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किसान आंदोलन ने बहाल किया भाईचारा, ऐतिहासिक होगी महापंचायत : डीपी सिंह

Sun, 29 Aug 2021 04:54 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 29 Aug 2021 04:54 PM IST
सार

किसान आंदोलन के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी महापंचायत मुजफ्फरनगर में होगी। 25 सितंबर को भारत बंद की घोषणा पर कहा कि बंद में किसानों के साथ मजदूर, कारखाना मजदूर भी शामिल होंगे।  

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Farmers movement restored brotherhood, Mahapanchayat will be historic says DP Singh
डीपी सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीन कृषि कानूनों को लेकर पिछले नौ महीने से चल रहे किसान आंदोलन को मजबूत करने में अखिल भारतीय किसान सभा की केंद्रीय कमेटी के सदस्य डीपी सिंह की खास भूमिका है। उनका कहना है कि किसान आंदोलन से भाईचारा बहाल हुआ है।

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मुजफ्फरनगर में पांच सितंबर को होने वाली किसान पंचायत एतिहासिक होगी। अब यह आंदोलन किसानों के साथ खेती पर निर्भर लोगों का भी आंदोलन बन गया है। किसानों को खालिस्तानी और तालिबानी बताकर आंदोलन को कुचलने का कुचक्र रचा जा रहा है।
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 किसान महापंचायत की तैयारियों का जायजा लेकर मुजफ्फरनगर से गाजीपुर बॉर्डर लौट रहे डीपी सिंह ने अमर उजाला के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि आंदोलन जितना लंबा होता जा रहा है, उतना ही मजबूत भी हुआ है।

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22 जनवरी के बाद से किसानों की सरकार से बात नहीं हो सकी है, लेकिन अब यह आंदोलन हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी यूपी का नहीं रह गया है, बल्कि पूरे देश का आंदोलन बन गया है। सिंघु बॉर्डर पर एक हजार से ज्यादा तमिलनाडु के किसानों ने डेरा जमा लिया है। अब यह आंदोलन जन आंदोलन में तब्दील होने लगा है।

किसान आंदोलन के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी महापंचायत मुजफ्फरनगर में होगी। 25 सितंबर को भारत बंद की घोषणा पर कहा कि बंद में किसानों के साथ मजदूर, कारखाना मजदूर भी शामिल होंगे। संयुक्त किसान मोर्चा को अब तक 10 से ज्यादा मजदूर फेडरेशनों का समर्थन मिल चुका है। 

तीनों कृषि कानूनों से किसान ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली भी ध्वस्त हो जाएगी। आंदोलन किसानों को मुद्दों पर बोलना और हक के लिए सवाल उठाना भी सिखा रहा है।  केंद्र सरकार पर गल्ले का कारोबार करने वाली कंपनियों का भारी दबाव है।

ये कंपनियां नहीं चाहती कि सरकार इन कानूनों को वापस लें। यह पहला मौका है जब किसान संगठनों का इतना बड़ा मंच एक साथ संगठित होकर सरकार के सामने डटकर खड़ा है। किसानों ने ठान लिया है, जब तक कानून वापसी नहीं तब तक घर वापसी नहीं।

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