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पश्चिमी यूपी में अचानक बढ़ी काले गेहूं के बीज की मांग, इस वजह से किसानों में हुआ लोकप्रिय

Thu, 26 Nov 2020 11:01 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Thu, 26 Nov 2020 11:01 AM IST
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Farmers are not getting black wheat seed
black wheat seed - फोटो : अमर उजाला

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काले गेहूं के बीज की मांग बढ़ती जा रही है लेकिन बीज की उपलब्धता कम है। इसका बीज अभी बाजार में नहीं आया है। फिलहाल, जिन किसानों ने बीज पैदा किया है, वहीं इसकी पूर्ति कर रहे है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से जुड़े 13 कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से भी किसानों को इस बारे में जागरूक किया जा रहा है।

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काले गेहूं का बीज पंजाब के नेशनल एग्री फूड बायोटैक्रालॉजी इंस्टीट्यूट (नाबी) ने विकसित किया था। इस गेंहू को कैंसर, शुगर, मोटापा, कोलेस्ट्राल और दिल की बीमारियां दूर करने में कारगर माना जा रहा है।
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इसके गेहूं की पैदावार को लेकर किसान भी उत्साहित हैं। जिन किसानों ने छोटे स्तर पर बीज की शुरुआत की है, वे अब दूसरे किसानों को इसे दे रहे है। इसकी बुवाई के लिए वैसे तो नवंबर माह सबसे अच्छा है लेकिन इसे 10 दिसंबर तक बो सकते हैं।

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एक-दूसरे को बेच रहे किसान
मुजफ्फरनगर के बड़कली गांव निवासी ओमकार त्यागी का कहना है कि वह दो साल पहले एक किलो काले गेहूं का बीज लाए थे। उन्होंने इसकी बुवाई कर बीज तैयार किया है। अब खेती के साथ साथ वह गेहूं का बीज भी किसानों को दे रहे हैं।

मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के 10 से 15 किसानों को 40 किलो बीज दे चुके हैं। मेरठ के परीक्षितगढ़ ब्लाक के गांव नांरगपुर निवासी किसान टीटू कुमार प्रजापति का कहना है उन्होने दो बीघे गेहूं की बुवाई की है। वह 80 रुपये प्रति किलों के हिसाब से गेहूं का बीज किसानों को दे रहे हैं।

कुछ ही किसान कर रहे खेती
अभी वेस्ट यूपी में कुछ किसान ही इसकी खेती कर रहे हैं। इसमें काफी औषधि गुण है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और कई रोगों के लिए भी लाभप्रद है। - डॉ. आरएस सेंगर, कृषि वैज्ञानिक, सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

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