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बारिश के कहर से किसानों के सपने बिखरे

Fri, 14 Oct 2022 01:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Oct 2022 01:51 AM IST
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Farmers' dreams shattered due to rain
बारिश के कहर से किसानों के सपने बिखरे
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हस्तिनापुर। दर्द उनके सीने में भी है, जिन्होंने अपनी बर्बादी अपनी आंखों से होती देखी है। पिछले कई दिनों तक लगातार हुई बेमौसम बारिश ने खादर क्षेत्र के किसानों के लिए बर्बादी की कहानी लिख दी है। पिछले वर्ष बाढ़ ने तो इस वर्ष बारिश ने फसल बर्बाद कर दी। मेहनत से तैयार की गई धान की फसल को बर्बाद होते देखकर किसानों की आंखों में आंसू छलक रहे हैं। वह अपना दर्द बया नहीं कर पा रहे हैं।
बारिश ने जो दर्द खादर क्षेत्र के किसानों को दिया है, उसकी भरपाई करना असंभव नजर आ रहा है। उनका कहना है कि किसान को बर्बाद होने के लिए यह जरूरी नहीं कि वह सट्टा, जुआ खेले या शराब पीये। अगर परिस्थितियां अनुकूल ना हो तो वह जिस खेती किसानी को करता है वह भी उसे बर्बाद कर सकती है। इसका उदाहरण इन दिनों खादर क्षेत्र के कई गांव में आसानी से देखा जा सकता है। किसानों का सोना कहीं जाने वाली उनकी धान की फसल इस समय बेमौसम बारिश की भेंट चढ़ गई है। पानी में अंकुरित होकर नष्ट हो रही है।
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गांव दूधली निवासी किसान भिलाई ने बताया कि गत वर्ष उसकी करीब 30 बीघा धान की फसल बारिश के कारण आई बाढ़ में बहकर नष्ट हो गई थी, जिसकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी। इस बार भी लाखों रुपये की करीब 25 बीघा धान की फसल पानी में डूबी हुई है, जो अब अंकुरित हो रही है। ऐसा ही हाल अन्य किसानों का है। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा कि बीज विक्रेता ने बीज बेच दिया, खाद विक्रेता ने खाद और दवा विक्रेता ने दवा बेच दी, लेकिन अब किसान क्या बेचकर उनका कर्ज चुकाएंगे। उनकी तो दिवाली भी काली हो गई।
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किसान सोनू खेड़ा, गुरप्रीत सिंह, विक्रम सिंह, देवेंद्र गजरौला निवासी रणबीर सिंह आदि ने बताया कि खादर क्षेत्र में बारिश के कारण कई गांव के रास्तों पर भी पानी है। जंगल तो अभी पूरी तरह लबालब है, जिससे उनके खेतों में खड़ी धान की फसल डूबी हुई है, जिसके बचने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को बेमौसम बारिश में नष्ट हुई फसल का आकलन करा कर किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाना चाहिए।
सरसों की बुवाई के अभी आसार नहीं
स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉॅ. नवीन चंद्र का कहना है कि खादर क्षेत्र में इन दिनों खेतों में कई-कई फीट पानी भरा हुआ है। अभी पानी सूखने में करीब एक महीने का समय लगेगा, जिससे सरसों की बुवाई के अभी कोई आसार नहीं है। गेहूं की बुवाई पर भी असर पड़ेगा।

डूबी फसल को बचाने का प्रयास
जिन खेतों में धान की फसल काटकर रखी गई थी और बेमौसम बरसात होने के कारण में बह गई है या पानी में डूबी हुई है, उसे बचाने के लिए किसान जद्दोजहद में जुटे हैं। उनका मानना है कि वह कुछ फसल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं। वह जान जोखिम में डालकर फसल को जलमग्न खेतों से बाहर निकाल रहे हैं। व्यापारी भी औने पौने दाम लगाने के लिए खेतों पर पहुंच रहे हैं।
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