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केदारनाथ से सुरक्षित लौटा परिवार
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केदारनाथ से सुरक्षित लौटा परिवार
मेरठ। केदारनाथ यात्रा पर निकला अमित पाराशर का परिवार बुधवार देर शाम मेरठ सुरक्षित लौट आया। परिवार के लिए 36 घंटे का कठिन सफर यादगार बन गया। तेज बारिश में मंदिर के मुख्य पुजारी के कक्ष में रहे। खाई और पहाड़ों के पथरीले मार्ग पर दिन रात 26 घंटे पैदल सफर किया। सोनू प्रयाग से बुधवार शाम मेरठ पहुंचे।
सुपरटेक निवासी दवा व्यापारी अमित पाराशर ने बताया कि परिवार के साथ 16 अक्तूबर को केदारनाथ के लिए गए थे। 17 अक्तूबर को केदारनाथ में बारिश आरंभ हो गई। हवाई यात्रा बंद कर दी गई। पहली बार 36 घंटे लगातार बारिश देखी। वापस लौटने का कोई साधन नहीं रहा। बुजुर्गों के साथ होने के कारण पैदल लौटना सही नहीं समझा। 64 वर्षीय मौसा राजीव मिश्रा, मौसी अनीता मिश्रा, भतीजा अतुल और मित्र हितेश साथ में थे।
उन्होंनेे बताया कि जब मंदिर पहुंचे तो हजारों की संख्या में श्रद्धालु थे। बारिश शुरू होने के बाद सोमवार सुबह तक मंदिर पर मात्र 150 के आसपास लोग रहे थे। मन को मजबूत कर मंगलवार शाम पूरा परिवार वापस गौरी कुंड के लिए चल दिया। गौरी कुंड तक के मार्ग पर 30 से अधिक स्थानों पर लैंड स्लाइड हुआ था। कई जगहों पर पानी के झरने बह रहे थे। पखदंडी और पथरीले रास्तों से बाबा का नाम लेते हुए 26 घंटे लगातार सफर किया। कुछ जगहों पर सिर्फ इतना ही मार्ग शेष था कि एक आदमी पत्थरों के बीच से निकल पाए। गौरीकुंड से पाटा तक टैक्सी में पहुंचे। पाटा में गाड़ी से मेरठ के लिए लौटे। पाटा के बाद भी दर्जनों जगहों पर लैंड स्लाइड हुआ था। मार्ग से निकलना बहुत ही जोखिम भरा था।
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मेरठ। केदारनाथ यात्रा पर निकला अमित पाराशर का परिवार बुधवार देर शाम मेरठ सुरक्षित लौट आया। परिवार के लिए 36 घंटे का कठिन सफर यादगार बन गया। तेज बारिश में मंदिर के मुख्य पुजारी के कक्ष में रहे। खाई और पहाड़ों के पथरीले मार्ग पर दिन रात 26 घंटे पैदल सफर किया। सोनू प्रयाग से बुधवार शाम मेरठ पहुंचे।
सुपरटेक निवासी दवा व्यापारी अमित पाराशर ने बताया कि परिवार के साथ 16 अक्तूबर को केदारनाथ के लिए गए थे। 17 अक्तूबर को केदारनाथ में बारिश आरंभ हो गई। हवाई यात्रा बंद कर दी गई। पहली बार 36 घंटे लगातार बारिश देखी। वापस लौटने का कोई साधन नहीं रहा। बुजुर्गों के साथ होने के कारण पैदल लौटना सही नहीं समझा। 64 वर्षीय मौसा राजीव मिश्रा, मौसी अनीता मिश्रा, भतीजा अतुल और मित्र हितेश साथ में थे।
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उन्होंनेे बताया कि जब मंदिर पहुंचे तो हजारों की संख्या में श्रद्धालु थे। बारिश शुरू होने के बाद सोमवार सुबह तक मंदिर पर मात्र 150 के आसपास लोग रहे थे। मन को मजबूत कर मंगलवार शाम पूरा परिवार वापस गौरी कुंड के लिए चल दिया। गौरी कुंड तक के मार्ग पर 30 से अधिक स्थानों पर लैंड स्लाइड हुआ था। कई जगहों पर पानी के झरने बह रहे थे। पखदंडी और पथरीले रास्तों से बाबा का नाम लेते हुए 26 घंटे लगातार सफर किया। कुछ जगहों पर सिर्फ इतना ही मार्ग शेष था कि एक आदमी पत्थरों के बीच से निकल पाए। गौरीकुंड से पाटा तक टैक्सी में पहुंचे। पाटा में गाड़ी से मेरठ के लिए लौटे। पाटा के बाद भी दर्जनों जगहों पर लैंड स्लाइड हुआ था। मार्ग से निकलना बहुत ही जोखिम भरा था।
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