परीक्षितगढ़। नगर में चल रही रामलीला मंचन में रावण व मेघनाथ द्वारा देवताओं का बंधन एवं सीता जन्म लीला का मंचन किया गया। जनक पुरी में भयंकर अकाल पड़ा तो हाहाकार मच गया। जनता राजा जनक के दरबार में पहुंची। ऋषि मुनियों की आज्ञा से राजा जनक ने जब खुद हल चलाया तो हल पत्थर से टकराया। जब पत्थर को हटाया तो देखा एक कलश में कन्या है, जिसे देखकर राजा प्रसन्न हुए और उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार करते हुए उसका नाम सीता रखा। महासचिव श्याम दत्त शर्मा, भरत अग्रवाल, अध्यक्ष विकल गुर्जर, महेश त्यागी, विष्णु अवतार रूहेला, विद्या भूषण गर्ग, अमन त्यागी, महावीर गुप्ता, अनिल रूहेला, राहुल शर्मा आदि का सहयोग रहा।