किसान आंदोलन: सरकार पर दबाव, गन्ना मूल्य बढ़ने के ख्वाब, तीन साल पहले बढ़े थे केवल दस रुपये
- दो सत्रों से लगातार नहीं बढ़ा गन्ना मूल्य, इस बार उम्मीद ज्यादा
- 350 से 400 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य मांग रहे किसान
विस्तार
कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन से प्रदेश सरकार पर गन्ना मूल्य बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है। पिछले दो पेराई सत्रों से गन्ना मूल्य बढ़ने की उम्मीद लगाए किसानों को भी इस बार मूल्य बढ़ने की उम्मीद बंधी है। किसानों ने मूल्य न बढ़ने पर इसके लिए आंदोलन को तेज करने का ऐलान किया है।
गन्ना पेराई सत्र शुरू हुए करीब एक माह हो चुका हैं लेकिन प्रदेश सरकार ने अभी तक गन्ना मूल्य घोषित नहीं किया है। गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) घोषित करने से पहले गन्ना आयुक्त और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक हो चुकी है।
इन बैठकों में चीनी मिल और किसान प्रतिनिधि अपना पक्ष रख चुके हैं। हाल ही में हुई मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी की अध्यक्षता वाली बैठक में शुगर इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने जहां कोरोना काल में गन्ने का रेट नहीं बढ़ाने की मांग करते हुए प्रति क्विंटल 15 रुपये सब्सिडी की मांग की, वहीं किसान प्रतिनिधियों ने गन्ने की लागत में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए गन्ने का रेट 350 से 400 रुपये प्रति क्विंटल मांगा है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी की बैठक के प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर के बाद ही गन्ना रेट घोषित होता है। फिलहाल कृषि कानूनों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन में भाकियू ने भी ताल ठोक दी है।
हरियाणा और पंजाब के किसानों के समर्थन में पश्चिमी यूपी के किसान भी दिल्ली कूच कर गए हैं। इसके चलते प्रदेश सरकार पर इस साल गन्ना रेट में बढ़ोतरी करने का दबाव भी बढ़ गया है। सूत्रों के मुताबिक सरकार एसएपी में 10 से 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर सकती है।
तीन साल पहले बढ़े थे दस रुपये
भाजपा सरकार में पिछले दो साल से गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ा है। योगी सरकार ने साल 2017 में गन्ने के मूल्य में 10 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की थी। इसमें सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 315 और अग्रिम प्रजाति का मूल्य 325 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था।
तब से अब तक मूल्य नहीं बढ़ाया है। इस साल किसान आंदोलन के चलते सरकार को गन्ना मूल्य नहीं बढ़ने पर प्रदेश में भी किसान आंदोलन का डर सता रहा है। वहीं, दो साल से मूल्य नहीं बढ़ाये जाने का भी दबाव सरकार पर है।
पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही सरकार
प्रदेश में पिछले दो साल से गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ा है। किसान की लागत लगातार बढ़ रही है। कोरोना काल में किसानों ने ही देश की जीडीपी को बचाकर रखा है। लेकिन सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने में लगी है। पिछले साल का गन्ना भुगतान भी नहीं हुआ है। इससे किसान परेशान है। अगर गन्ना रेट नहीं बढ़ा तो किसान सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। -राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू