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नकली किताब प्रकरण: नहीं लगा सुराग कहां से आए स्याही और कागज
Wed, 26 Aug 2020 02:24 AM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Wed, 26 Aug 2020 02:24 AM IST
सार
- एसजीएसटी विभाग ने खंगाली टीएनएचके प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशन की फाइल
- पहले वैट अब जीएसटी में पंजीकरण, पर पता अलग-अलग, सीजीएसटी भी कर रही पड़ताल
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नकली किताबों का गोदाम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मेरठ में एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने के मामले में राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग (एसजीएसटी) के पास अभी कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। खुलासे के पांच दिन बाद भी यह पता नहीं चल सका है कि नकली किताबें छापने के लिए कागज और स्याही कहां से आ रही थी। अगर कागज और स्याही सप्लाई करने वाली फर्में जीएसटी विभाग में पंजीकृत हैं तो तभी जीएसटी लगाया जाएगा।
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मंगलवार को एसजीएसटी अधिकारियों ने दोनों फर्मों की फाइलें खंगालीं। एसजीएसटी (एसआईबी) के एडिशनल कमिश्नर शशि भूषण सिंह ने बताया कि अनिता गुप्ता के नाम से टीएनएचके प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशन 22 जनवरी 2002 से पंजीकृत है।
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पहले फर्म वैट में थी और अब एक जुलाई 2017 से जीएसटी में पंजीकृत है। रिटर्न भी लगातार फाइल कर रहे हैं। मार्च का आखिरी रिटर्न 22 जुलाई 2020 को फाइल किया गया है। बाकी पिछले रिटर्न भी फाइल हुए हैं। वैट में पहले इनका पता विजय नगर वेस्टर्न कचहरी रोड का लिखा हुआ था। अब जीएसटी में मोहकमपुर का पता है।
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पता बदला तो बताया क्यों नहीं
एडिशनल कमिश्नर के अनुसार फर्म का पता तो बदला जा सकता है। लेकिन इसकी सूचना देनी होती है। जानकारी की जा रही है कि इन्होंने सूचना दी थी या नहीं। अगर सूचना नहीं दी और पता बदल दिया तो पेनल्टी लगेगी।
इसके अलावा मेरठ सिक्योरिटी प्रेस के नाम से भाजपा नेता संजीव गुप्ता की फर्म भी जीएसटी में 8 सितंबर 2010 से रजिस्टर्ड है। इसका भी मोहकमपुर का पता है। दोनों फर्म सीजीएसटी में पंजीकृत हैं। हालांकि अब सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी दोनों की ही टीमें कार्रवाई कर सकती हैं। इसलिए एसजीएसटी पड़ताल कर रही है।
उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपी पकड़े नहीं गए हैं और जो गिरफ्तार किए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। ऐसे में अभी कागज और स्याही खरीदने को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है। अगर किसी बिना रजिस्टर्ड फर्म से खरीदा गया है तो 12 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगेगा।
एडिशनल कमिश्नर के अनुसार फर्म का पता तो बदला जा सकता है। लेकिन इसकी सूचना देनी होती है। जानकारी की जा रही है कि इन्होंने सूचना दी थी या नहीं। अगर सूचना नहीं दी और पता बदल दिया तो पेनल्टी लगेगी।
इसके अलावा मेरठ सिक्योरिटी प्रेस के नाम से भाजपा नेता संजीव गुप्ता की फर्म भी जीएसटी में 8 सितंबर 2010 से रजिस्टर्ड है। इसका भी मोहकमपुर का पता है। दोनों फर्म सीजीएसटी में पंजीकृत हैं। हालांकि अब सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी दोनों की ही टीमें कार्रवाई कर सकती हैं। इसलिए एसजीएसटी पड़ताल कर रही है।
उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपी पकड़े नहीं गए हैं और जो गिरफ्तार किए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। ऐसे में अभी कागज और स्याही खरीदने को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है। अगर किसी बिना रजिस्टर्ड फर्म से खरीदा गया है तो 12 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगेगा।