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लाखों की आस्था का केंद्र है फिरोजपुर महादेव मंदिर

Mon, 29 Jul 2019 02:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2019 02:03 AM IST
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faith in lord shiva
सैफपुर फिरोजपुर का ऐतिहासिक महादेव मंदिर। - फोटो : MAWANA
बहसूमा। हस्तिनापुर और आसपास की धरती ऐतिहासिक खजाना छुपाए हुए है। इसमें दुर्वासा ऋषि द्वारा स्थापित ऐतिहासिक फिरोजपुर महादेव मंदिर भी है। यह आज भी बिना छत के है। यह लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है।
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कौरव-पंाडवों की राजधानी हस्तिनापुर से 12 किलोमीटर दूर स्थित फिरोजपुर महादेव मंदिर है। इसे दुर्वासा ऋषि ने स्थापित किया था। वह यहां तपस्या करते थे। महाभारत युद्ध के दौरान कुंती एवं गांधारी यहां अपने पुत्रों की विजयश्री का आशीर्वाद लेने आई थीं। मान्यता है कि महादेव मंदिर में आने वालों को निराशा नहीं मिलती है। इस मंदिर में वर्ष में दो बार विशाल कांवड़ मेला लगता है। देश के कोने-कोने से आकर हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। किवदंती है कि मुगलों का शासन स्थापित होने पर फिरोजपुर महादेव मंदिर का शिवलिंग झाड़ में विलुप्त हो गया था। फिरोजपुर गांव सैयद हैदर अली का जमींदारा था। गांव के ग्वाले गाय चराने इस मंदिर के पास जाते थे। गायों के झुंड से निकलकर एक बछिया झाड़ों के बीच चली जाती थी। कई दिन ऐसा हुआ तो ग्वालों ने उसका पीछा किया। जिसे देखकर वे दंग रह गए। बछिया के थन से शिवलिंग पर दूध की धार पड़ रही है। इसकी चर्चा जमींदार हैदर अली तक पहुंची। उसने मजदूरों को पत्थर की खुदाई के लिए भेजा।
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बताया जाता है कि जितनी खुदाई की जाती पत्थर उतना ही नीचे धंसता जाता था। मजदूरों ने जमींदार को अवगत कराया। इस पर हैदर स्वयं पहुंचा तथा मजदूरों से पत्थर तोड़ने के लिए कहा। मजदूर इसमें सफल नहीं हो सके। हैदर अली फिर इसे आरे से काटने के निर्देश दिए। जमींदार प्रथा समाप्त होने के बाद हैदर अली गांव से चला गया। पुजारी ने बताया कि कुछ माह बाद गांव के एक व्यक्ति को सपने में आवाज आई कि सुबह उठकर गंगा स्नान करके शिवलिंग पर जलाभिषेक करो। उस समय गंगा रामराज के पास बहती थी। इसके बाद से फिरोजपुर महादेव मंदिर पर जलाभिषेक हो रहा है। यहां सावन व फाल्गुन में विशाल कांवड़ मेला लगता है।
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यह भी किवदंती है कि मंदिर में आज तक छत नही पड़ पाई है। मंदिर के पुजारी धर्मपाल ने बताया कि छत डालने का कई बार प्रयास किया जा चुका है, लेकिन कुछ न कुछ अड़चन आ जाती है।
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