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शहर की सफाई में हाजिरी का फर्जीवाड़ा
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मेरठ। शहर में सफाई धरातल से ज्यादा कागजों में हो रही है। इसका खुलासा सोमवार को अपर नगरायुक्त श्रद्धा शांडिल्यायन ने एक ही वार्ड के निरीक्षण से कर दिया। कागजों में 54 सफाई कर्मियों की हाजिरी लगी थी जबकि मौके पर केवल सात कर्मचारी सफाई करते मिले। बाकी 47 सफाई कर्मी कहां थे, इसको लेकर अपर नगरायुक्त ने सफाई इंस्पेक्टर और नायक से जवाब तलब कर लिया है।
शहर में कैसी सफाई हो रही है, इसकी पोल नगर निगम प्रशासन की निरीक्षण रिपोर्ट में खुलनी शुरू हो गयी है। 90-95 प्रतिशत सफाई कर्मियों द्वारा बायोमेट्रिक हाजिरी लगाने के दावों के विपरीत मौके पर काम करने वालों की संख्या बेहद कम मिल रही है। शहर में गंदगी को लेकर पार्षद ही नहीं बल्कि जनता भी अनेकों बार हंगामा कर चुकी है। लेकिन नगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट से जनता की आवाज दबाते रहे हैं। अपर नगरायुक्त श्रद्धा शांडिल्यायन सोमवार को वार्ड 67 के कैलाशपुरी, राजेंद्र नगर आदि इलाकों में स्वच्छता का निरीक्षण करने पहुंचीं। सूचना पाकर पार्षद राकेश शर्मा भी मौके पर पहुंच गए।
अपर नगरायुक्त ने गली मोहल्लों का पैदल निरीक्षण किया। सफाई कर्मियों की बायोमेट्रिक हाजिरी जांची गई तो सामने आया कि वार्ड में 54 स्वच्छता मित्र तैनात हैं। सभी की बायोमेट्रिक हाजिरी भी लगी थी। लेकिन सुबह 10:15 बजे वार्ड में केवल सात स्वच्छता मित्र काम करते मिले। सभी नालियां सिल्ट से भरी थीं तो सड़कों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे मिले। कैलाशपुरी के बाजार में दुकानों के सामने भी गंदगी पड़ी थी। वहीं से सफाई नायक ईश्वर दयाल को कॉल की गई। लेकिन वह रिसीव नहीं हुई। अपर नगरायुक्त का कहना है कि स्वच्छता मित्र निर्धारित समय से पहले ही क्षेत्र से चले जाते हैं। जबकि प्रत्येक स्वच्छता मित्र को दोपहर दो बजे तक कार्य करना है। वार्ड में गंदगी मिलना और स्वच्छता मित्रों का काम पर न मिलना दर्शाता है कि काम में लापरवाही की जा रही है। जिससे नगर निगम की छवि खराब हो रही है। सफाई इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार से जवाब तलब किया गया है।
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सभी वार्डों में गंदगी के अंबार
यह स्थिति किसी एक वार्ड की नहीं है। सभी वार्डों में गंदगी के अंबार हैं। इसके लिए नगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिम्मेदार हैं। हमारे वार्ड में 18 सफाई कर्मचारी हैं, जिनमें से रोजाना 10-12 ही आते हैं। -गफ्फार अहमद, पार्षद वार्ड 73
अधिकारी नहीं चाहते सफाई
बोर्ड बैठक में सभी वार्डों में बराबर-बराबर सफाई करने का प्रस्ताव पास हुआ था, जिस पर निगम अधिकारियों ने अभी तक अमल नहीं किया है। अधिकारी शहर की सफाई नहीं चाहते हैं। हमारे वार्ड में 17 कर्मचारी हैं। - महेंद्र भारती, पार्षद वार्ड सात
कोई अधिकारी नहीं आता
वार्ड में गंदगी के अंबार हैं। सफाई हो रही है या नहीं इसकी जानकारी लेने कोई अधिकारी नहीं आता है। सफाई कर्मचारी आते तो हैं लेकिन हाजिरी के बाद कब चले जाते हैं कुछ पता नहीं चलता। -सलीम मलिक, पार्षद पति वार्ड 66
सरकार को कर रहे बदनाम
निगम अधिकारी योजनाओं को पलीता लगाकर सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। पार्षदों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हमारे वार्ड में 22 सफाई कर्मी हैं जिनमें से 15 से 18 ही आते हैं। वह भी दो-तीन घंटे ही काम करते हैं। -समीर चौहान, पार्षद वार्ड 22
अपर नगरायुक्त की अच्छी पहल
निगम अधिकारी कार्यालयों से निकलें और निरीक्षण करें तो कहीं गंदगी नहीं मिलेगी। शहर स्वच्छ हो इसे लेकर अधिकारियों की ही मंशा साफ नहीं है। नगरायुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर जवाब मांगा जाता है। लेकिन अधिकारी चुप्पी साधकर बैठ जाते हैं। शासन को भी कई पत्र भेजे जा चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई ही नहीं हो रही हैं। अपर नगरायुक्त ने निरीक्षण की शुरूआत की है, यह अच्छी पहल है। -सुनीता वर्मा, महापौर
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शहर में कैसी सफाई हो रही है, इसकी पोल नगर निगम प्रशासन की निरीक्षण रिपोर्ट में खुलनी शुरू हो गयी है। 90-95 प्रतिशत सफाई कर्मियों द्वारा बायोमेट्रिक हाजिरी लगाने के दावों के विपरीत मौके पर काम करने वालों की संख्या बेहद कम मिल रही है। शहर में गंदगी को लेकर पार्षद ही नहीं बल्कि जनता भी अनेकों बार हंगामा कर चुकी है। लेकिन नगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट से जनता की आवाज दबाते रहे हैं। अपर नगरायुक्त श्रद्धा शांडिल्यायन सोमवार को वार्ड 67 के कैलाशपुरी, राजेंद्र नगर आदि इलाकों में स्वच्छता का निरीक्षण करने पहुंचीं। सूचना पाकर पार्षद राकेश शर्मा भी मौके पर पहुंच गए।
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अपर नगरायुक्त ने गली मोहल्लों का पैदल निरीक्षण किया। सफाई कर्मियों की बायोमेट्रिक हाजिरी जांची गई तो सामने आया कि वार्ड में 54 स्वच्छता मित्र तैनात हैं। सभी की बायोमेट्रिक हाजिरी भी लगी थी। लेकिन सुबह 10:15 बजे वार्ड में केवल सात स्वच्छता मित्र काम करते मिले। सभी नालियां सिल्ट से भरी थीं तो सड़कों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे मिले। कैलाशपुरी के बाजार में दुकानों के सामने भी गंदगी पड़ी थी। वहीं से सफाई नायक ईश्वर दयाल को कॉल की गई। लेकिन वह रिसीव नहीं हुई। अपर नगरायुक्त का कहना है कि स्वच्छता मित्र निर्धारित समय से पहले ही क्षेत्र से चले जाते हैं। जबकि प्रत्येक स्वच्छता मित्र को दोपहर दो बजे तक कार्य करना है। वार्ड में गंदगी मिलना और स्वच्छता मित्रों का काम पर न मिलना दर्शाता है कि काम में लापरवाही की जा रही है। जिससे नगर निगम की छवि खराब हो रही है। सफाई इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार से जवाब तलब किया गया है।
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सभी वार्डों में गंदगी के अंबार
यह स्थिति किसी एक वार्ड की नहीं है। सभी वार्डों में गंदगी के अंबार हैं। इसके लिए नगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिम्मेदार हैं। हमारे वार्ड में 18 सफाई कर्मचारी हैं, जिनमें से रोजाना 10-12 ही आते हैं। -गफ्फार अहमद, पार्षद वार्ड 73
अधिकारी नहीं चाहते सफाई
बोर्ड बैठक में सभी वार्डों में बराबर-बराबर सफाई करने का प्रस्ताव पास हुआ था, जिस पर निगम अधिकारियों ने अभी तक अमल नहीं किया है। अधिकारी शहर की सफाई नहीं चाहते हैं। हमारे वार्ड में 17 कर्मचारी हैं। - महेंद्र भारती, पार्षद वार्ड सात
कोई अधिकारी नहीं आता
वार्ड में गंदगी के अंबार हैं। सफाई हो रही है या नहीं इसकी जानकारी लेने कोई अधिकारी नहीं आता है। सफाई कर्मचारी आते तो हैं लेकिन हाजिरी के बाद कब चले जाते हैं कुछ पता नहीं चलता। -सलीम मलिक, पार्षद पति वार्ड 66
सरकार को कर रहे बदनाम
निगम अधिकारी योजनाओं को पलीता लगाकर सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। पार्षदों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हमारे वार्ड में 22 सफाई कर्मी हैं जिनमें से 15 से 18 ही आते हैं। वह भी दो-तीन घंटे ही काम करते हैं। -समीर चौहान, पार्षद वार्ड 22
अपर नगरायुक्त की अच्छी पहल
निगम अधिकारी कार्यालयों से निकलें और निरीक्षण करें तो कहीं गंदगी नहीं मिलेगी। शहर स्वच्छ हो इसे लेकर अधिकारियों की ही मंशा साफ नहीं है। नगरायुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर जवाब मांगा जाता है। लेकिन अधिकारी चुप्पी साधकर बैठ जाते हैं। शासन को भी कई पत्र भेजे जा चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई ही नहीं हो रही हैं। अपर नगरायुक्त ने निरीक्षण की शुरूआत की है, यह अच्छी पहल है। -सुनीता वर्मा, महापौर