डेढ़ साल बाद बेटी से मिलकर रो पड़ा पिता, पुलिस ने कोठे से छुड़ाया, आपबीती सुन अफसर हैरान
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पुलिस के अनुसार सीकर के उद्योग नगर थाना क्षेत्र निवासी मौसेरी दो नाबालिग बहनों का जनवरी 2017 में अपहरण कर लिया गया था। इनमें एक किशोरी दिसंबर 2017 में सीकर लौट आई थी। जिसने बताया कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ललिता नाम की एक महिला दोनों को नौकरी लगवाने का झांसा देकर शकरपुर दिल्ली में कोठा चलाने वाले काजल नाम की महिला के पास ले गई थी।
जहां बड़ी बहन को 80 हजार रुपये में बेच दिया गया था,जबकि छोटी बहन को ललिता साथ ले गई थी। 2017 दिसंबर में काजल की मौत होने पर बड़ी बहन वहां से भागकर सीकर पहुंच गई थी। बाद में पुलिस ने काजल के घर दबिश देकर दो युवकों को पकड़ा। लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी सीकर पुलिस दूसरी किशोरी का पता नहीं लगा पाई।
हाईकोर्ट में हुई पेशी
किशोरी के पिता ने बताया कि उन्होंने बेटी बरामद न होने पर करीब दो माह पूर्व राजस्थान हाईकोर्ट में गुहार लगाई। हाईकोर्ट ने वहां के पुलिस अधिकारियों को कोर्ट में तलब कर नाराजगी जताई। जिसके बाद पुलिस अलर्ट हुई।
दिल्ली और मेरठ में डेरा
हाईकोर्ट की सख्ती पर राजस्थान पुलिस टीम में शामिल एसआई गिरधारी लाल, विजय तिवारी की टीमें 26 दिनों तक दिल्ली में डेरा डाले रहीं। तीन दिन पूर्व आरोपी ललिता पकड़ में आ गई। उससे पूछताछ में पता चला कि दूसरी किशोरी को मेरठ में कोठा चलाने वाले दीपक को बेचा था। जिस पर राजस्थान पुलिस ने शनिवार को कबाड़ी बाजार में दो कोठों पर छापामारी की थी। किशोरी का सुराग न लगने पर टीम ने मेरठ में डेरा डाल लिया था।
एसएसपी के प्रयासों से मिली सफलता
किशोरी बरामद करने आई सीकर पुलिस टीम ने बताया कि जनवरी 2017 में जब अपहरण का केस दर्ज हुआ था तो उस वक्त वहां के एएसपी अखिलेश कुमार प्रतिनियुक्ति पर थे, जो इस समय मेरठ के कप्तान हैं। एसएसपी अखिलेश कुमार ने इस ऑपरेशन में पूरी गंभीरता दिखाते हुए एसपी सिटी रणविजय सिंह को टास्क सौंपा। इंस्पेक्टर ब्रह्मपुरी सतीश राय के अनुसार पुख्ता जानकारी के बाद ईश्वरपुरी में दीपक के मकान पर दबिश देकर किशोरी को बरामद कर लिया गया।
खरीद फरोख्त की मंडी बना मेरठ,
मेरठ लड़कियों की खरीद-फरोख्त की मंडी बन चुका है। 06 माह में 29 लड़कियां मुक्त करा चुकी पुलिस एएचटीयू के इंस्पेक्टर के अनुसार इस साल करीब छह माह में 29 लड़कियों को रेस्क्यू कराया जा चुका है। इनमें से अधिकांश रेड लाइट एरिया से बरामद हुईं।
लाखों की हस्ती है दीपक
पुलिस के अनुसार आरोपी दीपक मूल रूप से मध्य प्रदेश का निवासी है। लंबे समय से ईश्वरपुरी में रहता है। वह और उसका परिवार कोठा चलाता है। पता चला कि उसने जागृति विहार में भी लाखों की कीमत का मकान बनाया है। दीपक को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ये तो खुशी के आंसू
अपहृत किशोरी करीब डेढ़ साल बाद ब्रह्मपुरी थाने में अपने पिता से मिली। दोनों की आंखों में खुशी के आंसू थे। पिता ने बेटी को गले लगा लिया। पिता ने बताया कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा था। उन्हें उम्मीद थी कि उनकी बेटी जरूर मिलेगी। डॉटर्स डे पर बेटी मिली तो यह खुशी दोगुनी हो गई। इंस्पेक्टर ब्रह्मपुरी के अनुसार राजस्थान पुलिस किशोरी को ले गई है। वहां की कोर्ट में बयान के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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