इंसाफ मिलने तक किसान की पत्नी और बच्चों ने त्यागा अन्न-जल
आठ बीघा जमीन की गलत चकबंदी किए जाने से आहत किसान के आत्महत्या प्रकरण में इंसाफ के लिए पीड़ित परिवार ने अन्न और जल त्याग दिया है। मृतक की पत्नी और बच्चों ने इंसाफ मिलने तक अन्न नहीं ग्रहण करने की चेतावनी दी। केंद्रीय मानव संसाधन, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरोद्धार राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने प्रकरण की सही जांच का भरोसा बामनौली के किसानों को दिया। जांच के लिए भेजे एसओसी तनाव को देखकर गांव के बाहर से ही वापस लौट गए। डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने कहा प्राथमिक जांच में किसान की मौत की वजह पारिवारिक कलह में गई है। पूरे प्रकरण की जांच डीडीसी से कराई जाएगी।
किसान कृष्णपाल की मौत के बाद उसका परिवार पूरी तरह टूट गया है। बुधवार को इंसाफ के लिए मृतक किसान की पत्नी सुमन, बेटी भावना (15), बेटा महेश (13), प्रशांत (11) और बेटी प्रियांशी (08) ने अन्न-जल त्याग दिया। पीड़ित परिवार ने कहा मौत के जिम्मेदार चकबंदी अधिकारी हैं। इनके खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए। चकबंदी के कारण वह कर्जदार हो गए हैं। उनका संपूर्ण कर्ज माफ होना चाहिए। उनकी आठ बीघा जमीन एक ही जगह मिलनी चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती, न तो अन्न का एक दाना ग्रहण करेंगे और न ही पानी की एक बूंद तक पीएंगे। डीएम भवानी सिंह ने प्रकरण की जांच के लिए एसओसी चकबंदी अजय उपाध्याय को बामनौली भेजा। गांव में तनाव को देखते हुए एसओसी गांव के बाहर से ही वापस लौट गए। गांव के बाहर से ही उन्होंने जांच प्रक्रिया पूरी की। विकास भवन में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह से मृतक किसान की पत्नी सुमन और बामनौली के अन्य किसान पहुंचे। राज्यमंत्री ने कहा कि निष्पक्ष जांच होगी और दोषी अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। उधर, डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने कहा एसओसी से बात की गई है। प्राथमिक जांच में पारिवारिक विवाद का मामला सामने आया है। इसके बावजूद प्रकरण की पूरी जांच डीडीसी एडीएम वित्त एवं राजस्व लोकपाल सिंह को दी गई है।
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पीड़ित परिवार के लिए रालोद ने मांगा मुआवजा
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रालोद के पश्चिमी उप्र किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक वीरपाल राठी मृतक किसान के घर पहुंचे। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। एसडीएम बड़ौत अरविंद कुमार द्विवेदी से मोबाइल पर बातचीत की और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की। एसडीएम ने उन्हें आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। सीओ बड़ौत रामानंद कुशवाह ने मृतक किसान कृष्णपाल की पत्नी सुमन को बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली।
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चकबंदी अधिकारी नहीं पहुंचे परिवार के बीच
बामनौली गांव में किसान कृष्णपाल की मौत के बाद चकबंदी अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए। बुधवार को चकबंदी अधिकारियों ने बामनौली गांव में सूचना भिजवाई कि वह गांव में आकर किसानों की समस्याएं सुनेंगे। जिस किसान को कोई समस्या है, वह उन्हें बता सकते हैं, लेकिन शाम कोई चकबंदी अधिकारी गांव नहीं पहुंचा।
जान चली गई, हुई मुकदमे की सुनवाई
बामनौली के मृतक किसान कृष्णपाल के मौत हो गई। बुधवार को उसके मुकदमे की सुनवाई होनी थी। डीडीसी कोर्ट में दोनों पक्षों के अधिवक्ता पहुंचे और अगली सुनवाई के लिए 13 दिसंबर की तिथि तय की गई।
क्या सच और क्या झूठ
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चकबंदी विभाग का कहना है कि किसान का चक पहले ही मूल जगह करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इसके बाद ही किसान ने कोर्ट में रिवीजन दाखिल किया, इसी को लेकर मुकदमा चल रहा है। डीडीसी एडीएम वित्त एवं राजस्व लोकपाल सिंह का कहना है कि प्रकरण की पूरी जांच कराई जा रही है।
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आज बामनौली जाएंगे अधिकारी
डीएम ने कहा किसान के परिवार को इंसाफ मिलेगा। अन्न जल त्याग करने का अगर मामला जानकारी में आया है। वह चकबंदी विभाग की टीम को गांव में भेजेेंगे और प्रकरण में पीड़ित परिवार को पूरा इंसाफ दिलाया जाएगा।
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तय समय में निपटाए जाएंगे मुकदमे
किसान की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया। डीएम ने बताया कि सीओ चकबंदी, एसओसी चकबंदी और डीडीसी चकबंदी कोर्ट में लंबित मुकदमों की लिस्ट तैयार कराई जा रही है। ऐसे प्रकरणों को निर्धारित समय में निपटाया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दो घंटे नियमित कोर्ट में बैठे और मुकदमों का निपटारा करें। चकबंदी विभाग के अलग से अधिकारी नहीं होने के कारण यहां प्रशासनिक अधिकारियों को ही अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।
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चार गांव में चल रही चकबंदी
जिले के निरपुड़ा, बामनौली, रंछाड़ और बरनावा गांव में कई दशक से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक पूरी नहीं हुई। समय-समय पर इसे लेकर विवाद उठता रहता है।
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