सुप्रीम कोर्ट को पता तक नहीं, रोडवेज में 140 संविदा परिचालकों को ऑफ लाइन किया गया भर्ती
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रोडवेज में सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी कोई मायने नहीं रखते हैं। किसी भी स्तर की स्थायी, अस्थायी और संविदा भर्ती बिना विज्ञापन के नहीं करने के आदेश के बावजूद रोडवेज में 140 संविदा परिचालकों को ऑफ लाइन भर्ती कर लिया गया।
फर्जीवाड़े का यह खेल पुराना
रोडवेज में परिचालकों की कमी बताकर संविदा परिचालकों की भर्ती करने का खेल बहुत पुराना है। भर्ती की आड़ में बेरोजगारों से मोटा पैसा कमाने के फेर में संविदा परिचालकों को विदाउट टिकट और औसत से कम आय लाने के आरोप में निकालकर भर्ती का आधार बनाया जाता है।
बनी थी ऑनलाइन प्रक्रिया
क्षेत्रीय स्तर पर होने वाली इस भर्ती में बड़े पैमाने पर हुए घालमेल और भ्रष्टाचार के बाद तत्कालीन एमडी मुकेश मेश्राम ने ऑनलाइन भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार भर्ती की समाचार पत्रों में विज्ञप्ति देने के साथ ही विभाग की साइट पर भी इसकी पूरी जानकारी देते हुए आवेदन ऑनलाइन लेने थे।
हो गया गड़बड़झाला
इस मौजूद भर्ती की न तो समाचार पत्रों में विज्ञप्ति दी गई और न ही साइट पर ही जानकारी दी गई। लेकिन मेरठ रोडवेज रीजन में इन सभी नियम कायदों को दरकिनार कर मार्च-अप्रैल माह में 140 संविदा परिचालकों की भर्ती ऑफ लाइन कर भर्ती की गोपनीयता और बरती गई अनियमितता से तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।
मोटी रिश्वत के आरोप
रोडवेज सूत्रों के मुताबिक भर्ती में बड़ा खेल किया गया है। अभ्यर्थियों से मोटी रिश्वत लेकर भर्ती करने के आरोप लग रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि भर्ती की निष्पक्ष जांच करते हुए नियुक्त हुए परिचालकों के कागजों का सत्यापन कराया जाए तो बड़ा घपला सामने आ सकता है।
कर्मचारी संगठन भी सवालों में
छोटे-छोटे मुद्दों और कर्मचारियों की परेशानी को लेकर धरना-प्रदर्शन करने वाले रोडवेज कर्मचारी संगठनों की इस भर्ती पर चुप्पी सवाल उठा रही है। बिना पारदर्शिता के नियम-कायदे तोड़ते हुए इतनी बड़ी भर्ती हो गई और किसी भी कर्मचारी संगठन ने विरोध करते हुए भर्ती की जांच की मांग नहीं की। भर्ती में कर्मचारी संगठनों के भी चहेतों को भी रखे जाने की चर्चा चल रही है। कहा जा रहा है कि इसके चलते ही कर्मचारी संगठन चुप हैं।
इनका मिलना था मौका
रीजन में जुलाई 2016 में ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत भर्ती हुए 400 संविदा परिचालकों की आरक्षण और शैक्षिक वरीयता अनुसार सूची तैयार की गई थी, जो जून 2017 तक मान्य है। जरूरत पड़ने पर सूची में शामिल संविदा परिचालकों को बुलाकर नियुक्ति दी जानी थी। लेकिन 400 संविदा परिचालकों की उपलब्धता के बावजूद 140 संविदा परिचालकों की ऑफ लाइन भर्ती कर ली गई।
कर्मचारी नेता खड़े कर रहे हाथ
नियम विरुद्ध हुई भर्ती के बारे में कर्मचारी संगठनों के नेता भी अपने को अनभिज्ञ बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के क्षेत्रीय मंत्री लाखन सिंह और यूपी रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष सुहेल अहमद का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि 140 संविदा परिचालक गुपचुप तरीके से रख लिए हैं। उन्हें तो 400 संविदा परिचालकों की पुरानी सूची में से ही रखे जाने की जानकारी दी गई थी। अगर अधिकारियों ने साठगांठ कर ऐसा किया है तो यह गलत है। मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
पूरी पारदर्शिता बरती
आरएम मेरठ रोडवेज रीजन एसके बनर्जी का कहना है कि मुख्यालय से ही ऑफ लाइन भर्ती करने के आदेश मिले थे। भर्ती की जानकारी नोटिस बोर्ड पर चस्पा की गई थी। पहले से चयनित 400 अभ्यर्थियों की सूची में से भी काफी को भर्ती किया गया है। भर्ती में पूरी पारदर्शिता बरती गई है।