्यक्ति ट्रेनिंग देने के लिए बैंक में आया। पांच दिन बाद वह नौकरी छोड़कर देहरादून चला गया व दूसरी कंपनी में नौकरी कर ली। देवेश के नाम का तनुज भारती व भंवर सिंह चौहान ने खूब फायदा उठाया। उसके नाम से तनुज भारती ने कोड जनरेट कर लिया व अपना खाता भी अटैच कर लिया।
इस खाते में पैसा मंगवाते रहे। देवेश को इस बात की कतई भनक नहीं लगी। देवेश को एजेंट दिखाकर उसके नाम से ही पॉलिसी के फार्म भरे जाते रहे। कागजों में पूरा खेल देवेश के नाम पर चलता रहा। तनुज भारती कमीशन अपने खाते में डलवाता रहा। जिन लोगों की पॉलिसी की जाती थी उन्हें थोड़ा बहुत ही रुपया दे दिया जाता था। बाकी रकम ये खुद रखते थे।