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महानगर में जर्जर टंकियों का खौफ
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मेरठ। मुरादनगर श्मशान में हुए हादसे के बाद भी सरकारी विभाग सुधरने को तैयार नहीं हैं। मुख्यमंत्री के सरकारी जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश के बावजूद नगर निगम और जल निगम को पानी की जर्जर टंकियां (ओवरहेड टैंक) नहीं दिख रही हैं। हालांकि इनकी शिकायत सीएम पोर्टल तक पहुंच रही हैं। इस पर नगर निगम और जल निगम एकदूसरे के पाले में गेंद डालकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं। वहीं, अमर उजाला को जर्जर निष्प्रयोज्य टंकियों की स्थिति भयावह मिली।
गिरने की कगार पर एच ब्लॉक की टंकी
करीब 60 साल पुरानी एच ब्लॉक शास्त्रीनगर की टंकी निष्प्रयोज्य घोषित है। यहां जल निगम ने दूसरी टंकी बना दी थी। क्लब-60 के सचिव हरिराम विश्नोई ने इसकी शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर की। बताया कि मकान नंबर 74 के समीप खड़ी जर्जर टंकी से कभी भी हादसा हो सकता है। इसे ध्वस्त किया जाए।
दामोदर कॉलोनी में टंकी बदहाल
गढ़ रोड स्थित दामोदर कॉलोनी के पार्क में बनी टंकी कई साल से जर्जर हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसे बिल्डर ने बनाया था। यह बीते 15 साल से निष्प्रयोज्य है। निगम कर्मी यहां पंप आदि ले जा चुके हैं। इससे हादसे का डर रहता है।
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नहीं हो रही सुनवाई
टीपीनगर स्थित कालंदी कॉलोनी की टंकी बने करीब 55 साल हो चुके हैं। नगर निगम ने इसे निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया है। वहीं, गंगानगर की बीएसएनएल कॉलोनी में खड़ी टंकी के साथ केसरूखेड़ा की टंकी की उम्र भी पूरी हो चुकी है। यहां के लोग भी खौफ के साये में जी रहे हैं।
कैंप कार्यालय के समीप टंकी जर्जर
नगर आयुक्त कैंप कार्यालय के पीछे खड़ी पानी की टंकी भी जर्जर हाल है। हालांकि नगर आयुक्त कैंप कार्यालय के निकट होने के चलते जकलल विभाग इसकी मरम्मत कराता रहता है। बाकी जर्जर टंकियों के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।
जल निगम को पत्र भेजकर झाड़ा पल्ला
नगर निगम का जलकल विभाग जर्जर टंकी मामले में जल निगम को पत्र भेजकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। सहायक अभियंता अशोक कुमार का कहना है कि जर्जर टंकियों को ध्वस्त करने का काम जल निगम का है। वहीं, जल निगम के परियोजना प्रबंधक रमेश चंद्रा का कहना है कि ध्वस्तीकरण से पहले आईआईटी इंजीनियरों से जांच करानी होती है। नगर निगम के प्रस्तावों पर उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी।
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गिरने की कगार पर एच ब्लॉक की टंकी
करीब 60 साल पुरानी एच ब्लॉक शास्त्रीनगर की टंकी निष्प्रयोज्य घोषित है। यहां जल निगम ने दूसरी टंकी बना दी थी। क्लब-60 के सचिव हरिराम विश्नोई ने इसकी शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर की। बताया कि मकान नंबर 74 के समीप खड़ी जर्जर टंकी से कभी भी हादसा हो सकता है। इसे ध्वस्त किया जाए।
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दामोदर कॉलोनी में टंकी बदहाल
गढ़ रोड स्थित दामोदर कॉलोनी के पार्क में बनी टंकी कई साल से जर्जर हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसे बिल्डर ने बनाया था। यह बीते 15 साल से निष्प्रयोज्य है। निगम कर्मी यहां पंप आदि ले जा चुके हैं। इससे हादसे का डर रहता है।
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नहीं हो रही सुनवाई
टीपीनगर स्थित कालंदी कॉलोनी की टंकी बने करीब 55 साल हो चुके हैं। नगर निगम ने इसे निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया है। वहीं, गंगानगर की बीएसएनएल कॉलोनी में खड़ी टंकी के साथ केसरूखेड़ा की टंकी की उम्र भी पूरी हो चुकी है। यहां के लोग भी खौफ के साये में जी रहे हैं।
कैंप कार्यालय के समीप टंकी जर्जर
नगर आयुक्त कैंप कार्यालय के पीछे खड़ी पानी की टंकी भी जर्जर हाल है। हालांकि नगर आयुक्त कैंप कार्यालय के निकट होने के चलते जकलल विभाग इसकी मरम्मत कराता रहता है। बाकी जर्जर टंकियों के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।
जल निगम को पत्र भेजकर झाड़ा पल्ला
नगर निगम का जलकल विभाग जर्जर टंकी मामले में जल निगम को पत्र भेजकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। सहायक अभियंता अशोक कुमार का कहना है कि जर्जर टंकियों को ध्वस्त करने का काम जल निगम का है। वहीं, जल निगम के परियोजना प्रबंधक रमेश चंद्रा का कहना है कि ध्वस्तीकरण से पहले आईआईटी इंजीनियरों से जांच करानी होती है। नगर निगम के प्रस्तावों पर उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी।