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शामली अग्निकांड: तीन महिलाओं के शव चौपाल पर रखकर परिजनों ने किया धरना प्रदर्शन

Sat, 01 Feb 2020 11:59 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 01 Feb 2020 11:59 AM IST
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five died after fire in a firecracker factory at Shamli of Uttar Pradesh
death in fire - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के दौरान मारी गई तीन महिलाओं के शव कांधला में आंबेडकर चौपाल पर रख कर लोगों ने धरना प्रदर्शन किया और अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने समझाया, जिसके बाद पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिए जाने पर लोग शांत हुए।

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शुक्रवार शाम को कांधला में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के बाद आग लग गई थी। फैक्टरी में काम करने वाली मोहल्ला रायजादगान निवासी तीन महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। मलबे में दबे सभी शवों को बाहर निकाला गया था। हादसा इतना भयावह था कि शवों के अवशेषों को अलग-अलग स्थान से उठाना पड़ गया था। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार सुबह पांचों शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए थे, जिसके बाद उन्हें कांधला लाया गया।
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सुबह करीब साढ़े छह बजे मोहल्ला रायजादगान निवासी सरस्वती, नरेशो और निर्मला के शवों को परिजनों और स्थानीय लोगों ने हरिजन चौपाल पर रख कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि पीड़ित परिवारों को आर्थिक मद्द मिलनी चाहिए और आरोपी फैक्टरी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों ने मृतकों का अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया। इस सूचना पर एसडीएम कैराना मणि अरोरा, कांधला थाना प्रभारी सुशील दूबे पुलिस बल के साथ पहुंचे और परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे।
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इसी दौरान पूर्व मंत्री एमएलसी विरेंद्र सिंह और शामली से भाजपा विधायक तेजेंद्र निर्वाल भी मौके पर पहुंचे और लोगों को सरकार से मदद दिलाने का आश्वासन दिलाया। परिजन कार्रवाई और मुआवजे की संस्तुति का प्रमाण लेने की मांग पर अड़े रहे। पूर्व मंत्री विरेन्द्र सिंह ने दुर्घटना बीमा योजना के तहत पीड़ित परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। थाना प्रभारी ने मामले में रिपोर्ट दर्ज किए जाने की जानकारी दी और कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद करीब साढ़े नौ बजे मामला शांत हुआ और धरना समाप्त किया। तीनों शवों को मोहल्ले के निकट श्मशान घाट में ले जाया गया, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल रहा।

तीन घंटे चला धरना
तीनों महिलाओं के शव हरिजन चौपाल पर करीब तीन घंटे रखे रहे। सुबह साढ़े छह बजे से साढ़े नौ बजे तक धरना चला। इसके बाद करीब सवा 12 बजे मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों द्वारा मृतकों का अंतिम संस्कार करने से इनकार करने की वजह से अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए थे। 

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