उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में शनिवार को व्यवस्था की संवेदनहीनता का एक और मामला सामने आया है। जिलेे के नुमाइश कैंप क्षेत्र में एक परिवार लापता हुए बुजुर्ग व्यक्ति की तलाश में जुटा था लेकिन चंद घंटों बाद बुजुर्ग की लाश मोर्चरी में होने की सूचना पर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
जिंदा समझ हो रही थी तलाश, मोर्चरी में मिली लाश, परिजन काटते रहे पुलिस थाने और अस्पताल के चक्कर
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सहारनपुर नुमाइश कैंप से लापता हुए सोमनाथ आहुजा को मंगलवार रात को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। सोमनाथ आहुजा 68 वर्ष के थे, जो मंगलवार शाम को लापता हो गए थे। एक व्यक्ति ने देहरादून रोड से घायलावस्था में जिला अस्पताल में लाकर भर्ती करा दिया। तब तक वह बेहोश थे, जिस कारण नाम पता नहीं बता पा रहे थे।
उन्होंने बताया कि इसके बाद वह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भी गए और सोमनाथ के बारे में जानकारी करनी चाही तो, उनसे कह दिया कि सोमनाथ नाम का कोई व्यक्ति यहां भर्ती नहीं है। इसके बाद उन्होंने सीएमओ से बात की, लेकिन तब भी सोमनाथ के बारे में कुछ जानकारी नहीं मिली।
शनिवार को उनके पास कॉल आई, जिसमें बताया गया कि जिन्हें तुम तलाश रहे हो, उनका शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है। वहां पहुंचने पर पता चला कि सोमनाथ का निधन बुधवार को ही हो गया था।
बताया गया कि मौत के बाद शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया। मदन आहुजा का कहना था कि अस्पताल और पुलिस की तरफ से इस मामले में बिल्कुल गंभीरता नहीं बरती गई, अन्यथा हमें पहले ही इसकी सूचना मिल सकती थी।
जब कोई अज्ञात व्यक्ति अस्पताल में भर्ती होता है और मौत हो जाती है तो नियमानुसार 72 घंटे तक पहचान के लिए शव को मोर्चरी में रखवा दिया जाता है। इस व्यक्ति को भी अज्ञात में भर्ती कराया गया था। - डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ