यूपी: थम नहीं रहा विवाद, फायरिंग में कई घायल, अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, ये है विवाद की वजह
बागपत जनपद के यमुना खादर में नंगला बहलोलपुर और खुर्रमपुर गांव के किसानों के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। नंगला बहलोलपुर के किसानों का आरोप है कि विपक्षियों ने फायरिंग करने और मारपीट का आरोप लगाया है। खादर में खेत जोतने से नाराज किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी है। किसानों का कहना है कि हरियाणा का पुलिस-प्रशासन भी विपक्षी किसानों के साथ मिल गए हैं। नंगला बहलोलपुर और सोनीपत तहसील के खुर्रमपुर गांव के किसानों के बीच जमीन के विवाद में 26 नवंबर को सर्वे होगा।
नंगला बहलोलपुर गांव के धन्नू प्रधान का कहना है कि सोनीपत के खुर्रमपुर गांव के किसान शनिवार को दोपहर के समय उनके खेतों में पहुंचे और उनकी जमीन पर गेहूं की फसल की बुआई कर दी। सैंकड़ों बीघा फसल पर जबरन कब्जा कर गेहूं की बुवाई कर दी है। विरोध करने पर नंगला बहलोलपुर गांव के किसानों पर हमला किया गया। किसानों को खादर से भगा दिया गया। फायरिंग की गई। आरोप है कि सोनीपत का पुलिस-प्रशासन भी खुर्रमपुर गांव के किसानों का ही साथ दे रहा है।
शुक्रवार को जमीन जोते जाने से नाराज नंगला बहलोलपुर गांव के किसान शनिवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। धन्नू प्रधान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति का आदेश दिया था। इसके बावजूद खुर्रमपुर गांव के किसानों ने हरियाणा पुलिस की शह पर जमीन जोत दी। यह कोर्ट की अवमानना है, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है।
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क्या है विवाद
इंसाफ नहीं मिला तो आंदोलन होगा
नंगला बहलोलपुर में किसानों ने एलान किया कि अगर इंसाफ नहीं मिला तो आंदोलन होगा। बैठक में धन्नू प्रधान, बिल्लू, यशपाल, मनोज, कैलाश, बाबूराम, इकबाल, ओमपाल, सहीराम, भूप सिंह, राजपाल, कर्म सिंह, नत्थू, बलेराम, हसीना, जैतून और सीमाना मौजूद रहे। धन्नू प्रधान ने कहा कि दोनों राज्यों के अधिकारी उनकी सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं।
26 नवंबर को झगड़े के आसार
खुर्रमपुर और नंगला बहलोलपुर गांव के ग्रामीणों के बीच 26 नवंबर को सर्वे होगा। इस दिन फिर झगड़े के आसार बने हुए हैं।
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क्या है विवाद
यमुना में बाढ़ के कारण सोनीपत जिले के खुर्रमपुर गांव का मजरा नंगला बहलोलपुर उजड़ गया था। नंगला के किसानों को काठा, मवी कलां गांव के किसानों ने अपनी ग्राम पंचायत से जगह देकर नंगला बहलोलपुर के नाम से गांव बसा दिया। खेकड़ा तहसील और बागपत कोतवाली में करीब सवा सौ घर बस गए। खुर्रमपुर गांव के किसानों के साथ जमीन का विवाद शुरू हो गया। वर्ष 1993 में मामला चंडीगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा और 1997 में हाईकोर्ट ने नंगला बहलोलपुर के किसानों को 1250 बीघा जमीन पर मालिकाना हक दिया।
इसके बाद दोबारा से हिम्मत कर किसानों के करीब 60 घर उसी जमीन पर जाकर बस गए, जहां कभी यमुना की धार से उजड़ गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति के आदेश दिए थे। नंगला बहलोलपुर गांव दो जगह बस गया। सोनीपत में खुर्रमपुर गांव का मजरा बन गया और बागपत में काठा गांव का। दोनों जगह यहां के किसान रहते हैं। चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने पुरानी जगह ही गांव बसाने के आदेश भी दिए हैं। खुर्रमपुर गांव के साथ विवाद होते ही पलायन कर यमुना पार से लोग बागपत के नंगला बहलोलपुर आ जाते हैं।
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